झारखंड सरकार ने जल संरक्षण के लिए लॉन्च किया मेगा प्लान, संवर जाएगी किसानों की तकदीर

झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले साल का सूखा देखने के बाद जल संरक्षण को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। उसने ऐसी योजना लॉन्च की है, जो सिंचाई में भी सहायता पहुंचाएगी और भूजल स्तर भी बढ़ाएगी।

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झारखंड में बीते साल किसानों को सूखे की बहुत बड़ी मार झेलनी पड़ी थी। भविष्य में किसानों को बारिश से धोखा मिलने पर इस तरह का संकट नहीं झेलना पड़े, इसके लिए लगभग 500 करोड़ की जल संरक्षण योजना लॉन्च की गई है। यह इस तरह की योजना है, जिससे किसानों को खेती में सहायता मिलेगी, भूजल का स्तर बढ़ सकेगा और मछली पालन का अवसर बढ़ने से किसानों को आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सूखा पीड़ित किसानों के लिए सरकार पहले से ही कई तरह से सहायता उपलब्ध करा रही है और अब यह ऐसी योजना शुरू की है, जिससे कृषि को भी फायदा होगा और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।

झारखंड में मेगा जल संरक्षण स्कीम लॉन्च
झारखंड सरकार जल संरक्षण के लिए बहुत बड़ा कदम उठा रही है। शनिवार को हेमंत सोरेन सरकार ने किसानों के कल्याण के इरादे से 467.32 करोड़ रुपए की रकम वाली योजना लॉन्च की है। दरअसल, पिछले साल मानसून में राज्य ने सूखे की स्थिति का सामना किया था। ऐसे में इस तरह की योजना किसानों के बिखरते मंसूबों को हौसला देने का काम कर सकता है। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 2,133 तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। वहीं राज्य के 24 जिलों के सभी प्रखंडों में पर्कलेशन टैंकों के निर्माण की योजना तैयार की गई है।

भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी सहायक
झारखंड सरकार की इस मेगा जल संरक्षण योजना की शुरुआत के साथ ही 71 तलाबों और 184 पर्कलेशन टैंकों के नवीनीकरण की नींव रख दी गई है। पर्कलेशन टैंक कृत्रिम रूप से सतह पर तैयार किया गया एक ऐसा जल क्षेत्र होता है, जिसके माध्यम से जमीन के नीचे पानी का रिसाव होता रहता है, ताकि भूजल के स्तर को रिचार्ज करके उसे बढ़ाया जा सके। झारखंड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के मुताबिक, 'सरकार झारखंड के किसानों के फायदे के लिए हर तरह की कोशिश कर रही है। '

तालाबों में मछली पालन की भी संभावनाएं बढ़ेंगी
झारखंड सरकार सूखा पीड़ित किसानों को मुश्किलों से निकालने के लिए लगातार कोशिशों को जारी रखे हुई है। राज्य सरकार इस उम्मीद के साथ आगे बढ़ रही है कि बिजली की बेहतर व्यवस्था के बीच अगर तालाबों में पानी उपलब्ध रहेगा तो सिंचाई का काम काफी आसान बन सकता है और सूखे जैसी स्थिति का सामना करना आसान हो सकता है। सरकार तालाबों में मछली पालन की भी संभावनाएं तलाश रही है।

झारखंड सरकार के मुताबिक उसके पास राज्य के सूखा पीड़ित किसानों के 31.33 लाख आवेदन आए हैं और उनमें से अबतक 8.5 को वित्तीय सहायता उपलब्ध भी करवाई जा चुकी है। कृषि मंत्री का कहना है कि 'हमारा प्रयास है कि 30 लाख सूखा-पीड़ित किसानों तक 1,200 करोड़ रुपए की राहत जल्द पहुंचाएं।' राज्य की सोरेन सरकार ने पिछले साल 29 नवंबर को प्रदेश के 260 में से 226 प्रखंडों को 'सूखा प्रभावित' जोन घोषित की थी और बारिश की कमी की वजह से पीड़ित हुए प्रत्येक खेतिहर परिवारों को 3,500 रुपए कैश मदद देगी।

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