झारखंड की राजनीति में 'बगावत' ने मचाया भूचाल, NDA और इंडिया ब्लॉक को कितनी सीटों पर बागियों से खतरा?
Jharkhand Election 2024: झारखंड विधानसभा चुनावों में एनडीए (NDA) हो या इंडिया गठबंधन दोनों ही बागी नेताओं ने परेशान हैं। भाजपा से लेकर जेएमएम तक नामांकन वापसी के बाद भी पार्टियां अपने ही नेताओं के बगावत से मुश्किल में है। झारखंड में दोनों चरणों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है, चरण की 43 सीटों के लिए नामांकन वापसी का चरण भी खत्म हो गया है।
राजनीतिक दल कई सीटों पर अपनों से जूझ रहीं हैं। कई पार्टियों में आंतरिक संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एनडीए का नेतृत्व कर रही भाजपा 6 सीट, आजसू 3 सीट, जेडीयू एक सीट और लोजपा एक सीट पर बागी नेताओं को सामना करना पड़ सकता है।

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वहीं इंडिया गठबंधन में झामुमो 5 सीटों पर फंसी है। कांग्रेस 11 सीटिंग सीटों पर अपने उम्मीदवार किसी न किसी कारण से कठिन लड़ाई में फंसे हैं।
भाजपा को किन सीटों पर करना पड़ रहा है बागियों का सामना?
भाजपा के सामने चुनौतियां भी हैं, क्योंकि उसे कई सीटों पर आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रांची, कांके, विशुनपुर, सिसई और देवघर जैसे क्षेत्रों में असंतुष्ट सदस्यों को शांत करने के प्रयासों के बावजूद, गुमला, जमशेदपुर पूर्व, लातेहार, हटिया, नाला और धनवार में विद्रोह अभी भी शांत नहीं हुआ है। गुमला, जमशेदपुर पूर्वी, लातेहार, हटिया, नाला, धनवार में भाजपा के बागी अगर शांत नहीं हुए तो उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
हटिया में आजसू के भरत काशी पीछे नहीं हट रहे हैं, जो भाजपा के उम्मीदवार नवीन के लिए मुश्किल है। गुमला सीट पर सुदर्शन भगत भाजपा के उम्मीदवार हैं और मिशिर कुजूर बागी बने हुए हैं। जमशेदपुर पूर्व में शिवशंकर सिंह व राजकुमार सिंह बागी बनकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। धनवार में बाबूलाल मरांडी के खिलाफ निरंजन राय हैं।
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वहीं NDA गठबंधन में शामिल ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) के सदस्य भी पार्टी लाइन से हटकर एनडीए उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। AJSU अपने असंतुष्टों को वापस लेने के लिए मनाने में उतनी सफल नहीं रही है। हालांकि, सिसई और लातेहार में,असंतुष्ट उम्मीदवारों द्वारा अपने नामांकन वापस लेने से कुछ हद तक बढ़त हासिल हुई। इन प्रयासों के बावजूद, इस तरह के विद्रोह इन पार्टियों के आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं, जो संभावित रूप से चुनाव परिणामों और भावी सरकार के स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं।
आजसू के लिए ईचागढ़ में हरेलाल महतो के खिलाफ अरविंद सिंह खड़े हैं। जुगसलाई में रामचंद्र सहिस के सामने भाजपा के विमल बैठा बागी बने हुए हैं। लोहरदगा सीट पर नीरू शांति के खिलाफ भाजपा के रमेश उरांव खड़े हो गए हैं।
जदयू के लिए जमशेदपुर पश्चिम में भाजपा के विकास व शम्भू चौधरी बागी हैं। लोजपा के लिए चतरा सीट पर आजसू के अशोक गहलौत बागी हैं।
JMM-कांग्रेस को किन सीटों पर करना पड़ रहा है बागियों का सामना?
JMM को चक्रधरपुर, विशुनपुर, सिमडेगा, तोरपा, रांची जैसी सीटों पर बागी नेताओं से चुनौती मिल सकती है। रांची में जेएमएम की महुआ माजी के खिलाफ राजद की रानी कुमारी चुनाव लड़ रही हैं। सिमडेगा में भूषण बाड़ा के खिलाफ झामुमो और कांग्रेस के बागी नेता खड़े हैं।
चक्रधरपुर में सुखराम उरांव के खिलाफ के विजय गागराई हैं। विशुनपुर में कांग्रेस के शिवकुमार भगत बागी बने हुए हैं। तोरपा में झाममो के खिलाफ, कांग्रेस के पुनीत हेंब्रम बागी बनकर चुनौती दे रहे हैं।
कांग्रेस को पांकी और मनिका विधानसभा सीटों पर बागियों का सामना करना पड़ सकता है। पांकी में लाल सूरज के खिलाफ बिट्टू सिंह हैं। वहीं मनिका में रामचंद्र सिंह के खिलाफ कांग्रेस मुनेश्वर उरांव खड़े हैं।
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पाकुड़ में आलमगीर के जेल में होने से भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ी है। जरमुंडी सीट पर कांग्रेस नेता बादल पत्रलेख का रुख भी पार्टी के लिए संकट बन सकती है। जामताड़ा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार इरफान अंसारी के विवादित बयान पार्टी के लिए मुसीबत बनी हुई है।
कांग्रेस इसके अलावा बड़कागांव, रामगढ़, बेरमो, खिजरी, सिमडेगा, कोलेबिरा, झरिया और बरही की सिटिंग सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार फंसे हुए हैं।
राजद के लिए कोडरमा सीट भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। यहां सुभाष यादव के खिलाफ झामुमो के कामेश्वर महतो हैं।












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