पूर्वी सिंहभूमः नदी से महिला का शव ले आकर विधायक ने दफनाया, 18 घंटे तक पड़ी रही लाश
पूर्वी सिंहभूम। कोरोना वायरस का खौफ अब लोगों के व्यवहार में दिखने लगा है। कई जगहों से ऐसी खबरें सामने आईं, जहां लोग शवों का अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे हैं। जिसके कारण प्रशासन को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ताजा मामला झारखंड के पश्चिम सिंहभूम का है, जहां एक बुजुर्ग महिला का शव 18 घंटे तक पड़ा रहा लेकिन लोग अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे थे। करीब 18 घंटे बाद बहरागोड़ा के जेएमएम विधायक समीर महंती ने पहल की तब जाकर शव का अंतिम संस्कार हो पाया।

बुजुर्ग महिला का शव कुएं में ढूंढा
दरअसल, जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के मोहनपुर निवासी बुजुर्ग महिला चंचला नायक की लाश गुरुवार की दोपहर को जामशोला में सुवर्णरेखा नदी से बरामद किया गया था। इसके बाद शाम को पांच बजे नारायणपुर घाट में दफनाया गया। इसके बाद विभाग ने राहत की सांस ली। इससे पहले बुधवार की पूरी रात बुजुर्ग महिला के शव को बहरागोड़ा के एक श्मशाम घाट के कुएं में खोजा गया। लेकिन वहां पर भी शव नहीं मिला।

परिजनों ने शव को नदी में फेंका
इसके बाद प्रशासन को जानकारी मिली कि शव को सुवर्णरेखा नदी में बहा दिया गया है। आनन-फानन में प्रशासन ने ग्रामीणों की मदद से सुवर्णरेखा नदी से बुजुर्ग महिला का शव बरामद किया। बता दें कि जांच में रिपोर्ट निगिटिव आने के बाद भी कोरोना के खौफ में ग्रामीणों वृद्धा के शव को दफनाने से रोक दिया, जिसके बाद परिवारवालों ने शव को सुवर्णरेखा नदी में फेंक दिया।

रिपोर्ट निगेटिव रहने पर भी ग्रामीणों ने दफनाने से रोका
परिजनों के अनुसार बीते 19 अप्रैल की रात को चंचला नायक की तबीयत बिगड़ गई तो उन्हें बहरागोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। बुजुर्ग महिला टीबी की बीमारी से पीड़ित थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के बाद भी उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उन्हें एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर रेफर कर दिया गया। लेकिन वहां ले जाने से पहले स्वास्थ्य केन्द्र में वृद्धा की मौत हो गई।

नदी से शव को निकाला गया
मौत के बाद कोरोना जांच के लिए सैंपल लेकर शव को अनुमंडल अस्पताल भेज दिया गया। 22 अप्रैल को रिपोर्ट निगेटिव आने के प्रशासन ने शव को बेटी को सौंप दिया। लेकिन परिवारवाले जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए शमशान पहुंचे, ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर दफनाने से रोक दिया। जिसके बाद परिजनों ने शव को नदी में बहा दिया। प्रशासन को जब इस बात का पता चला, तो शव को नदी से निकाल कर अंतिम संस्कार किया गया।












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