Jharkhand Chunav: फ्लोटिंग वोटरों के हाथ में नई सरकार की चाबी! पहले चरण के मतदान से मिल रहा क्या संकेत?
Jharkhand Chunav 2024: झारखंड के मतदाताओं ने पहले चरण के मतदान में पिछली बार से काफी ज्यादा उत्साह दिखाया है। कुछ सीटों पर तो बहुत ही भारी मतदान हुआ है। वनइंडिया ने मतदान वाले दिन झारखंड के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग वर्गों के मतदाताओं की जो नब्ज पकड़ने की कोशिश की है, उसका इशारा चौंकाने वाले परिणाम की ओर है।
बुधवार (13 नवंबर, 2024) को झारखंड की 81 में से पहले चरण की 43 सीटों पर 66.5% मतदान हुआ। अंतिम आंकडों के बाद इसमें थोड़ी बढ़ोतरी की ही संभावना है। यानी 2019 के विधानसभा चुनावों में हुई 63.7% वोटिंग से करीब 3% अधिक मतदान हुआ है।

आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में भारी मतदान क्या कहता है?
सबसे बड़ी बात ये है कि मतदान में यह इजाफा खासकर के ग्रामीण क्षेत्रों और उनमें से भी आदिवासी बहुल कोल्हान डिविजन में देखा गया है। जबकि, रांची और जमशेदपुर के शहरी इलाकों में मतदाताओं की उदासीनता फिर से बरकरार ही देखने को मिली है। पहले चरण में कुल 1.37 वोटर हैं।
नक्सली इलाकों में भी जमकर डाले गए वोट
सबसे ज्यादा मतदान खरसांवा में हुआ, जहां 79.1% लोगों ने वोट डाले। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इसी तरह से लोहरदगा में भी 73% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई है। इस बार के मतदान की एक और खासियत रही है कि गढ़वा के बूढ़ा पहाड़ इलाका जो कि कभी नक्सिलयों का गढ़ माना जाता है, वहां मतदाताओं ने लंबी कतार लगाकर लोकतंत्र के महापर्व में योगदान दिया है।
स्थानीय मतदाताओं ने दिए चौंकाने वाले संकेत
मतदान के दिन रांची से जमशेदपुर की करीब सवा सौ किलोमीटर की दूरी तय करते हुए वनइंडिया ने अलग-अलग वर्गों के मतदाताओं से अनौपचारिक बात की और वोटिंग के मौजूदा पैटर्न में उनका रुझान परखने की कोशिश की। स्थानीय लोगों, जिनमें बड़ी तादाद में महिलाएं शामिल थीं, उन्होंने कुछ ऐसे संकेत दिए, जिसमें चौंकाने वाले परिणाम के संकेत छिपे हो सकते हैं।
महिला सुरक्षा आदिवासियों के बीच भी मुद्दा
आदिवासी महिलाओं में एक बात विशेष रूप से दिखी कि उनमें हेमंत सोरेन के नेतृत्व को लेकर कोई नाराजगी नहीं थी। उन्हें मैया सम्मान योजना की राशि मिलने की भी खुशी थी। लेकिन, कई आदिवासी महिलाओं में महिला सुरक्षा की वाजिब चिंता भी खुलकर नजर आई और इसके लिए वह भाजपा की ओर झुकाव का भी संकेत दे गईं। उनके मन में कहीं न कहीं यह बात बैठी हुई दिखी कि महिला सुरक्षा के लिए बीजेपी बेहतर है।
अवैध घुसपैठ का मुद्दा आदिवासियों के बीच भी प्रभावी
इसी तरह से आदिवासी पुरुषों में भी हेमंत सोरेन की लोकप्रियता कायम दिखी। उन्हें उनपर लगे घोटाले को लेकर कोई शिकायत भी नहीं है। लेकिन, बांग्लादेशी घुसपैठियों की चिंता उन्हें भी सता रही है और इसको लेकर वे बहुत गंभीर भी हैं। इससे लग रहा है कि भाजपा का यह नैरेटिव आदिवासी बेल्ट में भी असर कर रहा है।
2-3% फ्लोटिंग वोटरों के हाथों में हो सकती है झारखंड की नई सरकार की चाबी!
जेएमएम की अगुवाई वाला इंडिया ब्लॉक मूल रूप से आदिवासी और मुसलमान वोटरों पर ही ज्यादा भरोसा कर रहा है। ऐसे में अगर बीजेपी उसके कोर वोट बैंक में से 2-3% फ्लोटिंग वोटरों में भी सेंध लगाने में सफल होती है तो परिणाम सत्ताधारी गठबंधन की उम्मीदों से अलग हो सकते हैं।
पहले चरण की 43 सीटों पर 2019 के चुनाव में क्या था परिणाम?
2019 में बीजेपी का आजसू से गठबंधन नहीं हुआ था। इसका खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ा था। जेवीएम भी अलग चुनाव लड़ी थी, लेकिन बीजेपी में अब इसका विलय हो चुका है। तब इन 43 सीटों पर बीजेपी को 33.4%, आजसू को 6.7% और जेवीएम को 5.6% वोट मिले थे। वहीं इंडिया ब्लॉक या महागठबंधन का कुल वोट शेयर 36.1% वोट मिले थे।
अगर सीटों के हिसाब से देखें तो 43 सीटों में से बीजेपी को 13 और जेवीएम को 1 सीट मिली थी। वहीं इंडिया ब्लॉक को कुल 26 सीटें मिली थीं। ऐसे में फ्लोटिंग वोटरों की ओर से डाले गए वोट बहुत मायने रखने वाले हैं, जिनके रुख में थोड़ा सा भी बदलाव, नतीजे को निश्चित तौर पर प्रभावित कर सकते हैं।
2024 के लोकसभा चुनावों में भी पहले चरण की सीटों पर एनडीए का रहा दबदबा
इन्हीं सीटों पर इस साल के लोकसभा चुनावों में एनडीए अपना दबदबा दिखा भी चुका है। उसने न केवल इन 43 सीटों पर 50.3% वोट जुटाए, बल्कि 26 सीटों पर बढ़त बनाकर इंडिया ब्लॉक को पछाड़ भी दिया था। महागठबंधन को 41% वोट और कुल 17 सीटों पर बढ़त मिली थी।
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