झारखंड में बीजेपी की संकल्प यात्रा, बाबूलाल मरांडी का यह अभियान महत्वपूर्ण क्यों है? जानिए
झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की संकल्प यात्रा शुरू हो गई है। राज्य में 2024 में लोकसभा चुनावों के अलावा विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इसलिए भाजपा की इस यात्रा का राजनीतिक महत्त्व बहुत बढ़ गया है। पार्टी हर हाल में राज्य में वापस सत्ता में वापस लौटना चाह रही है और मरांडी को जिम्मेदारी देने का मतलब ही यही है।
झारखंड की राजनीति में जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेने के बाद बाबूलाल मरांडी का कद काफी बड़ा है। क्योंकि, वे न सिर्फ प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हैं, बल्कि राज्य के विकास से भी उनकी प्रतिष्ठा मजबूती से जुड़ी रही है।

सिदो कान्हू की जन्मस्थली से संकल्प यात्रा की शुरुआत
बाबूलाल मरांडी ने बीजेपी के संकल्प यात्रा की शुरुआत साहिबगंज जिले के भोगनाडीह से की है। इसका बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश है, जो सीधे सत्ताधारी जेएमएम की राजनीति की धार को देखते हुए किया गया है। क्योंकि, भोगनाडीह झारखंड के अमर सपूत सिदो कान्हू की जन्मस्थली है। यहां मरांडी ने उनके वंशजों से भी मुलाकात की है।
सीएम हेमंत सोरेन की चुनाव क्षेत्र में पहली जनसभा
इसके अलावा भोगनाडीह का नाम चांद-भैरव और फूलो-झानो से भी जुड़ा रहा है, जो झारखंड के भावनात्मक अस्तित्व से जुड़े हैं। इसके साथ ही मरांडी की यात्रा की एक और बात खास है। उन्होंने संकल्प यात्रा की पहली जनसभा यहीं पर बरहेट विधानसभा से की है, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का चुनाव क्षेत्र है।
इन लुटेरों को झारखंड से भगाना जरूरी है- बाबूलाल मरांडी
यात्रा के पहले दिन ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि पूर्व पीएम अटल बिहारी के नेतृत्व में जिस विकसित झारखंड के उद्देश्य से यह राज्य बना था, वह कहीं नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा है, 'बीजेपी के विकास के कार्यों को आगे बढ़ाना है...इन लुटेरों को झारखंड से भगाना जरूरी है, अभी इन्हें सत्ता से हटाना जरूरी है। ....इन्होंने जिस तरह से लूटा है....जहां उनकी जगह होगी वहां भेजना है....।'
'लूट और भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं किया है'
गुरुवार को संकल्प यात्रा का पहला दिन रहा। 40 दिनों की इस यात्रा को सात चरणों में विभाजित किया गया है। अंतिम चरण 3 से 10 अक्टूबर तक चलेगा और पहला चरण 20 अगस्त तक जारी रहना है। पहले दिन से बीजेपी अध्यक्ष के निशाने पर राज्य की जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन की सरकार है। इस सरकार के बारे में वे कहते हैं कि इन्होंने 'लूट और भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं किया है।'
'भूख, भ्रष्टाचार और कुशासन से मुक्ति का संकल्प'
यात्रा शुरू करने से पहले ही वे कह चुके हैं, 'झारखंड में भ्रष्टचार अपने चरम पर है। अधिकारी बिना डर के घूस ले रहे हैं। बिना पैसे के जनता का कोई काम नहीं होता। इसलिए मैंने प्रदेश को भूख, भ्रष्टाचार और कुशासन से मुक्त कराने का संकल्प लिया है। '
आदिवासी वोट बैंक पर है मरांडी की नजर
झारखंड में पिछला विधानसभा चुनाव तत्कालीन सीएम रघुवर दास के नेतृत्व में लड़ चुकी बीजेपी को आदिवासी नेतृत्व की अहमियत महसूस हो चुकी है। मरांडी सीधे उसी लाइन के सहारे पार्टी को फिर से सत्ता में वापस लाने के मंसूबे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उनका कहना है, 'एक आदिवासी मुख्यमंत्री ने आदिवासियों को सबसे ज्यादा लूटा है। इस सरकार के दौरान कानून और व्यवस्था खराब हुई है, जबकि विकास का काम रुक गया और भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ गया है।'
दरअसल, राज्य के सीएम हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय से रक्षा जमीन घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए नोटिस मिला हुआ है। इससे पहले भी वे कई मामलों में जांच एजेंसियों के दायरे में आ चुके हैं। इन तमाम परिस्थितियों के रहते बीजेपी को मरांडी में बहुत बड़ी उम्मीद की किरण नजर आ रही है। उनकी छवि साफ-सुथरी है, विकास पुरुष के रूप में पहचान है और आदिवासी चेहरा होने की वजह से राजनीतिक रूप से भी उनका एक खास जनाधार है। (इनपुट-पीटीआई)












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