Jharkhand: अभी टला नहीं संकट, हैदराबाद में हाई सिक्योरिटी के बीच 37 विधायक, 5 फरवरी को परीक्षा की घड़ी
Jharkhand Political News: हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद झारखंड में सियासी उथल-पुथल जारी है। हालांकि नए मुख्यमत्री चंपई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है, लेकिन चंपई सरकार पर मंडरा रहा खतरा अभी टला नहीं है।
शुक्रवार को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद JMM और गठबंधन में शामिल सभी विधायकों को हैदराबाद भेज दिया है। जहां वो कड़ी सुरक्षा में हैं। इस बीच सोमवार यानी 5 फरवरी को झारखंड सरकार को फ्लोर टेस्ट में अपना बहुमत साबित करना है।

दरअसल, विश्वास मत से पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त की किसी भी तरह की कोशिशों को रोकने के लिए महागठबंधन ने अपने सभी विधायकों को हैदराबाद भेज दिया है। शुक्रवार को चंपई सोरेन के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन के 37 विधायक हैदराबाद पहुंच गए हैं। यहां वो लिओनिया रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं।
शुक्रवार को चंपई सोरेन के अलावा कांग्रेस के आलमगीर आलम और राजद के सत्यानंद भोक्ता ने भी शपथ ली। दोनों नेताओं को मंत्री बनाया गया है। वहीं JMM के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 5 फरवरी को फ्लोर टेस्ट का सामना करना होगा। बता दें कि चंपई सोरेन ने 43 विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंपा है।
विधायकों की नाराजगी आई सामने
इधर, झारखंड में सोरेन की पार्टी में बगावत शुरू हाे गई है। साहिबगंज जिले के बोरिओ विधानसभा क्षेत्र से विधायक लोबिन हेम्ब्रेम का वीडियो सामने आया है। वह मीडिया से बात करते हुए पार्टी छोड़ने की बात कह रहे हैं। साथ ही बिशुनपुर से JMM विधायक चमरा लिंडा भी नाराज बताए जा रहे हैं।
समझिए झारखंड में बहुमत का गणित
झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीट हैं। ऐसे में सरकार को बहुमत साबित करने के लिए 41 विधायक होने चाहिए। वहीं दलों के पास विधायकों की संख्या की बात करें तो जेएमएम के पास कुल 29 विधायक है। कांग्रेस के पास 17 और आरजेडी के पास सिर्फ एक विधायक है। ऐसे में झारखंड क सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास विधायकों की संख्या 47 है।
वहीं वाम दल के विधायक विनोद सिंह का भी समर्थन भी महागठबंधन को हासिल है। इधर, विपक्षी दलों की ताकत की बात करें तो बीजेपी के पास 26, AJSU के तीन और निर्दलीय व अन्य के पास 3 विधायक हैं।












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