जापान ने छोड़ा रेडियोएक्टिव पानी, चीन ने लगाया आयात पर बैन

फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से जल निकासी शुरू

चीन ने जापान के समुद्री उत्पादों पर बैन लगा दिया है. फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र से रेडियोएक्टिव पानी समुद्र में छोड़े जाने की शुरुआत होते ही चीन ने यह फैसला किया है. गुरुवार को जापान ने रेडियोएक्टिव पानी की पहली खेप को प्रशांत महासागर में छोड़ा है.

एक लाइव वीडियो में टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी होल्डिंग्स (टेपको) ने दिखाया कि एक कर्मचारी ने समुद्र में पानी छोड़ने के लिए पंप को खोल दिया. इस तरह इस विवादित कदम की शुरुआत हुई, जो दशकों तक जारी रहने का अनुमान है.

पंप के मुख्य संचालक ने वीडियो में कहा, "सीवॉटर पंप ए एक्टिवेट किया जाता है." इसके तीन मिनट बाद में टेपको इस बात की पुष्टि की कि सीवॉटर पंप को दोपहर बाद 1.03 बजे चालू किया गया. कंपनी ने कहा कि इसके 20 मिनट बाद अतिरिक्त पानी छोड़ा जाना शुरू हुआ. संयंत्र के अधिकारियों ने कहा कि पानी का समुद्र में छोड़ा जाना सुचारू रूप से जारी है.

सुरक्षा को लेकर चिंताएं

जापान ने कई महीने पहले ऐलान किया था कि वह फुकुशिमा का पानी प्रशांत महासागर में छोड़ेगा. देश के मछुआरों ने इस कदम का विरोध किया था. चीन और दक्षिण कोरिया में भी कई समूहों ने इसका विरोध किया था, जिसके बाद यह एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया था.

जापान ने हालांकि विरोध के बावजूद कार्रवाई को नहीं रोका और गुरुवार को इसकी शुरुआत हो गयी. इसलिए कुछ ही देर में चीन के कस्टम अधिकारियों ने जापान से समुद्री उत्पादों के आयात पर रोक का ऐलान कर दिया. अधिकारियों ने कहा कि यह प्रतिबंध तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और इसमें हर तरह की समुद्री खाद्य सामग्री शामिल होगी.

अधिकारियों ने कहा कि "परमाणु-संक्रमित पानी के खतरे के कारण खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमों में लगातार बदलाव किया जाएगा."

सुरक्षा का भरोसा

जापान सरकार और टेपको का कहना है कि फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को पूरी तरह बंद करने के लिए पानी को छोड़ा जाना जरूरी है ताकि दुर्घटनावश किसी तरह की लीकेज से बचा जा सके. उनका कहना है कि पानी का ट्रीटमेंट किया गया है और उसकी सघनता कम की गयी है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय मानकों से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा और पर्यावरण पर उसका असर भी बेहद कम होगा.

एडिलेड यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर रेडिएशन रिसर्च, एजुकेशन, इनोवेशन के निदेशक टोनी हुकर ने कहा कि फुकुशिमा से जारी होने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित है. हुकर ने कहा, "यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के पीने के पानी को लेकर जारी निर्देशों से काफी नीचे है. यह सुरक्षित है. विकिरण को पानी में छोड़ना एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा है. मैं समझता हूं कि लोगों में चिंताएं हैं और ऐसा इसलिए है क्योंकि वैज्ञानिकों ने इसे बहुत अच्छे तरीके से समझाया नहीं है. हमें और ज्यादा शिक्षित करने की जरूरत है."

फिर भी, कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि कम मात्रा में भी विकिरण का असर लंबे समय में हो सकता है और इस पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है. गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निदेशक राफाएल मारियानो ग्रोसी ने कहा, "एजेंसी के विशेषज्ञ वहां मौजूद हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तरफ से निगरानी कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि आईएईए के मानकों के मुताबिक योजनाबद्ध तरीके से पानी को समुद्र में छोड़ा जाए." एजेंसी ने कहा है कि वह एक वेबपेज भी शुरू करेगी जहां छोड़े जा रहे पानी के आंकड़े उपलब्ध कराये जाएंगे.

फुकुशिमा हादसेके 12 साल बाद पानी का यह निकास शुरू हुआ है. मार्च 2011 में सुनामी और भारी भूकंप के कारण संयंत्र में हादसा हुआ था. तब से संयंत्र में रेडियोएक्टिव पदार्थ जमा हैं और टेपको व जापान सरकार का कहना है कि इस कारण वहां से रेडियोएक्टिव मलबे को निकालने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

वीके/एए (रॉयटर्स, एपी)

Source: DW

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