JCO कुलदीप सिंह कौन थे? जानें उस वीर योद्धा की कहानी, जो जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ रोकते हुए शहीद
Akhnoor Encounter JCO Kuldeep Singh: 'कुछ लोग वर्दी पहनते हैं, और कुछ उस वर्दी को जिया करते हैं।' कुलदीप सिंह ऐसे ही एक सच्चे सिपाही थे, जिन्होंने अपने देश की मिट्टी के लिए आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी। 11 अप्रैल की रात, जम्मू के अखनूर सेक्टर (Akhnoor Encounter)के केरी-बट्टल इलाके में LOC के पास आतंकियों की घुसपैठ रोकते हुए कुलदीप सिंह शहीद हो गए।
सेना ने बताया कि कुलदीप सिंह, जो 9 पंजाब रेजिमेंट से थे, उस टीम का हिस्सा थे जिसने पाकिस्तान से आए heavily armed आतंकियों को नाकाम किया।

JCO Kuldeep Singh: शहीद JCO के बारे में जानें
भारतीय सेना में JCO यानी Junior Commissioned Officer वो अनुभवी सैनिक होते हैं, जो सैनिकों और अफसरों के बीच एक अहम कड़ी की तरह काम करते हैं। इन्हें सम्मान के साथ 'साहब' कहकर बुलाया जाता है और ये मैदान में न सिर्फ लीडरशिप निभाते हैं बल्कि हर मुश्किल मोर्चे पर सबसे आगे रहते हैं।
कुलदीप सिंह भी ऐसे ही एक जांबाज जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) थे, जिन्होंने केरी-बट्टल सेक्टर में चल रहे काउंटर-इंफिल्ट्रेशन ऑपरेशन में लीडरशिप निभाई। रात करीब 9:15 बजे संदिग्ध हरकत दिखते ही भारतीय जवान सतर्क हो गए और गोलीबारी शुरू हो गई। इसी दौरान कुलदीप सिंह घायल हो गए। उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वो ज़िंदगी की जंग हार गए।
सेना ने कहा - 'हमारे लिए वो सिर्फ सैनिक नहीं, प्रेरणा हैं'
व्हाइट नाइट कोर ने अपने ट्वीट में लिखा - 'JCO कुलदीप सिंह ने घुसपैठियों की नापाक साजिश को नाकाम करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। हम उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हैं।'
उनकी इस वीरता के कारण न सिर्फ घुसपैठ रुकी, बल्कि उनकी टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि कोई आतंकी बचकर भारत की सीमा में दाखिल न हो पाए।
LOC पर तनाव बना हुआ है
अखनूर के बाद, पाकिस्तान ने पुंछ में भी सीज़फायर का उल्लंघन किया। 11 अप्रैल रात 11:30 बजे हाथी पोस्ट पर फायरिंग की गई जिसका जवाब भारतीय सेना ने पूरी ताकत से दिया। रात 12:30 बजे तक दोनों ओर से गोलीबारी होती रही।
इसके अलावा, जम्मू संभाग के कठुआ, किश्तवाड़ और उधमपुर इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार आतंकियों की मूवमेंट देखी जा रही है। सुरक्षा बलों ने कई मुठभेड़ में 3 आतंकवादियों को मार गिराया है, लेकिन 4 पुलिसकर्मी भी शहीद हुए हैं।
आखिरी सलाम
कुलदीप सिंह की शहादत एक बार फिर ये साबित करती है कि हमारी सीमाएं यूं ही सुरक्षित नहीं हैं। हर रात कोई ना कोई सैनिक आंखों में नींद की जगह जिम्मेदारी लिए खड़ा होता है - ताकि हम चैन की नींद सो सकें।












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