Who Is Yusuf Katari: पहलगाम हमले का मददगार दबोचा गया, लश्कर-TRF का प्यादा, जानें कैसे बना आतंक का हथियार?
Who Is Yusuf Katari: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए खूनी आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 26 पर्यटकों की निर्मम हत्या के इस जघन्य कांड में अब एक नया खुलासा हुआ है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुलगाम के 26 वर्षीय मोहम्मद यूसुफ कटारिया को गिरफ्तार किया है, जो इस हमले में आतंकियों का मददगार बना था।
लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसकी छद्म शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़ा यह शख्स आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का अहम किरदार था। आखिर कौन है यह मोहम्मद यूसुफ कटारिया? कैसे और कहां से दबोचा गया? आइए, इसआतंकी साजिश की परतें उघाड़ते हैं...

Mohammed Yusuf Kataria Record: शिक्षक से आतंकी मददगार तक
मोहम्मद यूसुफ कटारिया, उम्र 26 साल, कुलगाम जिले का निवासी है। बाहर से देखने में एक सामान्य मौलवी और मौसमी शिक्षक, जो स्थानीय बच्चों को पढ़ाता था, लेकिन अंदर से आतंक के काले खेल का हिस्सा। पुलिस के मुताबिक, कटारिया कुछ महीने पहले ही लश्कर-ए-तैयबा और TRF के संपर्क में आया था। उसने कुलगाम के घने जंगलों में आतंकियों को रास्ता दिखाने, हथियार पहुंचाने और उनकी गतिविधियों को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाई। यह वही जंगल हैं, जहां से आतंकियों ने पहलगाम के बैसरण घाटी में घुसकर 26 पर्यटकों को निशाना बनाया था।
पुलिस ने 24 सितंबर 2025 को कटारिया को कुलगाम से धर दबोचा। दो दिन की गहन पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर 14 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, 'कटारिया एक ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) था, जिसने ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया। उसकी गिरफ्तारी आतंकी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।'
Pahalgam Attack: खून से सनी बैसरन घाटी
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले (Baisaran Valley Terror Attack) ने देश को झकझोर दिया था। चार-पांच आतंकियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 से लैस होकर पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें 26 लोग मारे गए और 16 घायल हुए। आतंकियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया। इस हमले की जिम्मेदारी TRF ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) का छद्म संगठन है और पाकिस्तान की ISI की कठपुतली माना जाता है।
Operation Sindoor: PoK में 9 आतंकी ठिकाने तबाह
हमले के बाद भारत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6-7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर 24 मिसाइलें दागीं, जिसमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और 4 सहयोगी शामिल थे।
Operation Mahadev: आतंकियों का खात्मा, कटारिया तक पहुंच
हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और CRPF ने ऑपरेशन महादेव शुरू किया। 22 मई 2025 को शुरू हुए इस ऑपरेशन में डाचिगाम जंगल, श्रीनगर के पास छिपे आतंकियों को निशाना बनाया गया। सेना के पैरा कमांडोज ने चीनी उपकरणों से इंटरसेप्टेड एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के आधार पर 28 जुलाई को तीन आतंकियों को ढेर कर दिया। इनमें पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड सुलीमान शाह उर्फ हाशिम मूसा (Suleiman Shah alias Hashim Musa-20 लाख का इनामी), अबु हमजा और जिब्रान शामिल थे। सुलीमान पूर्व पाकिस्तानी सैनिक था, जो LeT में शामिल हो गया था।
ऑपरेशन के दौरान AK-47, M9 असॉल्ट राइफल्स और अन्य गोला-बारूद बरामद हुए। इन हथियारों की फॉरेंसिक जांच ने कटारिया के कनेक्शन को उजागर किया। पुलिस ने पाया कि कटारिया ने हमले से पहले कुलगाम के जंगलों में आतंकियों को रास्ता दिखाया और उनकी गतिविधियों को सुगम बनाया।
Mohammed Yusuf Kataria Criminal Record: कैसे बना आतंक का हथियार?
मोहम्मद यूसुफ कटारिया का प्रोफाइल चौंकाने वाला है। एक मौसमी शिक्षक और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर होने के बावजूद, वह आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कटारिया कुछ महीने पहले TRF के संपर्क में आया और उसने आतंकियों को हथियार, खाना और रास्तों की जानकारी मुहैया कराई। उसका काम आतंकियों को कुलगाम के जंगलों में सुरक्षित रखना और उनकी गतिविधियों को सपोर्ट करना था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कटारिया का TRF के साथ गहरा कनेक्शन था। TRF, जिसे 2019 में ISI ने बनाया था, लश्कर-ए-तैयबा का छद्म चेहरा है, जो कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को स्थानीय रंग देने की कोशिश करता है। कटारिया जैसे ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) इस नेटवर्क की रीढ़ होते हैं, जो आतंकियों को स्थानीय स्तर पर सपोर्ट देते हैं।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
पहलगाम हमले की जांच में जून 2025 में NIA ने दो अन्य लोगों-परवेज अहमद जोथर (Parvez Ahmed Jothar) और बशीर अहमद जोथर (Bashir Ahmed Jothar)-को गिरफ्तार किया था। ये दोनों पहलगाम के हिल पार्क में एक अस्थायी झोपड़ी में आतंकियों को पनाह देने के दोषी पाए गए। उन्होंने आतंकियों को खाना और अन्य सुविधाएं दी थीं। इन दोनों ने ही सुलीमान शाह, अफगानी और जिब्रान की पहचान उजागर की थी।
TRF और लश्कर का खतरनाक जाल
TRF ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया था कि यह हमला जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों को बसाने और 85,000 डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के खिलाफ था। लेकिन भारत सरकार ने इसे लश्कर-ए-तैयबा की साजिश करार दिया, जिसे पाकिस्तान की ISI फंडिंग देती है। TRF को 2023 में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था।
भारतीय खुफिया एजेंसियां और NIA अब TRF के फंडिंग, भर्ती और प्रशिक्षण के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए एक विस्तृत डोजियर तैयार कर रही हैं। इसका उद्देश्य पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में ग्रे लिस्ट में वापस लाना है।
Pakistan का काला चेहरा
पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के मुरीदके में लश्कर के मरकज तैयबा कैंप सहित 9 ठिकानों पर हमला किया। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्य मारे गए। पाकिस्तान ने LeT को 'निष्क्रिय' बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन हबीब ताहिर जैसे आतंकियों के PoK में अंतिम संस्कार ने पाकिस्तान की संलिप्तता को उजागर कर दिया।
क्या कहते हैं सुरक्षा बल?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, 'पहलगाम हमले के तीन आतंकी-सुलीमान, अफगानी और जिब्रान-लश्कर-ए-तैयबा के थे। ऑपरेशन महादेव में इन्हें मार गिराया गया। हम आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम हैं।' जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कटारिया की गिरफ्तारी को आतंकी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी जीत बताया। जांच अभी जारी है, और कटारिया के अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।
आतंक के खिलाफ जंग जारी
मोहम्मद यूसुफ कटारिया की गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंक का नेटवर्क कितना गहरा और खतरनाक है। एक शिक्षक का आतंकियों का मददगार बनना समाज के लिए खतरे की घंटी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों की सतर्कता ने आतंकी साजिश को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन TRF और लश्कर जैसे संगठनों का खतरा अभी टला नहीं है। क्या कटारिया की गिरफ्तारी आतंक के इस जाल को पूरी तरह तोड़ पाएगी? आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में बताएं...
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