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J&K में इसबार क्या बड़ा होने वाला है ? मिल रहे हैं ये संकेत

श्रीनगर, 11 जून: जम्मू-कश्मीर को लेकर जल्द ही कुछ बड़ी खबर मिल सकती है। केंद्र और वहां के राजनीतिक दलों की ओर से इस बात के काफी संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, 5 अगस्त, 2019 के उलट इस बार कोई भी बदलाव सकारात्मक होने की उम्मीद ज्यादा लग रही है, जिसे वहां की मुख्य धारा की सियासी पार्टियों का भी समर्थन हासिल हो सकता है। दरअसल, पिछले दिनों केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां वहां पर पहुंचने की खबरों ने बहुत ज्यादा अफवाह को जन्म दिया था। लेकिन, उसे गुपकार गठबंधन के बड़े नेता ही खारिज कर चुके हैं। अब उनकी केंद्र सरकार के साथ बैकचैनल बातचीत होने की खबरें हैं और हो सकता है उसमें से काफी कुछ नया मिल जाए।

जम्मू-कश्मीर में नई राजनीतिक सुगबुगाहट

जम्मू-कश्मीर में नई राजनीतिक सुगबुगाहट

आर्टिकल-370 हटाकर जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीने 22 महीने से ज्यादा हो चुके हैं। इसके साथ लद्दाख को अलग करके दोनों को केंद्र शासित प्रदेश बने हुए भी करीब 20 महीने गुजर चुके हैं। लेकिन, अभी तक जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई सरकार नहीं बन पाई है। वहां 2018 में भाजपा के समर्थन वापसी के चलते पीडीपी की महबूबा मुफ्ती की सरकार गिरने के बाद से शासन-व्यवस्था केंद्र सरकार के हाथों में है। पहले तो राष्ट्रपति शासन ही थी और बाद में वह केंद्र शासित प्रदेश ही बन गया। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से वहां फिर से कुछ राजनीतिक सुगबुगाहट शुरू होती दिखाई पड़ रही है। पहली बार ऐसी स्थिति बन रही है कि आने वाले कुछ हफ्तों में यूटी के प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों और केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के बड़े नेताओं के बीच राजनीतिक संवाद की शुरुआत हो सकती है।

केंद्र से बैकचैनल हो रही है बात- सूत्र

केंद्र से बैकचैनल हो रही है बात- सूत्र

केंद्र सरकार और कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों के बड़े नेताओं के बीच बैकचैनल हो रही बातचीत की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने द हिंदू से कहा है, 'पिछले कई हफ्तों से केंद्र से इस काम पर लगाए गए लोग जम्मू और कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियो के बड़े नेताओं से संपर्क में हैं।' इन बड़े नेताओं में नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी शामिल हैं, जो गुपकर एलायंस के भी मुखिया हैं। इनके अलावा इस प्रक्रिया में पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अल्ताफ हुसैन को भी शामिल किया जा सकता है। जिसमें लोन पहले भाजपा के करीब रह भी चुके हैं और डीडीसी चुनाव में जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के साथ भी उसके सियासी ताल्लुकात सामने आ चुके हैं।

कश्मीर में फिर कुछ बड़ा होने वाला है ?

कश्मीर में फिर कुछ बड़ा होने वाला है ?

सूत्रों का कहना है कि अगर सबकुछ तय योजना के मुताबिक हुआ तो बड़े क्षेत्रीय नेता केंद्र सरकार में भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात के लिए दिल्ली जा सकते हैं। इस दौरान जिस मुद्दे पर चर्चा की सबसे बड़ी संभावना बन रही है वो हैं- जम्मू और कश्मीर को वापस राज्य का दर्जा मिलने और जल्द से जल्द वहां विधानसभा का चुनाव। 2018 से वहां प्रदेश स्तर पर चुनी हुई सरकार नहीं है। केंद्र सरकार के साथ इस तरह की संभावित बातचीत को लेकर गुपकर गठबंधन के नेता भी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। 9 जून को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के घर पर हुई सहयोगियों की मुलाकात के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'हमने कोई दरवाजा (बातचीत का) बंद नहीं किया है। अगर बुलाया जाता है तो हम उसपर विचार करेंगे।'

परिसीमन पर बी अब्दुल्ला का स्टैंड नरम

परिसीमन पर बी अब्दुल्ला का स्टैंड नरम

गौरतलब है कि फारूक अब्दुल्ला पहले से ही परिसीमन पर अपना स्टैंड नरम कर चुके हैं और वह विधानसभा चुनाव से पहले जम्मू-कश्मीर में कुछ और विधानसभा क्षेत्र बनाने की प्रक्रिया में शामिल भी हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि नेशनल कांफ्रेंस के सांसद अबतक परिसीमन आयोग की बैठक से गायब रहे हैं। लेकिन हो सकता है कि अब वह कुछ सुझाव रखें, जिसपर विचार किया जा सकता है। बता दें कि हाल में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद जो अर्द्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां घाटी में वापस लौटी, उसके बाद कश्मीर और जम्मू को अलग करने की अफवाह उड़ी थी, लेकिन खुद अब्दुल्ला ने भी उस अफवाह को खारिज कर दिया। आर्टिकल-370 की वकालत करने के लिए बने पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकर डिक्लरेशन में शुरू में सात पार्टियां थीं, लेकिन बाद में कांग्रेस और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस उससे अलग हो गई है।

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