Udhampur Encounter: 21 घंटे से जारी मुठभेड़ में 2 जैश-ए-मोहम्मद आतंकी ढेर, 1 और निशाने पर
Udhampur Encounter: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में 21 घंटे से ज्यादा समय से सुरक्षाबलों और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है। मंगलवार (3 फरवरी 2026) शाम करीब 4 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई बुधवार (4 फरवरी) दोपहर तक भी थमने का नाम नहीं ले रही।
यह मुठभेड़ उधमपुर के रामनगर सेक्टर के जाफर जंगल इलाके में हुई, जो घना, पहाड़ी और गुफाओं से भरा क्षेत्र माना जाता है। ऐसे इलाकों में छिपना आतंकियों के लिए आसान होता है, इसी वजह से ऑपरेशन लंबा चला। आइए विस्तार से जानते हैं...

Udhampur Encounter Timeline: मुठभेड़ कैसे शुरू हुई? पूरी टाइमलाइन
तीन फरवरी (मंगलवार) शाम करीब 4 बजे सुरक्षाबलों को पुख्ता खुफिया जानकारी मिली कि जैश-ए-मोहम्मद के 2 से 3 आतंकी जाफर जंगल इलाके में छिपे हुए हैं। इसके बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षाबल गुफा के पास पहुंचे, आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। शाम और रात के दौरान कई बार गोलीबारी हुई। पूरी रात इलाके की घेराबंदी की गई और ड्रोन के जरिए निगरानी जारी रही।
4 फरवरी (बुधवार) सुबह ड्रोन फुटेज से गुफा के अंदर आतंकियों की मौजूदगी कन्फर्म हुई। दोपहर के समय गुफा के प्रवेश द्वार पर कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया, जिसके बाद दो आतंकी मारे गए। तीसरे आतंकी की तलाश अब भी जारी है।
Who Was JeM Terrorist: कौन थे मारे गए आतंकी और किस संगठन से जुड़े थे?
मारे गए दोनों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे हैं। शुरुआती इनपुट के मुताबिक, वे पाकिस्तानी नागरिक थे, हालांकि आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। जैश-ए-मोहम्मद वही आतंकी संगठन है, जिसने 2019 के पुलवामा हमले को अंजाम दिया था। पिछले कुछ महीनों में जैश ने जम्मू रीजन में अपनी गतिविधियां तेज की हैं। कठुआ, मजालता और किश्तवाड़ जैसे इलाकों में भी इससे पहले जैश से जुड़े आतंकियों की मौजूदगी सामने आ चुकी है।
Udhampur Terrorist Headquarters: आतंकियों का अड्डा क्यों बनता जा रहा है?
उधमपुर का भौगोलिक स्थान आतंकियों के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। यह इलाका पहाड़ी है, जंगल घने हैं और कई जगह प्राकृतिक गुफाएं मौजूद हैं, जहां लंबे समय तक छिपना आसान होता है। इसके अलावा उधमपुर जम्मू से कश्मीर घाटी को जोड़ने वाले रास्तों के करीब है। आतंकी यहां रुककर आगे की मूवमेंट प्लान करते हैं या फिर सुरक्षाबलों से बचते हुए लोकेशन बदलते हैं।
जम्मू रीजन में दबाव बढ़ने के बाद आतंकी संगठन अब घाटी के बजाय ऐसे इलाकों को चुन रहे हैं, जहां निगरानी अपेक्षाकृत मुश्किल होती है। यही वजह है कि उधमपुर पिछले कुछ समय से आतंकियों के लिए एक ट्रांजिट और हाइडआउट ज़ोन बनता दिख रहा है।
Udhampur Encounters 2 Years Timeline: पिछले 2 साल में Udhampur में कितने एनकाउंटर हुए?
आधिकारिक सुरक्षा इनपुट्स के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उधमपुर जिले में 3 से 4 बड़े आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन सामने आए हैं। इनमें कुछ एनकाउंटर छोटे स्तर पर रहे, जबकि दो ऑपरेशन काफी लंबे और चुनौतीपूर्ण रहे।
2024 के अंत और 2025 के दौरान उधमपुर और उसके आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए गए। इसका मकसद जम्मू रीजन में एक्टिव हो रहे आतंकी मॉड्यूल्स को खत्म करना रहा है। मौजूदा एनकाउंटर इसी कड़ी का सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जा रहा है।
इस एनकाउंटर की अहमियत क्यों ज्यादा है?
यह ऑपरेशन सिर्फ दो आतंकियों के मारे जाने तक सीमित नहीं है। यह जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का साफ संदेश देता है। NIA की हालिया छापेमारियों, ओवरग्राउंड वर्कर्स पर कार्रवाई और अमरनाथ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों से पहले यह ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी को दिखाता है। अगर तीसरा आतंकी भी मारा जाता है, तो जैश-ए-मोहम्मद के जम्मू नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
इलाका पूरी तरह से सील है और सघन सर्च ऑपरेशन जारी है। सुरक्षाबल हर मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं। अब तक किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन इतना साफ है कि उधमपुर एनकाउंटर आतंक के खिलाफ जारी लड़ाई में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।












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