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जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति पर प्रदर्शन, नेशनल कॉन्फ्रेंस में फूट, NC विधायक ने सांसद के विरोध की आलोचना की

Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति के खिलाफ प्रदर्शन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ विधायक सलमान सागर ने मंगलवार को एनसी सांसद आगा रुहुल्लाह की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होकर पार्टी के दुश्मनों को मंच प्रदान किया है।

सागर ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

सलमान सागर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जो उन्होंने किया। वह गलत था। मेरी राय में ऐसा नहीं होना चाहिए था। उन्होंने इन प्रदर्शनों के जरिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के दुश्मनों को मंच दिया है।

salman sagar

यह टिप्पणी सोमवार को हुई उस घटना के संदर्भ में आई। जब रुहुल्लाह ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा आरक्षण नीति के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में भाग लिया। यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर हुआ। जिसमें कई अन्य राजनीतिक दलों के नेता और छात्र शामिल हुए।

प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल हुआ

प्रदर्शन में पीडीपी नेता वहीद पारा, इल्तिजा मुफ्ती और कई अन्य नेता छात्रों के समर्थन में पहुंचे। यहां तक कि हाउस अरेस्ट में बंद अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी आरक्षित श्रेणियों के लिए कोटा के व्यावहारिक पुनर्गठन की मांग का समर्थन किया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रदर्शन के बाद एक्स पर लिखा कि हम संवाद का चैनल खुला रखेंगे। बिना किसी बिचौलिये या हस्तक्षेप के।

सलमान सागर ने रुहुल्लाह की आलोचना की

सलमान सागर ने स्पष्ट रूप से कहा कि रुहुल्लाह की मौजूदगी से सामान्य श्रेणी के छात्रों के मुद्दे को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र नहीं है। हर पार्टी का अपना अनुशासन होता है। उन्हें अपनी चिंताएं पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी। आप इस तरह के नाटक के जरिए मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी का अपमान नहीं कर सकते।

सागर ने हालांकि सामान्य श्रेणी के छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि वह आरक्षण की तर्कसंगतता के पक्ष में हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन किसी प्रकार का अंतर-पार्टी टकराव नहीं था।

पीडीपी ने भी उठाए सवाल

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों खासकर युवाओं ने बड़ी संख्या में नेशनल कॉन्फ्रेंस को वोट दिया था। ताकि आरक्षण नीति में तर्कसंगत बदलाव हो और किसी के अधिकार न छीने जाएं।

महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने छह महीने का समय मांगा है। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास तीन सांसद और 50 विधायक हैं। फिर उन्हें छह महीने की जरूरत क्यों है। लगता है कि वे अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ताकि उन्हें कुछ करने की जरूरत न पड़े।

आरक्षण नीति पर विवाद

यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति के खिलाफ हो रहा है। जिसे अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद लागू किया गया था। छात्रों का आरोप है कि यह नीति उनके अधिकारों के खिलाफ है और इसे तुरंत संशोधित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री का आश्वासन

प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कैबिनेट उपसमिति इस नीति की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट छह महीने में सौंपेगी।

यह घटना नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर गहराते मतभेदों और जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति पर राजनीतिक तनाव को उजागर करती है। छात्रों का प्रदर्शन और विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करता है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी सरकार इस विवाद को कैसे हल करती है।

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