कुरान का सबसे पहले गोजरी भाषा में अनुवाद करने वाले मुफ्ती फैज-उल-वहीद का निधन
श्रीनगर, जून 01: कोरोना काल में देश ने कई बड़ी शख्सियत को खोया है। कोरोना की इस घातक लहर के बीच देश ने एक बुरे दौर का अनुभव किया है। अब जम्मू के मशहूर इस्लामिक जानकार मुफ्ती फैज-उल-वहीद का इंतेकाल हो गया। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद उनको आचार्य श्री चंदर कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस में भर्ती कराया गया था, जहां मुफ्ती फैज-उल-वहीद की आज सुबह आखिरी सांस ली।

एएससीओएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजिंदर रतन पाल ने पुष्टि करते हुए बताया कि मुफ्ती फैज उल वहीद सुबह 7.30 बजे इस दुनिया से रुखसत हो गए। जानकारी के मुताबिक संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए मुफ्ती फैज को मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के साथ लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। उनके एक सहयोगी के मिली जानकारी के मुताबिक उनकी करीब एक हफ्ता पहले तबीयत नासाज हुई थी, जिसके बाद 23 मई के करीब मुफ्ती फैज को अस्पताल में दाखिल कराया।
उनके इंतकाल के बाद गम का माहौल है। इसके साथ ही राजनीतिक दलों ने भी मुफ्ती साहेब के जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुफ्ती फैज-उल-वाहीद का जन्म 1966 में राजौरी जिले के दोधासन बाला में हुआ था और उन्हें पवित्र कुरान का गोजरी भाषा में अनुवाद करने वाले पहले इस्लामी विद्वान होने के लिए मान्यता प्राप्त थी।
मुफ्ती फैज ने 'सिराज-उम-मुनीरा', 'अहकाम-ए-मय्यत' और 'नमाज का मसाइल कुरान-ओ-हदीस की रोशनी में' सहित कई किताब भी लिखी थीं। मुफ्ती फैज फ़िक़्ह में एक प्राधिकरण इस्लामी न्यायशास्त्र (शरिया कानून) जम्मू शहर में मदीना हिल, जम्मू में भटिंडी में एक इस्लामी मदरसा मरकज़ मारिफ उल कुरान के संरक्षक भी थे।












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