Pahalgam Attack: पहलगाम हमले से कांप उठा कश्मीर, फिर खतरे में टूरिज्म इंडस्ट्री, इकोनॉमी को तगड़ा झटका!

Pahalgam attack Jammu Kashmir Tourism Industry: जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। मंगलवार (23 अप्रैल) को हुए इस हमले में 28 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। यह वही पर्यटक थे, जो अपने परिवार संग कुछ खुशनुमा पल बिताने घाटी आए थे, लेकिन अब उनके साथ हमेशा के लिए दर्द और दहशत की यादें जुड़ गई हैं।

यह हमला उस वक्त हुआ है जब कश्मीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा था और टूरिज्म सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा था। डल लेक पर शिकारे सजे थे, होटल्स फुल थे, टैक्सियों की लंबी कतारें दिख रही थीं, और पहलगाम, गुलमर्ग, सोनमर्ग जैसे डेस्टिनेशन पर रौनक लौट आई थी। लेकिन अब यह हमला उस विकास और भरोसे पर एक गहरा सवाल खड़ा करता है।

Pahalgam attack

रिकॉर्ड तोड़ रहा था टूरिज्म

2019 में अनुच्छेद 370 हटने और कोविड के बाद 2021 से हालात सुधरने लगे थे। 2021 में 1.13 करोड़, 2022 में 1.88 करोड़ और 2023 में 2.11 करोड़ पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंचे। 2024 में यह आंकड़ा 2.36 करोड़ को भी पार कर गया, जिसमें से 27 लाख पर्यटक सिर्फ कश्मीर आए।

इकोनॉमी को बड़ा नुकसान

जम्मू-कश्मीर टूरिज्म पॉलिसी 2020 के अनुसार, टूरिज्म घाटी के GSDP में लगभग 7% से अधिक का योगदान देता है। अनुमान है कि यह क्षेत्र सालाना ₹11,000 करोड़ से अधिक का सीधा आर्थिक योगदान देता है। इसके साथ ही करीब 50,000 नए रोजगार हर साल इसी सेक्टर से निकलते हैं।

हजारों परिवार शिकारों, टैक्सी, होटलों, हस्तशिल्प, गाइडिंग जैसी सेवाओं से जुड़े हैं। पहलगाम जैसे हमले इन सभी लोगों के लिए आजीविका का संकट लेकर आते हैं।

फल व्यापार भी चपेट में

टूरिज्म के अलावा कश्मीर का फल व्यापार भी तेजी से बढ़ा है। सोपोर की फल मंडी 2024 में ₹7,000 करोड़ के सालाना टर्नओवर तक पहुंच गई थी। ये कारोबार बारामुला, बडगाम, बांदीपोरा जैसे जिलों के हजारों किसानों और मजदूरों के जीवन का आधार बन चुका है। लेकिन हिंसा और अस्थिरता इन व्यापारों को भी ठप कर सकती है।

आशाएं टूटीं, डर लौटा

पहलगाम हमला कश्मीर के उस नए भविष्य पर वार है, जिसमें हिंसा की बजाय शांति, विकास और पर्यटन को स्थान मिल रहा था। देशभर के पर्यटक कश्मीर को फिर से अपनाने लगे थे, लेकिन इस हमले ने एक बार फिर घाटी को डर और सन्नाटे के दौर में धकेल दिया है।

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