JK Crackdown: आतंकियों के नापाक मंसूबों पर केंद्र की सख्ती, सहयोगियों पर नकेल कस रहा प्रशासन, जानिए

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का साथ देने वाले लोगों की खैर नहीं। लगातार हो रही कार्रवाई के बीच आज बांदीपोरा में आतंकियों के सहयोगियों की संपत्ति अटैच की गई। जानिए, UT JK में मोदी सरकार की सख्ती और कुछ प्रमुख एक्शन के ब्यौरे

JK Crackdown

JK Crackdown: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में आतंकियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। कई ऐसे एक्शन हुए हैं, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ-साथ जम्मू कश्मीर पुलिस भी बेहद सक्रियता से आतंकवादियों के नापाक इरादों को नेस्तनाबूंद कर रही है। ताजा घटनाक्रम में बांदीपोरा में कार्रवाई हुई है। जानिए पूरा मामला

आतंकयों के सहयोगियों की संपत्ति कुर्क

जम्मू कश्मीर पुलिस ने सोमवार को बांदीपोरा में दो ओवर ग्राउंड वर्कर्स की संपत्तियों को कुर्क किया। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार बांदीपोरा पुलिस ने सोमवार को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकवादियों को शरण और रसद की मदद करने के आरोप में दो ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की संपत्ति कुर्क की। पुलिस ने बताया कि घर अब्दुल मजीद रेशी और मोहम्मद जमाल मलिक के थे।

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दो मंजिला आवासीय घरों पर कार्रवाई

बांदीपोरा पुलिस के अनुसार, आतंकवादियों की मदद करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए, बांदीपोरा में पुलिस ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आरोपी एजाज अहमद रेशी उर्फ गुंडपोरा रामपुरा के डॉक्टर के पिता अब्दुल मजीद रेशी के दो मंजिला आवासीय घरों को कुर्क कर लिया।

UAPA की धारा 25 के तहत एक्शन

पुलिस ने बताया कि सोमवार की कार्रवाई गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम (UAPA) कानून की धारा 25 के तहत कार्रवाई की गई है। जिस इलाके में कार्रवाई हुई है, ये जगह चिट्टीबंदे नाम की है। बांदीपोरा के अरगाम पुलिस स्टेशन के दायरे में एक्शन लिया गया है। आरोपियों के नाम मोहम्मद जमाल मलिक और मकसूद अहमद मलिक बताए गए हैं।

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10 फरवरी को जारी आदेश पर एक्शन

पुलिस ने कहा कि दोनों आरोपी आतंकवादी सहयोगी थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। आतंकवाद के दायरे में आने वाले उपरोक्त अभियुक्तों से संबंधित संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया UAPA अधिनियम की धारा 25 के तहत की गई। आदेश संभागीय आयुक्त कश्मीर ने 10 फरवरी को ही जारी किया है।

जमीन और मकान बेचने पर लगी रोक

जिस घर में कुर्की हुई वहां चिपकाई गई नोटिस के अनुसार, इन मकानों के मालिकों को नामित प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी तरह से 'हस्तांतरण, पट्टे पर देने, निपटाने, इसकी प्रकृति को बदलने या उक्त संपत्ति के साथ सौदा करने से रोका गया है। कोई भी उल्लंघन होने पर कानून के दंडात्मक प्रावधान के तहत कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी हुई है सख्त कार्रवाई, जानिए प्रमुख घटनाएं-

गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लगातार हो रही कार्रवाई के बारे में सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन का दावा है कि सिस्टम के भीतर आतंकी तत्वों का पता लगाने और उन्हें नेस्तनाबूंद करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि पिछली सरकारों के दौरान ऐसे कई आतंकी तत्वों को बैक डोर से नौकरी दी गई थी।

ED ने तीन ठिकानों पर MBBS सीट आवंटन मामले में छापेमारी की

मार्च के पहले हफ्ते में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने MBBS सीट अलॉटमेंट मामले में जम्मू-कश्मीर में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। ईडी के अधिकारियों ने 9 मार्च को पाकिस्तान में एमबीबीएस सीटों के आवंटन से जुड़े मामले में हुर्रियत नेता काजी यासिर और जम्मू-कश्मीर साल्वेशन मूवमेंट के अध्यक्ष जफर भट के घरों समेत तीन जगहों पर छापेमारी की थी।

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आतंकियों का सहयोग करने वाले 5 सरकारी सेवक बर्खास्त

अक्टूबर, 2022 में आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में जम्मू-कश्मीर सरकार के 5 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। पांच कर्मचारियों को आतंकियों से साथ संबंधों के आरोप में सेवा से बर्खास्त किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार कार्रवाई सरकारी कर्मचारियों को संविधान के प्रावधान 311(2)(सी) के तहत बर्खास्त किया गया। इन सरकारी कर्मचारियों पर आतंकी लिंक, नार्को-टेरर सिंडिकेट चलाने और आतंकी हमलों को अंजाम देने में प्रतिबंधित संगठनों की मदद के आरोप लगे। गार्डन सुपरवाइजर इफ्तिखार अंद्राबी के अलावा चार और बर्खास्त लोगों पर एक नजर-

  • 1991 में नियुक्त कॉन्स्टेबल तनवीर सलीम डार (लश्कर-ए-तैयबा से लिंक के आरोप)।
  • अफाक अहमद वानी: बारामूला सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में मैनेजर।
  • इरशाद अहमद खान: 2010 में जल शक्ति विभाग में अर्दली के रूप में नियुक्ति।
  • अब्दुल मोमिन पीर: 2014 में पीएचई उपखंड में सहायक लाइनमैन बने।

गृह मंत्रालय ने संगठनों को बैन किया

नवंबर, 2022 में भी जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई थी। जमात की संपत्तियां जब्त कर दफ्तरों पर ताले लटकाए गए थे। बता दें कि फरवरी, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद केंद्र ने अलगाववादियों पर शिकंजा कसा। गृह मंत्रालय ने जमात-ए-इस्लामी, जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया। अलगाववाद और देशद्रोह का प्रचार करने वाले अन्य संगठनों पर भी सख्ती दिखाई गई।

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हुर्रियत नेता पर कार्रवाई

अप्रैल 2019 में अलगाववादियों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के तहत आयकर विभाग ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दिवंगत अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ 3.62 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले में दिल्ली में उनके घर को जब्त कर लिया। जब्त की गई संपत्ति दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित थी।

पहली बार अलगाववादी नेता की संपत्ति जब्त

जुलाई 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने महिला कट्टरपंथी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की स्वयंभू प्रमुख आसिया अंद्राबी के घर को कुर्क कर कश्मीर में 30 साल में पहली बार किसी अलगाववादी नेता की संपत्ति जब्त की थी। कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत की गई थी।

पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों की मदद के आरोप

एनआईए ने अंद्राबी के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में आरोप लगाया था कि वह देश के खिलाफ "युद्ध छेड़ने" की साजिश के तहत सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही थीं। अंद्राबी पर "भारत के खिलाफ घृणित संदेश और भाषण" फैलाने के आरोप भी लगे। NIA के अनुसार इनका संगठन भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल था और पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी संगठनों की सहायता और सहायता से भारत सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह के लिए कश्मीरी लोगों को उकसा रहा था।

अलगाववादी शब्बीर अहमद शाह पर नकेल

नवंबर 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेल में बंद अलगाववादी शब्बीर अहमद शाह के 21.80 लाख रुपये कीमत वाले घर को कुर्क किया था। कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण से जुड़े एक मामले में की गई। भारत में शब्बीर अहमद शाह और लश्कर-ए-तैयबा के सह-संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद और अन्य पर मामले दर्ज हैं। ईडी के अनुसार शाह पथराव, जुलूस, विरोध, बंद, हड़ताल और अन्य विध्वंसक गतिविधियों के माध्यम से कश्मीर में अशांति फैलाने की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था।

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    पाकिस्तान से आने वाले पैसों पर रोक लगी

    ईडी ने कहा, जांच से पता चला था कि शाह आतंकवादी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (एचएम) और पाकिस्तान में स्थित अन्य आतंकवादी संगठनों के साथ-साथ हवाला और विभिन्न अन्य माध्यमों से पाकिस्तानी संस्थाओं से पैसे हासिल करने में शामिल था। इन पैसों का इस्तेमाल कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा और समर्थन देने में किया जा रहा था।

    कड़े कानून बनाए

    5 अगस्त, 2019 के बाद जब जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित हुआ तो अलगाववादियों और आतंकवादी समर्थकों के खिलाफ शिकंजा कसा गया। नकेल कसने के लिए कड़े कानून बनाए गए। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यूएपीए के तहत आतंकवादी समर्थकों की संपत्तियों और वाहनों को जब्त करने के लिए एक अभियान शुरू किया। 2021 में, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 75 वाहनों, (जिनमें ज्यादातर चार पहिया और दोपहिया वाहन शामिल थे), पांच घर, छह दुकानें, जमीन और नकदी जब्त किए।

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    जमात की 9 संपत्तियां सील की गई

    आतंकियों की मदद करने वाले फंडिंग चैनलों को अवरुद्ध किया गया है। नवंबर 2022 की शुरुआत में दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में अधिकारियों ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से संबंधित दो स्कूलों की इमारतों और अलग-अलग जमीनों सहित नौ संपत्तियों को जब्त किया गया।

    पाक से जुड़ा आतंकी अरेस्ट, पहली बार मिला परफ्यूम IED

    विगत दो फरवरी को JK First Perfume IED के कारण सुर्खियों में आया था। जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह (DGP Dilbag Singh) के अनुसार, पुलिस ने पहली बार परफ्यूम आईईडी बरामद किया। उन्होंने कहा, पकड़े गए आतंकी के पास से आईईडी बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार ये तीन साल से पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में रहा है। पाकिस्तान दहशतगर्दों को पनाह देने और आतंकवाद को बढ़ावा देने में शामिल है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में बरामद परफ्यूम आईईडी के बारे में कहा, पाकिस्तान नापाक मंसूबों के साथ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश कर रहा है।

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