J&K Election: उमर अब्दुल्ला के फैसले के इंतजार में नेशनल कांफ्रेंस, कब दूर करेंगे पिता फारूक की यह दुविधा?

Jammu and Kashmir Chunav 2024: लोकसभा चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस जम्मू और कश्मीर में सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी बनकर उभरी है। लेकिन, विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी को इस सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा है कि इसके उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला यह चुनाव लड़ेंगे या नहीं।

बारामूला लोकसभा सीट पर नेशनल कांफ्रेस के उमर अब्दुल्ला को निर्दलीय उम्मीदवार और तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर राशिद ने हरा दिया था। लेकिन, विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर इस वजह से उमर असमंजस में नहीं हैं। असल में उन्होंने 2020 में यह दावा कर दिया था कि जबतक जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता, वह विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे।

jammu and kashmir polls

उमर अब्दुल्ला वादे पर टिके रहेंगे, या विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?
2019 में जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद इसे राज्य से बदलकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। उमर ने इसी के विरोध में यह सियासी प्रतिज्ञा कर ली थी। लेकिन, परिस्थितियां दावे के विपरीत दिखने लगीं तो उन्होंने हाल ही एक बयान दिया, जिसमें इस बात के संकेत दिए थे कि वह अपने वादे को दूर रखकर चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं।

उन्होंने कहा था, 'निजी स्तर पर मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता, लेकिन मेरी पार्टी की ओर से बहुत ही ज्यादा दबाव है। मैं अपने सहयोगियों से बात करूंगा और फिर एक अंतिम फैसले पर पहुंचुंगा।'

विरोधियों की आलोचना से असमंजस में पड़े हैं उमर अब्दुल्ला?
लेकिन, इस केंद्र शासित प्रदेश में पहले चरण के चुनाव के लिए नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है, फिर भी उमर के अंतिम फैसले का इंतजार ही हो रहा है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति की समझ रखने वालों का कहना है कि उमर नैतिकता वाले उलझन में उलझ गए हैं। क्योंकि, विरोधी उन्हें हमेशा से 'बाहरी' और 'एलीट टाइप' का नेता बताते रहे हैं। ऐसे में अपने वादे से पीछे हटने पर उन्हें विरोधियों की आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।

कैसे दूर होगी फारूक अब्दुल्ला की दुविधा?
चुनाव लड़ने से को लेकर उमर की आनाकानी को देखते हुए पार्टी सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि आने वाले चुनाव में वही पार्टी की कमान संभालेंगे। लेकिन, वे 86 साल के हो चुके हैं। उनकी उम्र और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी में एक बड़ी ही असहजता वाली स्थिति पैदा हो रही है।

फारूक का कहना है कि वे 2024 का चुनाव लड़ेंगे और जब जम्मू-कश्मीर का राज्य वाला दर्जा बहाल हो जाएगा तो वे बेटे उमर के लिए गद्दी (अगर सत्ता में आए तो)छोड़ देंगे। फारूक की बात सुनने के बाद उनपर इस बात के लिए दबाव पड़ने लगा है कि वे पहले उमर को किसी तरह से चुनाव लड़ने के लिए तैयार करें।

नेशनल कांफ्रेंस में अब्दुल्ला परिवार की दुविधा से बढ़ रही है चिंता
उमर ने भी पहले जो संकेत दिया था उसमें अपनी पिता की उम्र को देखते हुए वे अपने फैसले पर फिर से विचार करने की ही बात कही थी। इस बीच नेशनल कांफ्रेंस के अन्य नेताओं का कहना है कि वे किसी न किस तरह से उमर और फारूक दोनों को ही चुनाव लड़ने के लिए राजी करेंगे। क्योंकि, यही दोनों नेता हैं, जो पार्टी को एकजुट रख सकते हैं।

एक पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता ने टीओआई से कहा, 'दोनों कई बार सीएम, एमएलए, एमपी रह चुके हैं। एक केंद्र शासित प्रदेश की सरकार के लिए विधानसभा का चुनाव लड़ना जो कि उपराज्यपाल के अधीन काम करेगी, उनकी गरिमा के मुकाबले कम है। लेकिन, यह हमारी प्रतिष्ठा और अस्तित्व का चुनाव है। यह जम्मू और कश्मीर की गरिमा का मामला है।'

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