महबूबा मुफ्ती की मां को पासपोर्ट नहीं दिए जाने पर HC ने लगाई फटकार, कहा- CID प्रवक्ता की तरह काम नहीं कर सकते
महबूबा मुफ्ती की मां को पासपोर्ट नहीं देने पर हाई कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिकारी सीआईडी के प्रवक्ता की तरफ काम नहीं कर सकते हैं।

Mehbooba Mufti's Mother Passport: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट (Jammu and Kashmir and Ladakh High Court) ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती की मां को पासपोर्ट देने से इनकार करने पर अधिकारियों को फटकार लगाई है। न्यायालय ने अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा कि पासपोर्ट अधिकारी सीआईडी के प्रवक्ता की तरफ काम नहीं कर सकते हैं।
जस्टिस एमए चौधरी ने महबूबा मुफ्ती की मां गुलशन नजीर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण के अनुरोध को खारिज करने का कोई आधार नहीं है और पासपोर्ट अधिकारी CID के प्रवक्ता की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। मुफ्ती की मां को पासपोर्ट देने से इनकार करने के आदेश को खारिज करते हुए जस्टिस एम ए चौधरी ने कहा कि पासपोर्ट अधिकारी पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करेगा और छह हफ्ते की अवधि के अंदर आदेश पारित करेगा।
वैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यहां तक कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप का एक अंश भी नहीं है जो किसी भी सुरक्षा चिंताओं को इंगित कर सकता है। CID-CIK द्वारा तैयार की गई पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 6 के वैधानिक प्रावधानों को ओवरराइड नहीं कर सकती है।
गुलशन नजीर ने खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिकारी का पासपोर्ट जारी करने से मना करना "दिमाग का उपयोग न करना" है। न्यायाधीश ने कहा, "कम से कम, पासपोर्ट अधिकारी को यदि आवश्यक हो तो तथ्यों और परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में पुलिस और CID से यह पूछना चाहिए कि क्या याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल है। बता दें कि महबूबा मुफ्ती की मां गुलशन नजीर ने पासपोर्ट का अनुरोध किया था, हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी मांग नहीं मानी। जिसके बाद गुलशन नजीर ने जम्मू कश्मीर-लद्दाख हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।












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