J&K Chunav: महबूबा की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती बिजबेहरा-श्रीगुफ़वारा से लड़ रही पहला चुनाव, जानें किससे है मुकाबला
Jammu Kashmir Assembly Elections 2024: जम्मू- कश्मीर में चुनावी बिगुल बज चुका है। राजनीतिक पार्टियां पहले चरण के मतदान से से पहले जोर-शाेर से चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इस बार के चुनाव में जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती बिजबेहरा-श्रीगुफ़वारा से अपना पहला चुनाव लड़ रही हैं।
बिजबेहरा-श्रीगुफ़वारा निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय से महबूबा मुफ्ती के परिवार का गढ़ रहा है लेकिन इस बार के चुाव में नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने इसी सीट से अपने दिग्गज नेता बशीर वीरी को चुनाव मैदान में उतारा है। इल्तिजा का बशीर वीरी से कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।

बिजबेहरा-श्रीगुफवारा में पहले चरण में होगा चुनाव
कश्मीर के बिजबेहरा-श्रीगुफवारा विधानसभा सीट के लिए 18 सितंबर को चुनाव के पहले चरण के तहत मतदान होगा।
मुफ्ती परिवार का रहा है इस सीट पर कब्जा
बता दें पीडीपी इस सीट को सुरक्षित करने के लिए जी जान से जुटी हुई है जिस पर मुफ़्ती परिवार की दो पीढ़ियां काबिज हैं। हालांकि इल्तिजा ने इस क्षेत्र में ज़्यादा समय नहीं बिताया है लेकिन पीडीपी के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली सीट से इल्तिजा की जीत की पार्टी को पूरी उम्मीद है।
पीडीपी को क्यों है अपनी जीत पर भरोसा?
पीडीपी के युवा नेता नजमुस साकिब ने कहा, "हम जानते हैं कि यह एक कठिन लड़ाई है, लेकिन यहां के मतदाता हमारे विकास कार्यों के लिए वोट देंगे।" बिजबेहरा कस्बे के मूल निवासी साकिब ने भी ये माना शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाके पारंपरिक रूप से पीडीपी के गढ़ हैं।
लोकसभा में क्या मिली थी पीडीपी को जीत?
हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में अनंतनाग-राजौरी संसदीय क्षेत्र में हार के बावजूद पीडीपी इस विधानसभा क्षेत्र में आगे रही। पार्टी को 20,792 वोट मिले, जबकि एनसी को 17,698 वोट मिले। यह ऐतिहासिक समर्थन पीडीपी को आगामी चुनावों के लिए उम्मीद देता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस क्या पीडीपी से हथिया पाएंगी ये सीट?
1996 से पीडीपी लगातार बिजबेहरा-श्रीगुफवारा विधानसभा चुनाव जीतती रही है। हालांकि, पिछले एक दशक में एनसी ने बढ़त हासिल की है लेकिन नेशन कान्फ्रेंस ने जिन बशीर अहमद वीरी को अपना उम्मीदवार बनाया है वो लगातार दो चुनाव हार चुके हैं। फिर भी उनके समर्थकों का मानना है कि पीडीपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर इस साल हालात बदल सकती है। वीरी ने 2014 के चुनाव के बाद पीडीपी के भाजपा के साथ गठबंधन पर टिप्पणी की, जिसे मतदाता याद रखेंगे।












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