J&K: राजौरी जिले के इस गांव में हुई 17 रहस्यमयी मौतें, कंटेनमेंट जोन घोषित, प्रभावित परिवारों के घर सील
Jammu & Kashmir: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के बडाल गांव में रहस्यमयी परिस्थितियों में 17 लोगों की मौत के बाद बुधवार को गांव को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया। 7 दिसंबर से 19 जनवरी के बीच हुई इन मौतों में 13 बच्चे शामिल हैं। जो तीन संबंधित परिवारों के सदस्य थे। अब प्रभावित परिवारों के घरों को सील कर दिया गया है।
सार्वजनिक और निजी सभाओं पर रोक
राजौरी के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट राजीव कुमार खजूरिया द्वारा जारी आदेश के अनुसार गांव को तीन कंटेनमेंट जोन में विभाजित किया गया है। पहला जोन उन सभी परिवारों को कवर करेगा। जहां मौतें हुई हैं। तीसरा जोन पूरे गांव के सभी घरों को कवर करेगा। गांव में सभी सार्वजनिक और निजी सभाओं पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही खाद्य खपत की निगरानी, पुलिस तैनाती और लॉगबुक के रखरखाव के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

प्रभावित परिवारों के लिए प्रशासन द्वारा विशेष प्रावधान
आदेश के अनुसार प्रभावित परिवारों और उनके करीबी संपर्कों को केवल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए भोजन और पानी का उपभोग करना होगा। घरों में उपलब्ध अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग सख्त प्रतिबंधित है। सभी खाद्य और पानी की आपूर्ति बदली जा रही है। प्रभावित घरों में मौजूद सभी खाद्य सामग्री को जब्त करने का आदेश दिया गया है।
रहस्यमयी मौतों की वजह से एहतियाती कदम
प्रशासन ने स्थानीय निवासियों को स्थानीय झरने से पानी खींचने पर प्रतिबंध लगा दिया है और सामुदायिक भोज से बचने की चेतावनी दी है। डॉक्टरों का मानना है कि मौतों के पीछे न्यूरोटॉक्सिन्स हो सकते हैं। लेकिन अब तक इसका कोई स्पष्ट स्रोत नहीं मिल पाया है। व्यापक जांच के बावजूद इन मौतों के कारणों का पता नहीं चल सका है।
गंभीर स्थिति में एक और व्यक्ति अस्पताल में भर्ती
बडाल गांव का एक और व्यक्ति गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमण के और फैलाव को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इस रहस्यमयी घटना के मद्देनजर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भोजन और जल आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक भोजन की निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
बडाल गांव की इन रहस्यमयी मौतों ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है। अब तक डॉक्टर और वैज्ञानिक इन मौतों के पीछे का सही कारण पता करने में असफल रहे हैं।












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