Jammu Kashmir Chunav 2024: गांदरबल या बडगाम उमर अब्दुल्ला के लिए कहां ज्यादा मुश्किल है चुनाव
Ganderbal and Budgam Election 2024 Phase 2: जम्मू कश्मीर विधानसभा के दूसरे दौर में जिन सियासी दिग्गजों के राजनीतिक किस्मत का फैसला हुआ है, उनमें नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुला बेहद महत्वपूर्ण हैं। वह इस बार अब्दुल्ला अपने परिवार की परंपरागत गांदरबल सीट के साथ-साथ बडगाम से भी भाग्य आजमा रहे हैं, लेकिन कहीं भी उनका चुनावी रास्ता बहुत आसान नहीं लग रहा है।
जहां तक उमर अब्दुल्ला की बात है तो राजनीति में उनका करियर दो दशकों से ज्यादा का हो चुका है, लेकिन वह दावे के साथ नहीं कह सकते कि किसी भी सीट की पहचान उनके नाम से की जा सकती है। 2024 में उमर गांदरबल और बडगाम दोनों सीटों से मैदान में हैं, जबकि 2014 में वे बीरवाह से चुनाव जीते थे। इस बार वे लोकसभा चुनाव भी बुरी तरह से हार चुके हैं, इसलिए विधानसभा का यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है।

2008 में उमर को गांदरबल से मिली थी जीत
गांदरबल को अब्दुल्ला परिवार का गढ़ कहा जाता है, क्योंकि यहां से उमर के दादा शेख अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला चुनाव जीत चुके हैं और दोनों मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। 2008 में उमर को भी गांदरबल ने विधानसभा पहुंचने का मौका दिया था और वह पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर के सबसे युवा मुख्यमंत्री भी बने थे।
2002 में गांदरबल में भी चुनाव हार गए थे अब्दुल्ला
लेकिन, अब्दुल्ला परिवार की सीट होने के बावजूद 2002 में पीडीपी ने उमर को गांदरबल में हरा दिया था। बेशक वह चुनाव नेशनल कांफ्रेंस के लिए बहुत मुश्किल था और कहीं न कहीं उसी तरह के कड़े मुकाबले की आशंका के चलते उमर ने 2014 में बीरवाह का रुख कर लिया था। ऐसे में इस बार गांदरबल के अलावा बडगाम से भी चुनाव लड़ना कहीं न कहीं उनके उसी डर को उजागर करता है।
बारामूला लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना कर चुके हैं उमर
उनके इस डर को लेकर अटकलें तबसे और बढ़ गईं, जबसे टोपी हाथ में लेकर वोट मांगने वाली उनकी तस्वीरें सामने आईं। अगर उमर के इस ऐक्शन के बैकग्राउंड में जाएं तो इस साल जून में बारामूला लोकसभा सीट पर उनकी करारी हार का तथ्य भी शामिल है। बारामूला में नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज की हार सामान्य नहीं थी।
उन्हें टेरर फंडिंग के उस आरोपी इंजीनियर राशिद ने भारी अंतर से हरा दिया, जो तिहाड़ जेल में बंद होने की वजह से अपने लिए खुद प्रचार भी नहीं कर सके।
गांदरबल में पीडीपी प्रत्याशी से उमर को मिल रही है कड़ी टक्कर
बडगाम सीट से तीन बार एमएलए रह चुके श्रीनगर के नेशनल कांफ्रेंस सांसद सैयद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने टीओआई से एक बातचीत में दावा किया है कि दरअसल उनके चुनाव क्षेत्र के लोगों का दबाव था कि उमर यहां से भी चुनाव लड़ें।
लेकिन, गांदरबल में अब्दुल्ला के गढ़ में उमर को कड़ी टक्कर दे रहे पीडीपी प्रत्याशी बशीर मीर का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी ने उमर को दूसरी सीट से भी चुनाव लड़ने के लिए मजबूर कर दिया है।
बशीर मीर कंगन सीट पर मियां अल्ताफ को दिखा चुके हैं अपनी ताकत
मीर के मुताबिक, 'उमर ने सोचा था कि पीडीपी किसी कमजोर उम्मीदवार को उतारेगी। लेकिन, जब मैं यहां आ गया तो उन्हें लगा कि अब मुश्किल है। इस वजह से उन्हें दूसरी सीट के लिए सोचनी पड़ गई।'
बशीर मीर के दावों को इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि 2014 में कंगन जैसी सीट पर उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज मियां अल्ताफ अहमद की जीत के अंतर को महज कुछ सौ वोटों तक सीमित कर दिया था।
कंगन सीट इस साल अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हो गई है, इस वजह से मीर को अपना चुनाव क्षेत्र बदलना पड़ा है। जबकि, मियां अल्ताफ अहमद गुज्जर समुदाय से आते हैं और कंगन सीट से उनका परिवार सात दशकों से जीत रहा है और अबकी बार उनके बेटे यानी चौथी पीढ़ी यहां से भाग्य आजमा रहे हैं। खुद मियां अल्ताफ अनंतनाग-राजौरी से इस बार सांसद चुने गए हैं।
दूसरे चरण में कुल 26 सीटों पर चुनाव
दूसरे चरण में जम्मू कश्मीर में गांदरबल और बडगाम समेत कुल 26 सीटों पर चुनाव हुआ है, जिसमें उमर अब्दुल्ला समेत 239 प्रत्याशी मैदान में हैं।
इस जम्मू कश्मीर चुनाव में 27 दलों ने कुल 140 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि 99 निर्दलीय भी मैदान में हैं। इस चरण में कश्मीर के तीन जिलों बडगाम, गांदरबल और श्रीनगर के अलावा जम्मू डिविजन के पुंछ, राजौरी और रियासी जिलों में चुनाव हुए हैं। 1 अक्टूबर को अंतिम चरण में बाकी 40 सीटों पर चुनाव होंगे और वोटों की गिनती का काम 8 अक्टूबर को होगा।












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