फारुख अब्दुल्ला का शाह पर पलटवार, कहा' एनसी और कांग्रेस जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा सुनिश्चित करेगी'
Jammu Kashmir Assembly Elections 2024: जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान शनिवार को जम्मू में एक रैली में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस से राज्य के दर्जे के बारे में लोगों को गुमराह करना बंद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केवल केंद्र ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कर सकता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को पूरे विश्वास के साथ कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन जम्मू-कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव जीतेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी जीत से क्षेत्र को राज्य का दर्जा वापस मिल जाएगा।

अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस यह सुनिश्चित करेंगे कि हमें अपना राज्य का दर्जा वापस मिले। वे अमित शाह द्वारा द्वारा स्थाई गए सवालों का जवाब दे रहे थे। अमित शाह ने एनसी और कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था।
अब्दुल्ला ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की कार्रवाई की भी आलोचना की और सवाल किया कि क्या अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद आतंकवाद समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि वे कहते हैं कि अगर एनसी और कांग्रेस सत्ता में आती है तो आतंकवाद फिर से शुरू हो जाएगा। मैं उनसे पूछता हूं। जब उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त किया तो क्या आतंकवाद समाप्त हो गया।
आपको बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के तुरंत बाद अगस्त 2019 में इसे हटा दिया। इस कदम के कारण दो केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।
जम्मू और कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव अहम हैं। क्योंकि ये दिसंबर 2014 के बाद पहली बार हो रहे हैं। मतदान 18, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को होगा और नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। जो हरियाणा के चुनाव परिणामों के साथ ही होगा।
भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए मई 2014 से सत्ता में है। केंद्र सरकार द्वारा अक्टूबर 2019 में जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा वापस ले लिया गया। अब जम्मू कश्मीर में विधासभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।
अब्दुल्ला की टिप्पणी जम्मू-कश्मीर में राज्य के दर्जे और सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को दर्शाती है। हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण बदलावों के बावजूद इस क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
आगामी चुनावों पर सबकी नजर रहेगी। क्योंकि ये जम्मू-कश्मीर के भविष्य के शासन को आकार दे सकते हैं। फिलहाल एनसी-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा दोनों ही चुनावों में लड़ाई के लिए कमर कस रहे हैं।
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