जम्मू कश्मीर: वापस हुआ जहूर अहमद भट का निलंबन, आर्टिकल 370 से जुड़ा है मामला
zahoor ahmad bhat lecture news: जम्मू कश्मीर शासन ने पॉलिटिकल साइंस के लेक्चरर जहूर अहमद भट का निलंबन वापस ले लिया है। जहूर अहमद भट को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका की पैरवी करने पर सस्पेंड कर दिया गया था।
आपको बता दें कि जहूर अहमद भट श्रीनगर के एक सरकारी कॉलेज में लेक्चरर और साथ ही वकील भी हैं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जहूर अहमद के निलंबन का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि वो इस विषय पर एलजी मनोज सिन्हा से बात करें।

क्या आरोप लगाकर हटाए गए थे जहूर अहमद भट?
जहूर अहमद भट ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी की थी। इसपर जम्मू कश्मीर शिक्षा विभाग ने उन्हें सस्पेंड करते हुए कहा कि जहूर अहमद को जम्मू-कश्मीर सीएसआर, जम्मू-कश्मीर सरकारी कर्मचारी (आचरण) नियम 1971 के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी माना गया है। इसके बाद कपिल सिब्बल ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में रखा, जिसपर कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से मामले को देखने के लिए कहा।
सुप्रीम कोर्ट में जहूर अहमद ने क्या कहा था?
अनुच्छेद 370 हटाने जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर अपनी दलीलें देते हुए जहूर अहमद भट ने कहा था, 'मैं श्रीनगर में बच्चों को पॉलिटिकल साइंस पढ़ाता हूं, लेकिन 2019 के बाद से अपने छात्रों को संविधान के बारे में पढ़ाना मेरे लिए मुश्किल हो गया है। छात्र मुझसे सवाल करते हैं कि क्या 2019 के बाद हमारा देश लोकतांत्रिक है? और, इस सवाल का जवाब देना मेरे मुश्किल हो जाता है। उस वक्त जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आश्वासन दिया था कि अनुच्छेद 370 को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद रातों-रात कर्फ्यू लगाकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में ले लिया गया। जम्मू कश्मीर से उसका विशेष दर्जा छीन लिया गया।'












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