अमित शाह की श्रीनगर यात्रा: स्नाइपर्स के सुरक्षा घेरे में गृहमंत्री, जम्मू-कश्मीर में 700 से ज्यादा लोग पकड़े

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की श्रीनगर यात्रा के दरम्‍यान सुरक्षा-व्‍यवस्‍था चाक-चौबंद की गई है। राज्‍यभर से 700 से ज्‍यादा लोगों को पकड़ा गया है, जिनमें से कुछ को कड़े सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत में लिया गया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि, ज्‍यादातर धर-पकड़ दक्षिण कश्मीर में हुई हैं। ऐसा आतंकवादी समूहों के जमीनी-संपर्क ध्‍वस्‍त करने के इरादे से किया गया है। खतरनाक मंसूबे पाले लोगों को पुलिस द्वारा विभिन्‍न स्‍थानों से पकड़ा गया है। जिनमें से पीएसए के तहत हिरासत में लिए गए बंदियों को केंद्र शासित प्रदेश के बाहर की जेलों में ले जाया गया है। आॅफिसर के मुताबिक, शाह स्नाइपर्स के सुरक्षा-घेरे से होते हुए श्रीनगर पहुंचे हैं।

370 हटने के बाद पहली बार आए अमित शाह

370 हटने के बाद पहली बार आए अमित शाह

बता दिया जाए कि, जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पहला दौरा है। अपने इस दौरे पर गृह मंत्री जम्मू-कश्मीर में 3 दिन रहेंगे। वह यहां सेना और IB चीफ समेत 12 बड़े अफसरों के साथ बैठक करेंगे। उनके दौरा शुरू होने से पहले ही श्रीनगर शहर में कई यातायात प्रतिबंध लागू किए गए। जिसके अनुसार दोपहिया वाहन चलाने वालों की गहन सुरक्षा जांच की जा रही है। साथ ही बाजारों में यात्रियों व दुकानदारों की तलाशी भी ली जा रही है।

जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने की लोगों से ये अपील

जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने की लोगों से ये अपील

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्वीट करके जम्‍मू-कश्‍मीर वासियों से शांति-व्‍यवस्‍था बनाए रखने व सुरक्षा-व्‍यवस्‍था में सहयोग करने की अपील की। ट्वीट में लिखा गया कि, "आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, या किसी अन्य राष्ट्र-विरोधी / सामाजिक गतिविधि के बारे में तत्‍काल जानकारी साझा की जाए।" पुलिस के हेल्पलाइन नंबर शेयर किए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि, यह पहल आपकी पुलिस को राष्‍ट्र-विरोधी ताकतों से लड़ने में मदद करेगी और यह व्यापारियों, पर्यटकों, ट्रांसपोर्टरों, छात्रों और अन्य लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को बढ़ाने का एक प्रयास है।

अन्‍य राज्‍यों के लोगों को बनाया जा रहा निशाना

अन्‍य राज्‍यों के लोगों को बनाया जा रहा निशाना

गौरतलब हो कि, पिछले कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर में अन्‍य राज्‍यों के काफी लोगों को निशाना बनाया गया है। इस महीने घाटी में ऐसे हमलों में 11 नागरिक मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी कामगार हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े एक मोर्चे ने इन हत्याओं की जिम्मेदारी ली है। अधिकारियों का कहना है कि, पिछले 15 दिनों में अलग-अलग घटनाओं में आतंकियों ने गैर-कश्मीरियों को निशाना बनाया, जिसमें 11 लोग मारे गए।

पीडि़त परिवारों से मिल सकते हैं शाह

पीडि़त परिवारों से मिल सकते हैं शाह

लिहाजा शाह के दौरे को घाटी में हालिया आतंकी गतिविधियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। शाह हाल ही में मारे गए एक कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंदरू के परिवार से मिल सकते हैं। बिंदरू को 5 अक्टूबर को गोली मार दी गई थी। इसके अलावा शाह 7 अक्टूबर को मारी गईं प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और अरशद अहमद मीर के परिजनों से भी मिल सकते हैं।

इस कानून के तहत हो रहीं गिरफ्तारी

इस कानून के तहत हो रहीं गिरफ्तारी

सरकार जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत किसी व्‍यक्ति को हिरासत में लेती है। यह कानून जम्मू-कश्मीर के लिए अद्वितीय माना जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति को एक आदेश पर अधिकतम दो वर्षों के लिए बिना किसी मुकदमे के हिरासत में लिया जा सकता है, यदि उसका काम इस राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के रख-रखाव के विपरीत है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है शाह की शनिवार से शुरू हुई श्रीनगर-जम्मू की तीन दिवसीय यात्रा से पहले पीएसए के तहत ही कई गिरफ्तारियां हुई हैं।

अगस्त 2019 में हटाया गया आर्टिकल-370

अगस्त 2019 में हटाया गया आर्टिकल-370

केंद्र सरकार ने अमित शाह की अगुवाई में ही अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्क्रिय कर दिया था। जिसके बाद उस राज्य को डाउनग्रेड कर दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था। नई व्‍यवस्‍थाएं लागू होने के बाद शाह की जम्मू-कश्मीर की यह पहली यात्रा है। इस यात्‍रा के पहले दिन यानी कि शनिवार को शाह द्वारा श्रीनगर में सुरक्षा और विकास संबंधी परियोजनाओं की समीक्षा करने की संभावना है और रविवार को जम्मू में एक सार्वजनिक रैली करने की संभावना है।

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