राजस्थान में भाजपा में कौन होगा पार्टी का चेहरा, सियासी गलियारों में इस बात की है चर्चा
जयपुर, 21 सितंबर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही भाजपा में सीएम फेस और प्रदेश नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव है। इससे पहले प्रदेश नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है। हाल ही में विधानसभा सत्र से पहले भाजपा के विधायक दल की बैठक में वसुंधरा राजे की जिस तरीके से किनाराकशी की गई। उसे लेकर कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है। प्रदेश में पार्टी का चेहरा नहीं होने से कार्यकर्ता असमंजस में हैं। भाजपा की लड़ाई राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से है। जो जन कल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश में आम जनता की पसंद बने हुए हैं। साथ ही गहलोत बेहतरीन रणनीतिकार भी हैं। ऐसे में पार्टी बगैर नेतृत्व के कैसे चुनाव लड़ पाएगी। सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है।

कार्यकर्ता उत्साहित, नेतृत्व निराश
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में निराशा का माहौल है। पार्टी के कार्यकर्ता बूथ स्तर पर तो मजबूती से खड़े हैं। केंद्र में बीजेपी सरकार और मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं के चलते कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह भी है। लेकिन प्रदेश में सीएम फेस तय नहीं किए जाने और प्रदेश नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है। वहीं संगठन स्तर पर भी भाजपा इतनी मजबूत नहीं है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इस बीच उनके बदले जाने की भी चर्चाएं हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर नित नए नाम सामने आ रहे हैं। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा फैसला नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि विधानसभा चुनाव तक संगठन की कमान पूनिया के हाथ मे ही रहेगी या पार्टी को नया अध्यक्ष मिलेगा।

सीएम फेस को लेकर पार्टी के भीतर गुटबाजी
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के बीच मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर घमासान मचा हुआ है। पिछले दिनों अमित शाह ने जोधपुर दौरे के दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह तो पैदा किया। लेकिन नेतृत्व को लेकर फैसले में देरी ने कार्यकर्ताओं को फिर निराश कर दिया है। प्रदेश में सीएम फेस को लेकर पार्टी में गुटबाजी है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ा खेमा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर लगातार राजे को मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बना रहा है। वही पार्टी का एक धड़ा सतीश पूनिया को प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहता है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल, राजेंद्र राठौड़, दीया कुमारी जैसे नामों की भी चर्चा है। ऐसे में पार्टी में गुटबाजी हावी हो रही है। इसी का नतीजा था कि वसुंधरा राजे को हाशिए पर रखा गया। प्रदेश नेतृत्व के फैसले को टालने से पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।













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