डॉक्टर बनने से पहले बनना पड़ेगा ग्रामीणों का घरेलू डॉक्टर, एनएमसी ने जारी की गाइडलाइन
जयपुर, 23 जुलाई। मेडिकल कॉलेज में पढाई कर डॉक्टर बनने वाले हर छात्र को ग्रामीण क्षेत्र के तीन साल के लिए पांच परिवार को गोद लेना होगा। इस दौरान प्रत्येक छात्र को परिवार के सदस्यों से जान पहचान बढ़ाते हुए उनका घरेलू डॉक्टर बनना होगा। छात्र परिवार के सदस्यों की बीमारी को देखने के साथ ही उसके कारणों का पता लगाते हुए रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर उस गांव की स्थिति और वातावरण का पता लग पाएगा। राष्ट्र्रीय चिकित्सा आयोग ने ऐसी गाइडलाइन जारी की है। एनएमसी ने समस्त मेडिकल कॉलेजों को आदेश की पालना के निर्देश भी दिए हैं। इस योजना को एनएमसी परिवार गोद कार्यक्रम नाम दिया है।

डॉक्टरों को गांवों से जोड़ने की कवायद
देश में अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। जबकि डॉक्टर शहरों में रहना पसंद करते हैं। ऐसे में एनएमसी इस योजना के जरिए डॉक्टरों को ग्रामीणों से जोड़ने की कवायद कर रहा है। डॉक्टर जब ग्रामीण लोगों से जुड़कर रिसर्च करेंगे तो उन्हें स्वास्थ्य लाभ तो मिलेगा ही, साथ ही बिमारियों के कारणों का भी पता चल पाएगा। अभी डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्र में ट्रेनिंग लेनी होती है। लेकिन अब पाठ्यक्रम में बदलवा किया गया है। इसके तहत अब ग्रामीण परिवार को गोद लेकर उनकी देखरेख करनी होगी। जिससे उनकी बिमारियों और कुरीतियों का पता चल जाएगा।

इस वजह से शुरू की योजना
प्रदेश में अधिकांश डॉक्टर शहरी क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ नहीं पाते। इस योजना से डॉक्टरों का मरीजों के प्रति व्यवहार में सुधार होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली बिमारियों का समय पर पता लगाकर उपचार दिया जा सकेगा। डॉक्टर ग्रामीणों से काउंसलिंग कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध करा पाएंगे। इस योजना के तहत भविष्य में चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार के लिए भी तैयार किया जाएगा। हाल ही में उदयपुर जिले के आरएनटी कॉलेज के छात्रों ने बड़गांव पंचायत समिति के चुनिंदा गांवों का दौरा किया है। अब यहाँ छात्र बीसीएमचओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी के जरिए पांच परिवारों को गोद लेंगे।













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