राजस्थान सरकार के प्रयासों से उदयपुर होगा रेबीज मुक्त, अभियान चलाकर श्वानों का हो रहा टीकाकरण
राजस्थान सरकार के प्रयासों से उदयपुर को रेबीज मुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए उदयपुर में अब तक 134 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस अभियान के तहत प्रत्येक रविवार को टीकाकरण किया जा रहा है।
राजस्थान सरकार के जीव रक्षा की संकल्पना को साकार करने के क्रम में पशुपालन विभाग द्वारा नित नए नवाचार कर पशु एवं पशुपालकों के हितों का खासा ध्यान रखा जा रहा है। इसी के चलते बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय एवं एनिमल फीड उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में रेबीज मुक्त उदयपुर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत प्रत्येक रविवार को कुत्तों में एंटी रेबीज वेक्सीन लगाने का कार्य प्रमुखता से किया जा रहा है। रेबीज मुक्त उदयपुर अभियान की जानकारी देते हुए उप निदेशक डॉ. शरद अरोड़ा ने बताया की एक जनवरी से सम्पूर्ण उदयपुर शहर में इस अभियान की शुरुआत की गयी। जिसके अंतर्गत अभी तक 134 सड़कों पर घूमने वाले श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। उन्होंने बताया की कई बार आवारा कुत्तों के काटने से आम जन में भय उत्पन्न हो जाता है। साथ ही मानव और पशु में संघर्ष जैसी अवस्थाएं भी उत्प्न्न हो जाती है। जिसकी वजह से आम जनता बेजुबानों की मदद करने से कतराती है। रेबीज मुक्त होने से मानव का पशु पर भरोसा कायम होने के साथ ही बेसहारा श्वानों को रेबीज जैसी बीमारी से मुक्ति मिल सकेगी। उन्होंने बताया की इस अभियान में शहर के प्रशासनिक अधिकारी भी सहयोग कर रहे है।

क्या होती है रेबीज बीमारी
रेबीज बीमारी के बारे जानकारी देते हुए डॉ. महेंद्र मेहता ने बताया की रेबीज़ इंसानों में अन्य जानवरों से संचारित होता है। जब कोई संक्रमित जानवर किसी अन्य जानवर या इंसान को खरोंचता या काटता है। तब रेबीज़ संचारित हो सकता है। मनुष्यों में सामान्यतया रेबीज के मामले कुत्तों के काटने से होते है। रेबीज़ एक विषाणु जनित बीमारी है। जिसके कारण अत्यंत तेज इन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क का सूजन) आ जाती है। प्रारंभिक लक्षणों में बुखार आ सकता है। वही हिंसक गतिविधि, अनियंत्रित उत्तेजना, पानी से डर, शरीर के अंगों को हिलाने में असमर्थता, भ्रम और होश खो देना जैसे लक्षण हो सकते हैं। समय पर उपचार और बीमारी के प्रति जागरूकता ही एक मात्र बचाव का उपाय है।













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