राजस्थान विधानसभा में सत्रावसान के बिना ही सत्र बुलाने की परंपरा, भाजपा करेगी राज्यपाल से शिकायत

जयपुर, 22 अगस्त। राजस्थान की 15वीं विधानसभा के सातवें सत्र की बैठक 19 सितंबर से फिर शुरू होगी। विधानसभा सचिवालय ने सत्र की बैठक बुलाने के लिए रविवार को नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 28 मार्च की शाम बजट सत्र की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई थी। लेकिन सत्रावसान नहीं किया गया था। ऐसे में 19 सितंबर से शुरू होने वाले सत्र को बजट सत्र ही माना जाएगा। सरकार के इस तरह से सत्र बुलाने को लेकर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं। भाजपा ने इसे राज्यपाल के अधिकारों पर अतिक्रमण बताया है। भाजपा जल्द ही इसकी राज्यपाल से शिकायत करेगी। इधर सत्र को निरंतर जारी रखने से विधायकों के सवाल पूछने के अधिकारों पर भी असर पड़ रहा है। विधायकों को एक सत्र में 100 सवाल पूछने की इजाजत होती है। क्योंकि सरकार की तरफ से बुलाई गई बैठक बजट सत्र ही मानी जा रही है। ऐसे में 19 सितंबर से शुरू होने जा रही विधानसभा की बैठक में वहीं विधायक सवाल पूछ सकेंगे। जिन्होंने अब तक अपने कोटे के पूरे सवाल नहीं पूछे हैं।

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सरकार के संकट काल से हुई शुरुआत

सत्रावसान नहीं करके लगातार सत्र बुलाने की परंपरा गहलोत सरकार के राजनीतिक संकट काल 2020 से शुरू हुई है। सचिन पायलट गुट के बगावत करने से उत्पन्न हुई स्थिति से निपटने के लिए सीएम गहलोत सत्र बुलाना चाहते थे। लेकिन राजभवन से इजाजत मिलने में देरी हो गई थी। इसके बाद सरकार ने बजट सत्र को राज्यपाल से आहूत कराने की परंपरा बना ली है। वर्ष 2021 में भी बजट सत्र को सरकार ने विधानसभा की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर के 2022 कि जनवरी तक निरंतर रखा था।

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नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने सरकार पर साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने बिना सत्रावसान के सत्र बुलाने को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्यपाल के अधिकार अपने पास रखने का ट्रेंड बना लिया है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का हनन है। जब से राज्य सरकार पर राजनीतिक संकट आया है। सरकार तब से डरी हुई है। वह जब चाहे तब खुद सत्र बुलाने की पावर अपने पास रखना चाहती है। हम इसका विरोध करते हैं और राज्यपाल को सारे हालात की जानकारी देंगे।

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अधिकतर विधायकों का कोटा पूरा

नियमानुसार विधायक एक सत्र में 40 तारांकित और 60 अतारांकित सवाल पूछ सकते हैं। प्रतिपक्ष के प्रमुख नेता बजट सत्र के दौरान ही सवाल का ज्यादातर कोटा पूरा कर चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया 88, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ 85, कालीचरण सर्राफ 97 और वासुदेव देवनानी 88 सवाल बजट सत्र में पूछ चुके हैं। ऐसे में सरकार को घेरने वाले नेताओं के पास आने वाली बैठकों में बहुत कम कोटा बचेगा।

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