Sachin Pilot BirthDay : सचिन बिधूड़ी को कैसे मिला पायलट नाम? पूर्व CM की बेटी से लव मैरिज रही चर्चा में
जयपुर, 6 सितम्बर। राजस्थान की राजनीति में सीएम अशोक गहलोत 'जादूगर' हैं तो पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी किसी 'मास्टर ब्लास्टर' से कम नहीं। 7 सितम्बर 2022 को सचिन पायलट 45 साल के हो जाएंगे। जन्मदिन के बहाने एक दिन पहले सचिन पायलट गुट की ओर से शक्ति प्रदर्शन गया है। मंगलवार को जयपुर में सिविल लाइंस स्थित उनके आवास पर मिलन समारोह हुआ, जिसमें हजारों समर्थक व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ 21 मंत्री-विधायक पायलट को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे। इनमें 3 मंत्री और 7 गहलोत समर्थक भी हैं। कल भी प्रदेशभर में कई आयोजन होंगे।

टवीटर पर ट्रेंड हुआ #SachinPilot
बता दें कि सचिन पायलट 7 सितम्बर को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए वे कन्याकुमारी जा रहे हैं। इस कारण उन्होंने आज ही समर्थकों से मिलने का कार्यक्रम रखा। ऐसे में जन्मदिन के मौके पर समर्थकों व कार्यकताओं से मिलने का कार्यक्रम जयपुर में अपने आवास पर एक दिन पहले ही रखा। ट्विटर पर सचिन पायलट से जुड़े हैशटैग सुबह से ट्रेंड कर रहे हैं। #सचिनसंगराजस्थान के साथ अब तक करीब 40 हजार लोगों ने ट्वीट किए। #SachinPilot भी दूसरे नंबर पर ट्रेंड किया।

सचिन का सीएम बनाने की मांग उठने लगी
उल्लेखनीय है कि राजस्थान सियासी संकट 2020 के बाद से सचिन पायलट के पास संगठन में कोई अहम पद नहीं है। वे बस टोंक से विधायक हैं। सचिन पायलट समर्थक विधायक वेद प्रकाश सोलंकी और एससी आयोग अध्यक्ष खिलाड़ी लाल बैरवा समेत समर्थक व कार्यकर्ता खुलकर सचिन पायलट को राजस्थान सीएम बनाने की मांग उठाने लगे हैं।

सचिन पायलट का जन्म कब हुआ था?
राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट का कद काफी बड़ा है। हालांकि ये मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। यूपी के सहारनपुर में राजेश पायलट व रमा पायलट के घर 7 सितम्बर 1977 को हुआ था। इनका पैतृक गांव वेदपुरा ग्रेटर नोएडा यूपी में है। ये गुर्जर जाति से हैं। अब सचिन पायलट करीब दो दशक से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय हैं। सचिन पायलट के एक बहन है सारिका पायलट। सारिका का राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं हैं। वे एक सफल बिजनेस वुमेन के तौर पर जानी जाती हैं।
बिधूड़ी से कैसे मिला पायलट नाम?
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि सचिन को पायलट नाम विरासत में मिला है। दरअसल, इनके पिता राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी भारतीय वायुसेना में पायलट थे। संजय गांधी ने राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी को नया नाम राजेश पायलट दिया था। संजय गांधी राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधूड़ी को राजस्थान के भरतपुर से चुनाव लड़ने भेजा था। भरतपुर से नामांकन दाखिल करने के कुछ ही घंटे पहले ही राजेश्वर बिधूड़ी ने नोटरी में जाकर अपना नाम राजेश पायलट रख लिया था। फिर यही पायलट नाम, उनकी, उनके परिवार की पहचान बन गया। सचिन को भी सरनेम पायलट ही मिला।

सचिन पायलट की शिक्षा व लव स्टोरी?
बता दें कि सचिन पायलट की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती से स्कूल से हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक व गाजियाबाद के आईएमटी से मार्केटिंग में डिप्लोमा किया। पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है। विदेश में पढ़ाई के दौरान ही सचिन पायलट की मुलाकात जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी व उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला से हुई। दोनों की दोस्ती प्यार में बदली तो इन्होंने शादी का फैसला लिया। 2014 में सचिन व सारा ने लव मैरिज की। यह प्रेम विवाह फारुक अब्दुल्ला को स्वीकार्य नहीं था। सारा व सचिन पायलट के दो बेटे आरन पायलट व विहान पायलट है।

जब सचिन बने सबसे कम उम्र के सांसद
-सचिन पायलट ने राजनीति के लिए अपने पिता के क्षेत्र रहे राजस्थान को चुना। 26 साल की उम्र में सचिन पायलट ने लोकसभा चुनाव 2004 में दौसा निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। इसी के साथ वह भारत में सबसे कम उम्र के सांसद बने थे।
- लोकसभा चुनाव 2009 में अजमेर की सीट पर सचिन पायलट ने भाजपा की किरण माहेश्वरी को भारी अंतर से हराया था। लोकसभा की गृह मामलों की स्थायी समिति के सदस्य और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे।
- साल 2012 में, मनमोहन सिंह की सरकार के दूसरे कार्यकाल में सचिन पायलट कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री बने। लोकसभा चुनाव 2014 में अजमेर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के सांवरलाल जाट के सामने सचिन पायलट को हार का सामना करना पड़ा था।
-साल 2014 में सचिन राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में सचिन पायलट ने टोंक विधानसभा सीट पर भाजपा के यूनुस खान को हराया। फिर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में उप मुख्यमंत्री बने।
- जुलाई 2020 में सचिन पायलट और अशोक गहलोत खेमे की खिंचतान के चलते राजस्थान सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। तब सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा था।












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