Rajasthan में BJP नेताओं की घर वापसी पर फंसा पेंच, ज्वाइनिंग कमेटी की भूमिका को लेकर उठे सवाल
Rajasthan में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के कुनबा जोड़ो अभियान में गुटबाजी का एंगल आता दिखाई दे रहा है। दरअसल भाजपा ने विचारधारा से जुड़े नेताओं की घर वापसी पर काम शुरू किया है। इसके लिए कमेटी का गठन भी किया गया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल और विधायक वासुदेव देवनानी को इसमें शामिल किया गया है। यह दोनों नेता प्रदेश भाजपा में चल रही गुटबाजी के एक धड़े से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में इस कमेटी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। यह कमेटी इसलिए महत्वपूर्ण है कि घर वापसी के लिए संबंधित नेताओं की सिफारिश करेगी। इसके बाद ही पार्टी में किसी नेता को शामिल किया जाएगा। ये दोनों नेता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के निकट माने जाते हैं। वहीं इन नेताओं की दूसरे गुट के नेताओं की दूरी है।

पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया तय करेंगे नेताओं की वापसी
भाजपा के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने मंगलवार को एक कमेटी बनाने की घोषणा की थी। जो पूर्व नेताओं की पार्टी में घर वापसी के मामले को देखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी नेता जो फिर से भाजपा में शामिल होना चाहता है। उसे प्रदेश अध्यक्ष की सहमति लेनी होगी। मेघवाल व विधायक वासुदेव देवनानी की भाजपा ज्वाइनिंग कमेटी तय करेगी कि कोई नेता भाजपा में शामिल होगा या नहीं।

कोर कमेटी की बैठक में भी हो सकता है घर वापसी का फैसला
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी छोड़कर जाने वाले भाजपा नेताओं के घर वापसी को लेकर इन दिनों चर्चाएं जोरों पर है। हालांकि जिन आधा दर्जन नेताओं की घर वापसी की बात कही जा रही है। उनका फैसला कोर कमेटी करेगी। कोर कमेटी की बैठक 21 अक्टूबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में कोटा में होगी। चर्चा है कि पूर्व जलदाय मंत्री सुरेंद्र गोयल, पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया और पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा के साथ ही कांग्रेस में शामिल कुछ नेता पार्टी में वापस लौटना चाहते हैं।

बड़ी संख्या में नेताओं की पार्टी में वापसी की तैयारी
हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीकानेर दौरे के बाद पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी का नाम भाजपा में शामिल होने का प्रयास करने वाले नेताओं में तेजी से सुनाई दिया था लेकिन मेघवाल और बाटी में अदावत जगजाहिर है अब इस फैसले पर ब्रेक माना जा रहा है अन्य संभागों में भी यही हाल है वसुंधरा राजे समर्थक नेताओं की बड़ी सूची है जो पार्टी में आने की कोशिश में है ऐसे में एकतरफा बनी इस कमेटी के फैसले से इन नेताओं के अरमानों को ठेस पहुंच सकती है।












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