Rajasthan News: राजस्थान के सियासी समीकरण बिगाड़ेगा सामजिक न्याय मंच, जानिए देवी सिंह भाटी की पूरी रणनीति

Rajasthan News: राजस्थान में इस साल के अंत में होने वाला विधानसभा चुनाव बड़ा ही दिलचस्प होने वाला है। कांग्रेस की सत्ता वापसी की दौड़ और भाजपा के अति आत्मविश्वास के बीच प्रदेश का विधानसभा चुनाव चतुष्कोणीय हो सकता है। राजनीति के जानकारों की मानें तो प्रदेश में हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के साथ देवी सिंह भाटी का संगठन सामाजिक न्याय मंच भी विधानसभा चुनाव मैदान में उतरेगा। राजपूत समुदाय के सर्वमान्य नेता देवी सिंह भाटी ने विधानसभा चुनाव उतरने के लिए ताल ठोक दी है। जानकार आगे बताते हैं कि राजस्थान में शुरू से ही जाट और राजपूत समुदाय के बीच जातीय संघर्ष की स्थिति रही है। अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मुकाबला चतुष्कोणीय होकर जातीय समीकरणों पर आधारित हो जाएगा। प्रदेश में जातीय समीकरणों के आधार पर चुनाव हुआ तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को होगा। जाट और राजपूत समुदाय भाजपा से ताल्लुक रखता है। आपको बता दें राजस्थान में चार महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रदेश में सभी दलों ने चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है।

जातीय समीकरण पर राजस्थान की स्थिति

राजस्थान की सियासत को जातीय समीकरणों के हिसाब से समझे तो प्रदेश में राजपूत और जाट समुदाय का बड़ा वर्चस्व है। भले ही इन समुदायों के बीच जातीय संघर्ष माना जाता हो। लेकिन ये दोनों जातियां भाजपा का वोट बैंक मानी जाती है। वहीं एससी, एसटी, अल्पसंख्यक समुदाय और काफी हद तक ओबीसी वर्ग कांग्रेस का वोटबैंक माना जाता है। राजस्थान में जातीय समीकरण आधारित चुनाव होता है तो इससे भाजपा को बड़ा नुकसान होगा। कांग्रेस का वोट बैंक पार्टी के लिए सेफ है। जाट और राजपूत समुदाय के खिसकने से भाजपा की स्थिति पूरी तरह कमजोर हो जाएगी।

devi singh bhati

राजनीति में जाट राजपूत समुदाय का प्रतिनिधित्व

राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में जाट और राजपूत नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। लोकसभा में राजस्थान की 25 सीटों में 7 जाट और 3 राजपूत सांसद हैं। वहीं विधानसभा की 200 सीटों में दोनों दलों से 38 सीट पर जाट और 27 सीट पर राजपूत समुदाय के विधायक हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान की राजनीति में जाट और राजपूत समुदाय का बड़ा दबदबा माना जाता है। प्रदेश में दोनों दलों में इस समुदाय से आने वाले नेताओं का अच्छा खासा प्रभाव है। ऐसे में विधानसभा का चुनाव जातीय समीकरणों पर जाता है तो चुनाव बड़ा रोचक होने वाला है।

देवी सिंह भाटी राजपूत समुदाय के सर्वमान्य नेता

प्रदेश के राजपूत समाज के तमाम राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देवी सिंह भाटी समाज के सर्वमान्य नेता माने जाते हैं। भाटी खासकर राजपूत समाज के युवाओं की पहली पसंद हैं। वे राजस्थान विधानसभा में सात बार विधायक रह चुके हैं। राज्य सरकार में कई अहम पदों पर भी काम कर चुके हैं। हालांकि देवी सिंह भाटी अभी भाजपा का हिस्सा नहीं है। लेकिन वे पार्टी में घर वापसी के प्रयास कर रहे थे। बीकनेर से ही सांसद और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल से उनका छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है। चर्चा है कि वे उनकी पार्टी में वापसी पर रोड़ा बने हुए हैं। इसी बीच भाटी ने विधानसभा चुनाव में सामाजिक न्याय मंच के प्रत्याशी उतारने का एलान कर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। राजनीति से जुड़े लोग कहते हैं कि हनुमान बेनीवाल और देवी सिंह भाटी अपने-अपने समुदाय के कद्दावर नेता हैं। इन दोनों नेताओं से बीजेपी को भारी नुकसान होने की पूरी संभावना है।

देखिए राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की पूरी सूची

https://hindi.oneindia.com/list-of-chief-ministers-of-rajasthan/

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