राजस्थान: मरीजों के इमरजेंसी इलाज का खर्चा उठाएगी गहलोत सरकार, पैकेज के आधार पर होगा इलाज का होगा भुगतान
राजस्थान में आमजन को स्वास्थ्य का अधिकार देने के लिए मरीजों के इमरजेंसी इलाज का खर्चा गहलोत सरकार वहन करेगी। गहलोत सरकार ने निजी अस्पतालों में इमरजेंसी इलाज के लिए अलग से फंड बनाने का फैसला किया है।
राजस्थान में आमजन को स्वास्थ्य का अधिकार देने वाले बिल के तहत इलाज का खर्चा गहलोत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। बजट में इसके लिए अलग से फंड का प्रावधान किया जाएगा। बिल को लेकर लगातार विरोध कर रहे निजी अस्पतालों और चिकित्सकों के संगठनों के आगे झुकते हुए गहलोत सरकार ने इमरजेंसी इलाज के लिए अलग से फंड बनाने का फैसला किया है। प्रदेश के चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि बिल का विरोध कर रहे डॉक्टर और प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों का समाधान निकाल दिया गया है। मीणा ने कहा कि 11 फरवरी को होने वाली प्रवर समिति की बैठक में डॉक्टर्स का पक्ष सुना जाएगा। उसी दिन राइट टू हेल्थ बिल को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। लेकिन निजी चिकित्सा संगठनों का अभी भी विरोध जारी है। मंत्री के बयान के बाद देर रात चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों ने साथ बैठक कर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि बिल मैं एक नहीं कई संशोधन की जरूरत है।

इस तरह होगा पेमेंट का भुगतान
प्रवर समिति की बैठक से पहले सरकार ने राइट टू हेल्थ बिल में कई तरह के संशोधन किए जा रहे हैं। इसको लेकर मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया कि निजी अस्पतालों में इलाज के लिए राज्य सरकार को भुगतान करना होगा। इसके लिए चिरंजीवी योजना में जो पैकेज रखे गए हैं। उन्हें शामिल किया जाएगा। साथ ही जो पैकेज चिरंजीवी के दायरे में नहीं हैं। उन्हें भी राइट टू हेल्थ बिल के पैकेज में शामिल किया जाएगा। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की बीमारी डायग्नोस होने के बाद उसके आधार पर पैकेज का सरकार सीधे अस्पताल को भुगतान करेगी। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में आने वाले मरीज अगर चिरंजीवी बीमा योजना में कवर है, तो चिरंजीवी के तहत उसका भुगतान होगा। अगर चिरंजीवी के अधीन नहीं होगा, तो उसका अतिरिक्त फंड से भुगतान किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि इसमें जो अस्पताल चिरंजीवी योजना के तहत इलाज नहीं करते। उन्हें भी इलाज करना होगा।












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