राजस्थान बिजली संकट : जानिए कोयले का पूरा गणित, क्यों फेल होती दिख रही गहलोत सरकार?

जयपुर, 9 अक्टूबर। राजस्थान में बिजली संकट गहराता जा रहा है। गांव-कस्बों के साथ-साथ शहरी इलाके भी अघोषित विद्युत कटौती की चपेट में आ रहे हैं। राजस्थान सरकार को बिजली खरीद में रोजाना 80 करोड़ का अति​रिक्त भार उठाना पड़ रहा है, क्योंकि राजस्थान के सरकारी पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक खत्म होने के कारण 2000 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप है।

कोयला खदानों में पानी भर गया

कोयला खदानों में पानी भर गया

खबर है कि जुलाई व अगस्त में राजस्थान विद्युत उत्पादन कंपनी कोल इंडिया को पेमेंट नहीं कर पाई। ऐसे में राजस्थान के बिजलीघरों में कोयला का पर्याप्त स्टॉक नहीं किया जा सका। अब कोयला खदानों में पानी भर गया। इससे भी दिक्कत बढ़ रही है।

 रोजाना 20 रैक कोयला चाहिए, मिल रहा सिर्फ 13 रैक

रोजाना 20 रैक कोयला चाहिए, मिल रहा सिर्फ 13 रैक

एक अनुमान के तौर पर राजस्थान के सरकारी बिजली पावर प्लांटों को रोजाना 20 रैक कोयला चाहिए जबकि फिलहाल 13 से 14 रैक कोयला ही मिल रहा है। रोजाना 11 रैक का एग्रीमेंट के बावजूद कोल इंडिया केवल पांच-छह रैक कोयला ही दे रहा है। कोल इंडिया के 900 करोड़ व पीकेसीएल के करीब 1700 करोड़ रुपए बकाया थे।

कोरोना काल में नहीं मिला राजस्व

कोरोना काल में नहीं मिला राजस्व

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान विद्युत उत्पादन कंपनी के सीएमडी आरके शर्मा का कहना है कि पहले फाइनेंस हालात के कारण पेमेंट नहीं हो पाए थे। अब पेमेंट हो गया। धीरे-धीरे कोल स्टॉक होता है। प्रति वर्ष अप्रेल मई में स्टॉक बढ़ाया जाता है। ताकि बारिश के दिनों में दिक्कत नहीं हो। कोरोना काल में डिस्काम को राजस्व नहीं मिला और सरकार ने भी बकाया नहीं चुकाया।

 सब्सिडी के 14 हजार 500 करोड़ नहीं दिए

सब्सिडी के 14 हजार 500 करोड़ नहीं दिए

बता दें कि राजस्थान सरकार कृषि व बीपीएल कनेक्शरों की सब्सिडी के करीब 14 हजार 500 करोड़ रुपए जयपुर, जोधपुर, अजमेर डिस्कॉम को नहीं दे रही है। वहीं, सरकारी विभाग भी बिल के 19 सौ करोड़ रुपए डिस्कॉम को पेमेंट नहीं कर रहे है। इससे डिस्कॉम सरकारी व प्राइवेट बिजली उत्पादन कंपनियों को 30 हजार करोड़ का भुगतान नहीं कर पा रही है।

​बिजली सकंट में साथ नहीं दे रही निजी कंपनियां

​बिजली सकंट में साथ नहीं दे रही निजी कंपनियां

खबर ये है कि राजस्थान बिजली संकट में निजी कंपनियां पीछे हट गई हैं। ये साथ नहीं दे रही। प्रदेश में निजी कंपनियों में अडानी पावर कंपनी, राजवेस्ट सहित अन्य से 35 सौ मेगावाट बिजली देने का एग्रीमेंट है। सरकार इन कंपनियों को फिक्स चार्ज का पेमेंट करती है। इनसे में कुछ प्लांटों ने कोयले की कमी बताते हुए और पेमेंट नहीं होने के कारण बिजली सप्लाई में हाथ खड़े कर दिए हैं।

 हमारी सरकार के समय नहीं आती थी बिजली की समस्या-पूर्व सीएम राजे

हमारी सरकार के समय नहीं आती थी बिजली की समस्या-पूर्व सीएम राजे

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया भी सवाल उठा चुकी हैं। राजे ने कहा कि राजस्थान में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ढह गई है। इसकी वजह मौजूदा सरकार की फाइनेंशियल मैंनेजमेंट व्यवस्था है, क्योंकि कोयला कंपनियों को ना तो समय पर पैसा दिया जा रहा और ना ही समय पर डिमांग की जा रही। हमारी सरकार के समय ऐसी समस्या नहीं आती थी।

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