Rajasthan Elections 2023: राजस्थान में मतदान के बाद सरकार को लेकर कयासों का दौर तेज, जानिए कौन कहां से जीत रहा
Rajasthan Elections 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो गए हैं। अब सबकी निगाहें चुनाव परिणाम पर टिक गई है। मतदान के बाद नेताओं ने राहत की सांस ली है। इसी के साथ प्रदेश में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पूरे प्रदेश में हर गली में यह चर्चा है कि कौन जीतेगा और कौन हार रहा है। हार-जीत को लेकर हर कोई अपने-अपने समीकरण बैठाने में लगा है। प्रदेश में इस बार बंपर मतदान हुआ है। इसे भी लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कोई कह रहा है कि ज्यादा मतदान बदलाव के संकेत दे रहा है। राजस्थान में रिवाज बदलने वाला नहीं है। यह मतदान प्रतिशत इसी का परिणाम है। वहीं दूसरी ओर बुद्धिजीवी को बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को लेकर अपने कयास लगा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि कौन सा दल सरकार बन रहा है और मुख्यमंत्री कौन बनने जा रहा है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि प्रदेश में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी किस नेता की किस्मत में है। यह तो 3 दिसंबर को तय हो पाएगा। लेकिन जानकार यह भी दावा करते हैं कि राजस्थान का रिवाज बदलने वाला नहीं है।
हर सीट के अपने समीकरण
राजस्थान में मतदान के बाद अब हार जीत के समीकरणों पर चर्चा हो रही है। हर सीट पर अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में प्रदेश में कोई मुद्दा या लहर हावी नहीं रहे। इस वजह से यह चुनाव प्रत्याशियों के बीच सिमट कर रह गया उनकी व्यक्तिगत छवि के आधार पर ही मतदाताओं ने मतदान किया है। ऐसे में हर सीट पर इसी बात को लेकर चर्चा है कि कौन जीतेगा कौन हारेगा। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे की सीट को लेकर है। इसके साथ ही अशोक गहलोत के मंत्रियों और बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के अन्य दावेदारों की सीटों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।

कांग्रेस और भाजपा के अपने-अपने दावे
राजस्थान में चुनाव निपट जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन राजनीति के जानकार मतदान प्रतिशत सामने आने के बाद इन दावों को अलग नजरिए से देख रहे हैं। 2018 में कांग्रेस ने दावा किया था कि बढ़ा हुआ मतदान भाजपा सरकार के खिलाफ हुआ है। तब 74.71 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब कांग्रेस ने भाजपा से एक लाख 70 हजार ज्यादा वोट पाकर सरकार बनाई थी। तब कांग्रेस का दावा सही साबित हुआ था। अब 2023 में मतदान के बाद भाजपा भी यही दावा कर रही है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि सरकार के खिलाफ मतदान हुआ है। लोगों ने मतदान के जरिए अपना गुस्सा निकाला है। भाजपा के दावे में कितना दाम है। यह 3 दिसंबर को ही पता चल पाएगा।
मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में ध्रुवीकरण की चर्चा
विधानसभा चुनाव मतदान में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में ध्रुवीकरण को लेकर खासी चर्चा है। इस बार चुनाव में मोदी या हिंदुत्व की लहर नहीं थी। प्रदेश में ऐसा कोई मुद्दा नहीं था। जिस पर दोनों दल अपना दावा कर सके। बावजूद इसके मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मतदान प्रतिशत के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। माना जा रहा है कि जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाता है। उन्होंने जमकर मतदान किया है। आपको बता दें कि प्रदेश की कई सीटें मुस्लिम आबादी वाली सीटें हैं। राजनीति के जानकार इसे ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार घरों से बाहर निकाल कर वोट डाला है।
अप्रवासी राजस्थानियों ने भी किया मतदान
राजस्थान में देवउठनी ग्यारस होने से मतदान दिवस में परिवर्तन किया गया था। देवउठनी ग्यारस पर प्रदेश में बंपर सावे थे। ऐसे में राजस्थान से बाहर रहने वाले मतदाता भी शादी ब्याह के चक्कर में प्रदेश में ही मौजूद थे। उन्होंने भी मतदान केदो पर जाकर मतदान किया है। आपको बता दें कि शेखावाटी क्षेत्र में ज्यादातर लोग रोजगार को लेकर अन्य शहरों में बसते हैं। वहां पर ऐसा देखा गया है। शादियों में आए लोगों ने मतदान केंद्रों पर जाकर मतदान किया है।
बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर बैठे मतदान की सुविधा
चुनाव में मतदान को लेकर अब निर्वाचन आयोग भी तरह-तरह के नए प्रयोग करने लगा है। निर्वाचन आयोग कई तरीकों से संदेश देता है। ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदान किया जा सके। इसका असर राजस्थान में भी दिखा है। राजस्थान में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कई प्रयोग किए गए। जिससे भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है। इस बार बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर बैठे मतदान की सुविधा थी। ऐसे में कई बुजुर्ग मतदाताओं ने घर पर रहकर ही अपना वोट डाला है। यह प्रयोग भी मतदान प्रतिशत का आंकड़ा बढ़ाने में कारगर साबित हुआ है। राजनीति के जानकार कहते हैं मतदान प्रतिशत बढ़ाने के पीछे नए मतदाताओं का जुड़ना और चुनाव को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा होना भी है। अब मतदान संपन्न हो चुका है। प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटियों में कैद हो गया है। अब चर्चाओं और कयासों का दौर चल रहा है। लेकिन लेकिन अंतिम परिणाम 3 दिसंबर को ही सामने आएंगे।












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