राजस्थान: विधानसभा चुनाव से पहले सियासी जमीन बचाने के लिए उठ रही नए जिलों की मांग, जानिए पूरी वजह

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले नए जिलों के गठन की मांग तेज हो गई है। दिलचस्प पहलू यह है कि नए जिलों की मांग कर रहे ज्यादातर विधायकों को चुनाव से पहले सियासी जमीन खिसकती नजर आ रही है।

raghu sharma

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले नए जिलों के गठन को लेकर पेच उलझ गया है। नए जिलों के गठन के लिए रामलुभाया कमेटी की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। चर्चा है कि 17 मार्च को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में नए जिलों की घोषणा कर सकते हैं। इससे पहले एक बार फिर राज्य में नए जिलों को लेकर मांग तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और केकड़ी विधायक रघु शर्मा ने केकड़ी को जिला बनाने को लेकर मीडिया के जरिए सरकार पर दबाव बनाया है। शर्मा का तर्क है कि राजस्थान की आबादी आठ करोड़ हैं। इसलिए अब नए जिले बनाए जाने चाहिए। प्रदेश में मंत्री राजेंद्र यादव, निर्दलीय विधायक बलजीत यादव, विधायक मदन प्रजापत, सुरेश मोदी, शंकर सिंह रावत और रघु शर्मा जिलों की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। राजनीति के जानकारों को मानें तो जिलों की मांग कर रहे ज्यादातर विधायकों की अपने ही इलाके में हालत खराब है। अपनी सियासी जमीन बचाने के लिहाज से तमाम नेता प्रदेश में नए जिलों की मांग उठाकर सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि नए जिलों का गठन सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सरकार का यह कदम आत्मघाती साबित हो सकता है।

अजमेर से सांसद रह चुके हैं रघु शर्मा

पूर्व मंत्री रघु शर्मा केकड़ी से दूसरी बार विधायक हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सांवर लाल जाट के निधन के बाद हुए उपचुनाव में शर्मा अजमेर से सांसद भी रह चुके हैं। 2018 में केकड़ी से विधायक का चुनाव जीतकर वे गहलोत सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने थे। हालांकि बाद में उन्हें मंत्री पद से हटाकर पार्टी ने गुजरात प्रभारी बना दिया था। जहां कांग्रेस की करारी हार हुई थी। इसके चलते उनकी सरकार से नाराजगी भी हैं। अब उनके खुद के इलाके में उनकी हालत बहुत खराब है। रघु शर्मा ने मंत्री रहते हुए कभी केकड़ी को जिला बनाने की मांग नहीं उठाई। आखिरी साल में उन्होंने इस मांग को उठाया है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि रघु शर्मा अजमेर के सांसद रह चुके हैं। ऐसे में अब उनकी यह मांग उनके सियासी कैरियर पर भारी पड़ सकती है। उपचुनाव में अजमेर लोकसभा की अधिकांश सीटों पर उन्हें बढ़त मिली थी। पार्टी उन्हें अजमेर लोकसभा सीट पर मजबूत दावेदार के तौर पर देखती है। ऐसे में उनका अजमेर लोकसभा क्षेत्र की अन्य विधासभा सीटों की अनदेखी कर केकड़ी विधानसभा को लेकर इस तरह की मांग करना खुद के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। प्रदेश में उन्हें बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता हैं। ऐसे में एक विधानसभा क्षेत्र तक रघु शर्मा का सिमट जाना हास्यास्पद लगता है। राजनीति के टिप्पणीकार कहते हैं आने वाले दिनों में प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की भी संभावनाएं हैं। रघु शर्मा जिले की मांग उठाकर सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं।

सियासी जमीन बचाने का राजनीतिक स्टंट

सियासी जमीन बचाने का राजनीतिक स्टंट

प्रदेश में रघु शर्मा की ही तरह अपनी विधानसभा को जिला बनाने की मांग कर रहे ज्यादातर विधायकों की अपने ही क्षेत्र में हालत खराब है। बहरोड़ से निर्दलीय विधायक बलजीत यादव भी जिले की मांग कर रहे हैं। लेकिन उनके क्षेत्र में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। उनकी स्थिति इलाके में बहुत बेहतर नहीं है। हालांकि बलजीत यादव सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाते रहते हैं। ऐसे ही राजेंद्र यादव के लिए कोटपूतली को जिला बनाना जरूरी हो गया है। यह मुद्दा उनके गले की फांस बन चुका है। पिछले दिनों राजेंद्र यादव जो कि सरकार में मंत्री भी हैं साफ कर चुके हैं कि अगर कोटपूतली को जिला नहीं बनाया गया तो वे पार्टी छोड़कर सड़क पर आ जाएंगे। चर्चा है कि कोटपूतली को जिला बनाने के लिए वे समर्थकों के साथ बड़ा आंदोलन शुरू कर सकते हैं। ऐसे ही बाड़मेर जिले में पचपदरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। यहां से कांग्रेस विधायक मदन प्रजापत दूसरी बार विधायक हैं। मदन प्रजापत जिले की मांग को लेकर नंगे पांव रहते हैं। प्रजापत 2013 में एंटी इंकम्बेंसी के चलते चुनाव हार गए थे। इस बार भी उन्हें यही डर सता रहा है। पचपदरा को जिला बनाने की उम्मीद के साथ वे फिर से खुद को रीपीट करने की जुगत में हैं।

बढ़ सकती हैं गहलोत सरकार की मुश्किलें

बढ़ सकती हैं गहलोत सरकार की मुश्किलें

प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लेकिन इस मसले को लेकर गहलोत सरकार मुश्किल में भी है। सरकार रीपीट करने की तैयारी में जुटे सीएम गहलोत के सामने नए जिलों का गठन बड़ी चुनौती है। प्रदेश में कई विधानसभा क्षेत्रों के विधायक अपने क्षेत्र को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सभी को जिला नहीं बनाया जा सकता। सीएम गहलोत गिनती के जिलों की घोषणा कर ज्यादातर विधायकों को नाराज नहीं कर सकते हैं। शायद यही वजह रही कि बजट 2023-24 में इसे लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि नए जिलों के गठन में तकनीकी दिक्क्तें भी आएंगी। जिससे भी मौजूदा विधायकों के नाराज होने की आशंका बढ़ जाती है। पूर्व मंत्री रघु शर्मा ने जिस तरह केकड़ी से अलग-अलग मदों में सरकार को मिलने वाले 80 करोड़ राजस्व का तर्क दे रहे हैं। उससे ज्यादा राजस्व ब्यावर में सीमेंट प्लांट से मिलता है। इसी तरह का विवाद नए जिलों की सीमाओं को लेकर भी है। राजनीति की समझ रखने वाले बताते हैं कि सरकार के विधायकों की नए जिलों को लेकर उठाई गई मांग सरकार मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा देंगी। सरकार का कोई भी फैसला विस्फोटक साबित हो सकता है।

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