बिजली संकट : CM गहलोत बोले-कोयला कंपनियों का कोई बकाया नहीं, DAP-कोयला आपूर्ति में केंद्र सरकार करें मदद
जयपुर, 13 अक्टूबर। देश में बिजली संकट है। इसको लेकर बयानबाजी का दौर भी चल रहा है। बिजली कंपनियों को कोयला सप्लाई करने वाली कंपनी कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल एक दिन पहले ही कहा कि राजस्थान ने पूरे साल कोयला नहीं लिया। छह सौ करोड़ रुपए का बकाया भी नहीं चुकाया और अब बारिश में अचानक कोयला मांगने लगे हैं जबकि बारिश के दिनों में खदानों में पानी भर जाता है।

वहीं इस मामले में राजस्थान सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि कोयला कंपनियों का कोई बकाया नहीं है। अग्रिम भुगतान किया गया है। राजस्थान सरकार कोल इण्डिया लिमिटेड एवं उसकी सहयोगी कंपनियों एनसीएल एवं एसईसीएल को कोयले की आपूर्ति के लिए अग्रिम भुगतान सुनिश्चित कर रही है। भुगतान को लेकर किसी स्तर पर कोई देरी या ढिलाई नहीं है।
विद्युत एवं डीएपी आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक में सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि राजस्थान विद्युत उत्पादन लिमिटेड (आरवीयूएनएल) ने नेशनल कोलफील्ड्स लि. (एनसीएल) को सम्पूर्ण बकाया 393 करोड़ रूपए का भुगतान अगस्त 2021 में ही कर दिया है। राज्य सरकार कोयला आपूर्ति की देशव्यापी कमी एवं डीएपी की समय पर आपूर्ति को लेकर चिंतित है। केंद्र सरकार पर इनकी आपूर्ति बढ़ाने के लिए राज्य सरकार पूरा दबाव बनाए हुए है।
गहलोत ने कहा कि प्रदेश में बिजली की सुचारू आपूर्ति के लिए हर स्तर पर बेहतरीन प्रबंधन किया जा रहा है। कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए अधिकारियों को सिंगरौली एवं बिलासपुर में तैनात किया गया है। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों अतिरिक्त मुख्य सचिव, ऊर्जा एवं प्रमुख सचिव कृषि को दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय के लिए भेजा गया है।
सितम्बर 2021 से फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट के तहत अब कंपनी को नियमित रूप से कोयले की आपूर्ति का अग्रिम भुगतान किया जा रहा है। एनसीएल को 1 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक 228 करोड़ रूपए का 8 अग्रिम भुगतान किया गया है। इसी प्रकार एसईसीएल के बकाया 50 करोड़ रूपए को कालीसिंध थर्मल में निर्धारित मात्रा से कम कोयले की आपूर्ति पर रिकॉन्सिलिएशन की प्रक्रिया के तहत जुलाई 2021 में समायोजित किया जा चुका है।

केन्द्र सरकार ने राज्य में इस साल अप्रेल से सितम्बर माह के दौरान 4.50 लाख मैट्रिक टन मांग के विरूद्ध 3.07 लाख मैट्रिक टन डीएपी की ही आपूर्ति की। साथ ही अक्टूबर महीने में 1.50 लाख मैट्रिक टन मांग के विरूद्ध 68 हजार मैट्रिक टन डीएपी स्वीकृत की है। इससे राज्य में डीएपी की कमी हो गई है। राज्य सरकार डीएपी की आपूर्ति में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री और कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों से दैनिक सम्पर्क बनाए हुए हैं और डीएपी आपूर्ति में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं।
DAP खाद संकट को लेकर एसएसपी के उपयोग के लिए किसानों को कर रहे जागरूक बैठक में बताया गया कि कृषि विभाग किसानों को वैकल्पिक फॉस्फेटिक उर्वरक सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) एवं एनपीके का उपयोग करने की सलाह दे रहा है, ताकि डीएपी की कमी से संभावित नुकसान से बचा जा सके। एसएसपी एक फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है, जिसमें 16 प्रतिशत फॉस्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा पाई जाती है। इसमें उपलब्ध सल्फर के कारण यह उर्वरक तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए अन्य उर्वरकों की अपेक्षा अधिक लाभदायक होता है।












Click it and Unblock the Notifications