Rajasthan: अशोक गहलोत सरकार लेगी ब्राह्मणों की सुध, विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मणों को साधने की तैयारी
जयपुर, 5 अगस्त। राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ब्राह्मणों की सुध लेने जा रही है। सरकार सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के तहत सवर्ण जातियों के उत्थान और प्रगति के लिए नई योजनाएं लागू कर सकती है। सरकार के विप्र कल्याण बोर्ड ने ब्राह्मण समाज की सामाजिक आर्थिक और पारिवारिक स्थिति जानने के लिए आम जनता से जानकारी और सुधार के सुझाव मांगे है। इसके लिए बकायदा विज्ञापन जारी किया गया है। विप्र कल्याण बोर्ड इस आधार पर रिपोर्ट बनाकर सरकार को देगा। राजस्थान में पहली बार सरकार ब्राह्मणों की समस्याओं और जीवन स्तर में सुधार के लिए कार्य योजना तैयार कर रही है। विप्र कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश शर्मा के मुताबिक पहले की सरकारों ने ब्राह्मणों को लेकर कभी नहीं सोचा। सीएम गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार पहली बार ब्राह्मणों की सुध लेने जा रही है। चुनाव आने के बाद उसकी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी। जिससे ब्राह्मणों के उत्थान और विकास का काम हो सके।

राजस्थान में ब्राह्मण समाज का राजनीतिक वर्चस्व
राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मण समाज का बड़ा वर्चस्व है। राज्य की 50 से अधिक विधानसभा सीटों को यह समाज सीधे तौर पर प्रभावित करता है। ब्राह्मण समाज के वोटों से हार जीत का फैसला होता है। प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज को भाजपा का बड़ा वोट बैंक माना जाता है। सरकार के इस प्रयोग के पीछे राजनीतिक एजेंडा माना जा रहा है। राजस्थान में ब्राह्मणों की आबादी करीब 10 फ़ीसदी है। प्रदेश के दोनों ही दल आबादी के हिसाब से टिकट देने में कोताही बरतते रहे हैं। 1949 से 1990 के बीच पांच मुख्यमंत्री ब्राह्मण समाज से मिले। लेकिन ब्राह्मणों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कांग्रेस के रणनीतिकारों ने ब्राह्मणों को लुभाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। सीएम अशोक गहलोत ने कैबिनेट में भी ब्राह्मण समाज को खासी तवज्जो दी है। सीएम गहलोत अपनी कैबिनेट में जातीय संतुलन को तरजीह देते रहे हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दी थी बड़ी राहत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सवर्णों को लुभाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। गहलोत सरकार ने 2019 में प्रवेश में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की व्यवस्था कायम कर आरक्षण में बड़ी राहत दी थी। इसके बाद वार्षिक आय को भी पात्रता का आधार माना जाएगा। राज्य सरकार अचल संपत्तियों के प्रावधान को समाप्त कर दिया है। प्रदेश की सरकारी सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए परिवार की कुल वार्षिक आय अधिकतम 8 लाख रुपए ही एकमात्र आधार माना जाएगा। सीएम गहलोत ने प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।













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