राजस्थान में 93 हजार गेस्ट टीचरों की भर्ती नियुक्ति से 5 दिन पहले स्थगित, जानिए उम्मीद टूटने की वजह
राजस्थान में 93 हजार गेस्ट टीचरों की भर्ती नियुक्ति से पांच दिन पहले स्थगित, जानिए उम्मीद टूटने की असली वजह
राजस्थान में बेरोजगारों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए अशोक गहलोत सरकार की ओर से 93 हजार युवाओं को गेस्ट फैकल्टी लगाने के लिए शुरू की गई विद्या संबल योजना नियुक्ति से महज पांच दिन पहले स्थगित हो गई है।

विद्या संबल योजना के तहत हजारों बेरोजगारों को बतौर गेस्ट फैकल्टी रोजगार मिलने की राह में रोड़ा अटकने की वजह शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही, अधूरी तैयारी और बिना आरक्षण के नियुक्ति देना है। विभाग में बड़े स्तर पर युवाओं से आवेदन प्राप्त किए। नियुक्ति से पांच दिन पहले ही योजना आगामी आदेशों तक स्थगित कर दी गई। योजना के तहत प्राप्त आवेदनों पर विभाग को सोमवार तक अस्थायी वरीयता सूचियों पर आपत्ति लेनी थी। इस दौरान अचानक भर्ती स्थगित कर दी।
गेस्ट फैकल्टी लगाने को लेकर राजस्थान सरकार ने युवाओं को काफी परेशान किया है। शिक्षा विभाग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर किया है। पहले विभाग ने वेबसाइट पर स्कूलों में खाली पदों की जानकारी देने की बात कही थी। फिर डीईओ कार्यालय में खाली पदों की सूची चस्पा की गई। बेरोजगारों को डीईओ ऑफिस और स्कूल स्कूल जाकर आवेदन करने पड़े थे। मीडिया से बातचीत में शिक्षामंत्री बीडी कल्ला ने कहा कि पूरी योजना की वित्त विभाग से समीक्षा करवा रहे हैं। कुछ ज्ञापन मिले हैं। समीक्षा के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
जानकारों के अनुसार गेस्ट फैकल्टी योजना के स्थगित होने की पहली वजह ये है कि टीएसपी क्षेत्र में टीएसपी अभ्यर्थियों को ही लगाने की मांग उठ रही थी। आरक्षण का प्रावधान नहीं रखने के कारण एससी व एसटी से जुड़े संगठनों ने सीएम अशोक गहलोत सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज करवाई। ऐसे में मामला कोर्ट में जाने की आशंका है। दूसरी वजह ये है कि वेतन उठने वाले पदों को खाली नहीं मानने को लेकर कई स्कूलों में हंगामा हुआ। इसके अलावा एक अभ्यर्थी को एक से अधिक स्थान पर आवेदन की छूट के चलते कई स्कूलों में पद खाली रहने की नौबत आ रही थी।
तीसरी वजह ये बताई जा रही है कि बड़ी संख्या में बाहरी राज्य के अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किए। उनकी नियुक्ति को लेकर विभाग ने गाइड लाइन जारी नहीं की। चौथी वजह यह है कि महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम व अन्य स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को वेतन कहीं और से उठ रहा है। जबकि शाला दर्पण में पद रिक्त दिखाए जा रहे हैं। अपग्रेड स्कूलों में पद स्वीकृत नहीं हुए। फिर भी तबादले कर दिए। अब वेतन रिक्त पदों से उठाया जा रहा है।












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