Rajasthan के सियासी बवाल को लेकर पायलट के बयान पर उठे सवाल, कहीं पार्टी हाईकमान का इशारा तो नहीं

Rajasthan के सियासी घटनाक्रम को लेकर सचिन पायलट के बयान पर सवाल उठने लग गए हैं। सचिन पायलट ने क्या यह बयान इसलिए दिया था कि उन्हें कांग्रेस हाईकमान से गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत मिल गया है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट लंबे समय से शांत थे। पायलट ने मोदी द्वारा अशोक गहलोत की तारीफ किए जाने के मुद्दे पर अपनी खामोशी तोड़ दी माना जा रहा है कि जिस तरीके से मोदी ने तारीफ के लिए केवल गहलोत को ही चुना। उससे पार्टी नेतृत्व ने बहुत अधिक आपत्तिजनक माना है।

पीएम मोदी ने इस वजह से की गहलोत की तारीफ

पीएम मोदी ने इस वजह से की गहलोत की तारीफ

पीएम मोदी अपने भाषण के एक-एक शब्द का चयन बड़ी सावधानी के साथ करते हैं। उनका उद्देश्य कांग्रेस में खलबली तथा मनमुटाव पैदा करना था और उन्होंने ऐसा कर भी दिया। माना जाता है कि भाजपा चाहती है कि गहलोत मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। ताकि उनके लिए सत्ता में लौटना आसान हो जाए। पायलट इस समय प्रियंका गांधी के साथ हिमाचल प्रदेश के दौरे पर हैं। सूत्रों की मानें तो यह निर्णय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का ही था कि गहलोत से टकराने का समय आ गया है। सचिन पायलट ने टकराव की सवाल उठ रहे हैं कि टकराव की स्थिति सिर्फ अशोक गहलोत के साथ ही क्यों पैदा की। वे चाहते तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी टकरा सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने पदभार संभाला, काम शुरू नहीं किया

मल्लिकार्जुन खड़गे ने पदभार संभाला, काम शुरू नहीं किया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अभी पदभार संभाला है। स्वतंत्र फैसले लेना अभी तक शुरू नहीं किया है। गहलोत के बारे में फैसला लेने में गुजरात चुनाव की वजह से देरी हुई है। अशोक गहलोत गुजरात विधानसभा चुनाव के पर्यवेक्षक हैं। गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए काफी पैसों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में अशोक गहलोत व्यवस्था करेंगे। मजेदार बात यह है कि उन्होंने अभी तक गुजरात में पैसा नहीं लगाया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व के साथ सौदेबाजी करने के मकसद से उन्होंने अभी गुजरात में पैसे लगाने के फैसले को रोका हुआ है।

गहलोत से समझौते के मूड में नहीं कांग्रेस हाईकमान

गहलोत से समझौते के मूड में नहीं कांग्रेस हाईकमान

पार्टी के भीतर से मिल रहे ताजा संकेतों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान अशोक गहलोत के साथ समझौता करने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि कांग्रेस के अंदर गुटबाजी बढ़ती ही जा रही है। ऐसा तब तक होता रहेगा जब तक सोनिया और खड़गे कोई कदम नहीं उठाते हैं। पार्टी को उस बिखराव से बचाने के लिए निर्णय नहीं लेते हैं। राजस्थान में कांग्रेस अभी बिखराव की स्थिति में है। अशोक गहलोत के सीधे प्रहार करने वाले पायलट के आक्रामक बयान से सियासी और मीडिया के हलकों में खलबली मची हुई है। सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि आखिर पायलट ने अपनी खामोशी क्यों तोड़ी। जबकि वे लंबे समय से शांत और खामोशी के साथ धैर्य बनाए हुए थे।

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