लोकसभा चुनाव 2019 के मैदान में उतरी पति-पत्नी की जोड़ी, एक ही पार्टी ने दोनों को दिया टिकट

Jaipur News, जयपुर। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabhae elections 2019) में राजस्थान से चौंका देने वाली खबर आई है। यहां पति-पत्नी की जोड़ी को लोकसभा चुनाव के मैदान में एक साथ उतारा गया है। वो भी एक ही पार्टी की टिकट से। हम बात कर रहे हैं पूर्व आईपीएस पंकज चौधरी (IPS pankaj Chaudhary) और उनकी पत्नी मुकुल चौधरी की।

सूची में चौंकाने वाले नाम

सूची में चौंकाने वाले नाम

दरअसल, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए राजस्थान से प्रत्याशियों की दूसरी सूची शनिवार को जारी की, जिसमें छह प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है। छह प्रत्याशियों में पंकज चौधरी व उनकी पत्नी के नाम ने हर किसी को चौंका दिया है।

राजस्थान बसपा ने जारी की प्रत्याशियों की दूसरी सूची

राजस्थान बसपा ने जारी की प्रत्याशियों की दूसरी सूची

बता दें कि बसपा की दूसरी सूची में राजस्थान के जयपुर शहर, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर-सिरोही, चित्तौड़गढ़ और पाली लोकसभा सीट से उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं। बसपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी को बाड़मेर-जैसलमेर सीट और उनकी पत्नी मुकुल चौधरी को जोधपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया है। संभवतया लोकसभा चुनाव 2019 में यह पहला मामला होगा, जिसमें एक ही पार्टी की टिकट से पति-पत्नी चुनाव लड़ रहे हो।

इन्हें यहां से मिला मौका

इन्हें यहां से मिला मौका

पंकज चौधरी व मुकुल चौधरी के अलावा बसपा ने जयपुर शहर सीट से पूर्व आईएएस उमराव सालोदिया, पाली सीट से शिवाराम मेघवाल, जालौर-सिरोही से भागीरथ विश्नोई, चित्तौड़गढ़ से डॉ जगदीश चंद्र शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया गया है। इससे पहले बसपा ने पहली सूची में कोटा से हरीश कुमार, झालावाड़-बारां से डॉ बद्री प्रसाद, अलवर से इमरान खान, उदयपुर से केशुलाल और अजमेर लोकसभा सीट से कर्नल दुर्गालाल को मैदान में उतारा है।

कौन हैं पंकज चौधरी

कौन हैं पंकज चौधरी

वर्ष 2009 बैच के आईपीएस पंकज चौधरी को पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामले में गृह मंत्रालय ने बर्खास्त कर दिया था। इस संबंध में 6 मार्च को उनके घर के दरवाजे पर नोटिस चस्पा किए थे। इसके बाद 7 मार्च को उनकी सेवा समाप्ति कर दी गई थी। साल 2011 से 2018 के बीच चौधरी कोटा, बांसवाड़ा, जैसलमेर, अजमेर, बूंदी, दिल्ली और जयपुर में अलग अलग पदों पर रहे हैं। मंत्री सालेह मोहम्मद के पिता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलने के बाद वे पहली बार चर्चा में आए थे। इसके बाद नैनवां, बूंदी में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद उन्हें लापरवाही बरतने के आरोप में हटाया गया था। चौधरी ने राजस्थान के कई आईपीएस, आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने कई जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी शिकायतें की थीं।

ये भी पढ़ें- राजस्थान लोकसभा चुनाव के बारे में विस्तृत जानकारी

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