OPINION: राहुल गांधी के मानगढ़ दौरे से अशोक गहलोत की आदिवासी मतदाताओं को साधने की कवायद, जानिए सियासी मायने
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में आदिवासी समुदाय के लिए कई बड़ी सौगाते देकर इस समुदाय को साधने की कोशिश की है। राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस राजस्थान में गहलोत सरकार की योजनाओं के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा प्रदेश में 19 नए जिलों और 3 संभाग के गठन के बाद राज्य में सरकार के पक्ष में तेजी से माहौल बन रहा है। यही वजह है कि कुछ नए जिले और संभाग बनाने की तैयारी में है। दरअसल, कांग्रेस राजस्थान में मतदाताओं को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसी मुहिम के चलते कांग्रेस ने बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ धाम में विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राहुल गांधी की बड़ी सभा आयोजित की है। राजनीति के जानकारों की मानें तो प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच रैलियों के मुकाबले कांग्रेस राहुल गांधी के इस दौरे के बहाने बड़ा आयोजन करना चाहती थी। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी का आदिवासियों से गहरा जुड़ाव भी रहा है। भाजपा ने पिछले दिनों द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी मतदाताओं में जो सेंध लगाने की कोशिश की थी। कांग्रेस राहुल गांधी के मानगढ़ दौरे के जरिए भाजपा के उस दांव की काट निकालना चाहती है। आपको बता दें राजस्थान की राजनीति में आदिवासी बहुल क्षेत्र मेवाड़ और वागड़ की बड़ी भूमिका रहती है। वहीं मानगढ़ धाम से राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के आदिवासी मतदाताओं का गहरा जुड़ाव है। ऐसे में आदिवासी समुदाय पर फोकस करना कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दी आदिवासियों को सौगात
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मानगढ़ सभा में अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार की तरफ से मानगढ़ धाम के लिए कई घोषणाएं की है। लेकिन पीएम मोदी ने वादा किया था वह उन्होंने नहीं निभाया है। उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम के विकास के लिए 100 करोड़ रुपए मंजूर किए जा चुके हैं। अब भेरुजी मंदिर पर पुल निर्माण की मांग रखी गई है। पुल निर्माण की घोषणा करता हूं। जो की 37 करोड़ की लागत में बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ढाई हजार करोड़ की लागत में अपार हाई लेवल कैनाल बनाने का काम शुरू हो चुका है। पुल निर्माण की घोषणा के साथ सीएम गहलोत ने यह भी घोषणा की है कि अब छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा को बढ़ाया जा रहा है। इसमें अभी 50 हजार छात्र रह रहे हैं। अब एक लाख छात्रों के लिए व्यवस्था की जाएगी। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के छात्र रहेंगे। साथ ही उन्होंने दमदार तरीके से राजस्थान में जातिगत आधार पर जनगणना की घोषणा भी की है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जातिगत आधार पर जनगणना को चुनाव से पहले बड़े दांव के तौर पर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी ने की राजस्थान में महिलाओं को फ्री मोबाईल की शुरुआत
सीएम अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में राजस्थान सरकार द्वारा जारी की गई कई योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान में कल से महिलाओं को मोबाइल वितरित किए जा रहे हैं। इसकी संख्या 40 लाख है। इसकी शुरुआत राहुल गांधी ने मानगढ़ धाम से कर दी है। सीएम गहलोत ने अपने संबोधन में राजस्थान में लगभग जो भी योजनाएं लागू हुई। उनके साथ उनके निर्णय के पीछे राहुल गांधी का नाम भी लिया। उन्होंने यह भी कहा है कि 2000 शिक्षकों का ट्रांसफर किया गया है। जिससे जनजातीय क्षेत्र के युवाओं को यही रोजगार के अवसर मिलेंगे। आपको बता दें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरूवार दोपहर बिड़ला सभागार में इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना का शुभारम्भ करेंगे। मुख्यमंत्री गहलोत चिरंजीवी परिवार की महिला मुखियाओं को स्मार्टफोन व इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ सिम वितरित करेंगे।
मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्त्व
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राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ धाम का आदिवासी समुदाय के लिए बड़ा महत्त्व है। मानगढ़ में महान संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1500 भीलों ने अपना बलिदान दिया था। यह बलिदान आजादी के आंदोलन में अब तक ख्यातनाम जलियांवाला बाग के बलिदान से भी बड़ा था और उससे भी पहले हो चुका था। मानगढ़ धाम बांसवाड़ा ज़िले में आनन्दपुरी से कुछ दूरी पर बना हुआ है। यह ऐसा स्मारक है। जो गुरुभक्ति और देशभक्ति को एक साथ दर्शाता है। लगभग सौ साल पहले 17 नवंबर 1913 मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गुरु का जन्मदिन मनाने के लिए एकत्र हुए हजारों गुरुभक्तों को ब्रिटिश सेना ने मौत के घाट उतार दिया था। इसी बलिदान के लिए मानगढ़ को धाम के तौर पर पूजा जाता है। लंबे समय से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग भी की जा रही है। इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार पीएम मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी के मानगढ़ धाम दौरे के दौरान उसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का आग्रह भी किया था।
मानगढ़ धाम की सियासी अहमियत
राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान में स्थित मानगढ़ धाम का प्रभाव तीन राज्यों में है। जिसमें गुजरात 27, राजस्थान 25 और मध्यप्रदेश 48 सीटें सीधे तौर पर प्रभावित होती हैं। ये सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इन 3 राज्यों की करीब 35-40 लोकसभा सीटों पर भी आदिवासी समुदाय का असर माना जाता है। गुजरात के चुनाव में भाजपा को इन क्षेत्रों में फायदा हुआ है। अब मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनाव पर तैयारी शुरू हो गई है। यहां की सियासत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान की कुल 100 विधान सभा सीटें प्रभावित होती है।
मानगढ़ के जरिए आदिवासी मतदाताओं को साधने की कोशिश
राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस का राजस्थान में एससी-एसटी सीटों पर फोकस है। इसके लिए राजस्थान में मिशन-59 भी चलाया जा रहा है। इस मिशन के तहत पार्टी एससी-एसटी समुदाय की 59 सीटों पर फोकस कर रही है। प्रदेश में 34 एससी सीट और 25 एसटी सीटें है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 12 और भाजपा ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि दो एसटी सीटों पर बीटीपी ने जीत हासिल की थी। यहीं नहीं प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने आदिवासी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए आदिवासी बहुल क्षेत्र बांसवाड़ा को नया संभाग बना दिया। जबकि सलूंबर को नया जिला बना दिया है। इनके जरिए पार्टी ने आदिवासी समाज को साधने की पूरी कोशिश की है। हाल ही में नए बने बांसवाड़ा संभाग में बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिले आएंगे। इन तीन जिलों में 11 आदिवासी सीटें आती हैं। इसके अलावा सलूंबर की 1 और उदयपुर में भी 4 आदिवासी सीटें हैं। बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में 2-2, डूंगरपुर में 1, उदयपुर में 1 सीट पर ही कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में कांग्रेस इस बेल्ट में खुद को मजबूत करना चाह रही है।












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