OPINION: तेलंगाना में पार्टी और सरकार के बीच क्या सब कुछ ठीक चल रहा है? जानिए कांग्रेस की अंदरूनी गणित
OPINION: तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 के बाद कांग्रेस पार्टी प्रदेश में जितनी तेजी से बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उतनी ही तेजी से पार्टी के नेतृत्व का ग्राफ कमजोर होता जा रहा है। मौजूदा समय में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी है। लेकिन सत्ताधारी कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कलह की खबरें कई बार सामने आ चुकी है। पार्टी के भीतर जीत के श्रेय को लेकर संग्राम मचा है। पार्टी का एक बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को जीत का श्रेय देता है। लेकिन सूत्रों की माने तो कांग्रेस के प्रति वफादार रहे कई वरिष्ठ नेता इस तर्क से असहमत हैं। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के 2018 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कई रिपोर्ट खुलासा करती है कि पार्टी के भीतर एक और वर्ग सक्रिय है। यह गुट पार्टी के पुराने वफादार नेताओं का है। यह वर्ग मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के प्रति अब भी स्वीकार्यता नहीं रखता है और उन्हें बाहरी के तौर पर देखा है।
प्रदेश की सियासत में विपक्ष से जुड़े जानकारों की माने तो कई मौकों पर राज्य सरकार के मंत्रियों को खुद मुख्यमंत्री के बयानों का खंडन किया है। मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली के बार-बार दौरे, निगमों के अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा के बावजूद भी सरकारी आदेश जारी करने में देरी और कुछ मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों को विपक्ष ने हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि तेलंगाना में बीयर बचने के लिए सोम डिस्टलरीज को मंजूरी देने के तुरंत बाद विपक्ष के दबाव के चलते फैसला वापस ले लिया गया। इस पर बीआरएस प्रवक्ता और सोशल मीडिया संयोजक मणि कृष्णक ने कहा कि आबकारी मंत्री रंगे हाथ पकड़े गए हैं। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अनुमति रद्द करना अस्थाई है या स्थाई। राज्य सरकार को मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री के बयान में राजस्व को लेकर विसंगतियों पर भी स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए। जबकि मुख्यमंत्री ने वृद्धि का दावा किया था। मंत्री ने इस नकार दिया।

तेलंगाना में विधायकों के दल बदलने की भी चर्चा तेज हो गई है। बीआरएस विधायकों के दल बदलने की रणनीति को भी रेवंत रेडी द्वारा पार्टी के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
कोरतला के बीआरएस विधायक डॉ. संजय कालवाकुंतला ने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी मेरे राजनीतिक कैरियर में अब तक के सबसे सुरक्षित मुख्यमंत्री है। यह साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। आबकारी नीतियों से लेकर निगम अध्यक्षों की नियुक्तियां तक कांग्रेस पार्टी में एकता दिखाई नहीं दे रही है। मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक बयान देने के तुरंत बाद की सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देगी और छोटे समय के डिस्टिलरीज को अनुमति नहीं देगी। एक विशेष इकाई से अनुमति दी गई। केवल हमारे दबाव डालने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा के पटल पर कहा कि विधायकों की मुख्यमंत्री चुनने में कोई भूमिका नहीं है और पार्टी हाई कमान ने चुनाव किया है। यह तमाम घटनाक्रम बताते हैं कि कांग्रेस पार्टी और सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
राजनीतिक जानकारों की माने तो इससे साफ है कि पार्टी में सीएम रेवंत रेड्डी को अभी बाहरी व्यक्ति के तौर पर देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि एआईसीसी ने किसी को पद पर बैठा दिया है। उनके पास अपनी सरकार मंत्री या पार्टी पर भी कोई नियंत्रण नहीं है। कई पार्टी नेता उनके खिलाफ है और अब वे खुलकर सामने आ रहे है। मुख्यमंत्री रेडी खुद बीआरएस विधायकों से संपर्क कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि वह अपने गुट को एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अन्य पार्टियों के विधायकों को अवैध रूप से अपनी पार्टी में शामिल कर समर्थन का आधार मजबूत करना चाहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री का दिल्ली का बार-बार दौरा भी उनके पास कोई नियंत्रण न होने के संकेत देता है। वह अन्य मंत्रियों को अनुशासित करने के लिए पार्टी हाई कमान पर निर्भर हैं। नहीं तो एक सप्ताह में कई बार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की यात्रा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी होगी।
तेलंगाना में लोकसभा चुनाव के दौरान 17 में से 8 सीटें जीतने वाली भाजपा ने भी इसी तरह के आकलन कर रही है। तेलंगाना के भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पुराने गार्ड ने कभी भी रेवंत रेड्डी को अपना नेता स्वीकार नहीं किया। सरकार के भीतर कलह बहुत साफ है। पार्टी नेताओं के बीच उनकी अस्थिरता उनके पतन का कारण बनेगी। उन्होंने अब भी अपने चुनाव पूर्व के वादों को लागू नहीं किया है। वादे पूरे करने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मुख्यमंत्री पार्टी में खुद को स्थापित करने की कोशिश में जुटे हैं। लोकसभा चुनाव के परिणामों को देखते हुए भाजपा अन्य सभी पार्टियों को टक्कर देने के लिए आत्मविश्वास से लबरेज है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और सरकार के भीतर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी उतनी मजबूत स्थिति में नहीं है। जिसके आधार पर वे पार्टी और प्रदेश का नेतृत्व कर सके। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि नेतृत्व दिए जाने के बावजूद भी उन्हें अपनों के ही बीच संघर्ष करना पड़ रहा है। इस संघर्ष के दौरान रेवंत रेड्डी लगातार पार्टी नेताओं पर से अपनी कमान खोते जा रहे हैं।












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