जयपुर स्थापना दिवस: क्या आप जानते हैं राजस्थान की पिंकसिटी की ये रोचक बातें?

जयपुर। इसी साल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने वाला जयपुर शहर आज अपना 292वां स्थापना दिवस मना रहा है। राजस्थान की राजधानी यह शहर आज अपने इतिहास, स्थापत्य कला और खूबसूरती के लिए दुनिया के शीर्ष पर्यटन स्थलों में शुमार है। इसे दुनिया के 10 सबसे खूबसूरत शहरों में भी शामिल किया जाता है। जयपुर के स्थापना दिवस पर आइए जानते हैं इसकी कुछ रोचक बातें।

महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 1727 में बसाया था जयपुर

महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 1727 में बसाया था जयपुर

शाम गुलाबी, सुबह गुलाबी, पहर गुलाबी है। गुलाबी-गुलाबी सा है ये मेरा शहर। गुलाबी नगरी और पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर आज 292 साल का हो गया है। आज ही के दिन 1727 में जयपुर शहर की स्थापना हुई थी। तत्कालीन महाराजा जयसिंह द्वितीय ने इस शहर को बसाया था। इसीलिए इसका नाम जयपुर रखा गया था। नगर नियोजन को ध्यान में रखकर बनाया गया ये देश का पहला शहर हैं। लिहाजा इसे भारत के पेरिस के नाम भी जाना जाता है। करीब तीन सदी से गौरवशाली इतिहास के साथ ढूंढाड़ी विरासत को संभाले जयपुर शहर आज भी दुनियां में अपना खास मुकाम रखता है। कहा जाता है कि भारत आने वाला हर दूसरा विदेशी पर्यटक पिंक सिटी को देखने जरूर जाता है। 3 सदियों बीतने को है, लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे आज भी जयपुर में कुछ नहीं बदला। आज भी वही किले, वही महल और वही रास्ते, जयपुर की विरासत को समेटे हुए हैं।

वास्तुकार विद्याधर ने डिजाइन किया था जयपुर

जयपुर की विरासत देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। तत्कालीन महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जयपुर को बसाने के लिए प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर को जिम्मेदारी दी थी। जयपुर को बसाने के दौरान शहर के चारों ओर एक चारदीवारी बनाई गई थी। जिसमें प्रवेश के लिए 7 गेट थे। आज भी इस चारदीवारी में बसा शहर परकोटा और चारदीवारी ही कहलाता है। सैकड़ों साल के भविष्य को सोचते हुए परकोटे के इलाके में सड़कों को भी काफी चौड़ा रखा गया था। शहर के ठीक बीचों-बीच तीन चौपड़े भी बनाई गई थी। जिन्हें रामगंज चौपड़, बड़ी चौपड़ और छोटी चौपड़ नाम दिया गया। इतना ही नहीं उस दौर में भी बारिश के निकासी का विशेष तौर पर इंतजाम किया गया था, जो आज भी आधुनिक भारत के ज्यादातर शहरों में देखने को नहीं मिलता।
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जयपुर में होंगे दो मेयर

292 साल के इतिहास में जयपुर ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। राजे रजवाड़ों का राज देखा है। अंग्रेजी सरकार की हुकुमत देखी है। बदलते वक्त के साथ जयपुर में भी सामाजिक और राजनीतिक तौर पर कई बदलाव हुए हैं। 1727 में जब इस शहर को बसाया गया था। तब इसकी आबादी सिर्फ 2 लाख हुआ करती थी, जो आज 60 लाख को पार कर चुकी है। आबादी के साथ-साथ जयपुर शहर भी अब परकोटे से बाहर कई किलोमीटर में फैल चुका है। जयपुर की आबादी को देखते हुए अब सरकार ने जयपुर में दो नगर निगमों के गठन की तैयारी शुरू कर दी है। जयपुर की पुरानी एतिहासिकता को बनाए रखने के लिए परकोटे के क्षेत्र को हेरिटेज जयपुर और परकोटे से बाहर बसे नए जयपुर को ग्रेटर जयपुर नाम दिया गया है। यानी अब जयपुर शहर में दो सरकारें होगी, जिनकी कमान दो मेयर संभालेंगे।

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