Beaufort Castle Video: Israel ने कब्जाया Lebanon का 800 साल पुराना किला, 14.5km अंदर तक घुसी नेतन्याहू की फौज

Beaufort Castle Video: वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी और गहरी कर दी है। इजरायली सेना ने ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कैसल (Beaufort Castle) और उसके आसपास की रणनीतिक पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका इजरायल की सीमा से लगभग 14.5 किलोमीटर अंदर, दक्षिणी लेबनान के नबातीयेह क्षेत्र के पास स्थित है। इजरायल इस ऑपरेशन को लेबनान में अपनी सबसे गहरी सैन्य घुसपैठ बता रहा है। वहीं यूरोपीय देशों ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया है।

नेतन्याहू ने क्या कहा?

ब्यूफोर्ट कैसल पर कब्जे के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे एक बड़ी रणनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा-

"आज हम ब्यूफोर्ट में अलग तरीके से लौटे हैं। हम एकजुट हैं, डिटरमाइन हैं और पहले से ज्यादा मजबूत हैं। हमने डर की बाधा तोड़ दी है। हम पहल कर रहे हैं। हम सीरिया, गाजा और लेबनान सभी मोर्चों पर कार्रवाई कर रहे हैं। हमने अपने समुदायों की सुरक्षा के लिए अपनी सीमाओं से बाहर सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किए हैं।"
Beaufort Castle Video

नेतन्याहू का यह बयान साफ संकेत देता है कि इजरायल अपनी सुरक्षा नीति को अब सीमाओं से बाहर तक विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रहा है।

कैसे मिला इजरायल को कब्जा?

इजरायली सीमा से करीब 14.5 किलोमीटर दूर स्थित ब्यूफोर्ट कैसल पर कब्जा आसान नहीं था। इस क्षेत्र में कई दिनों तक भारी लड़ाई चली, जिसके बाद इजरायली सेना को यहां कंट्रोल मिला। रविवार को इजरायल रक्षा बल (IDF) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसने ब्यूफोर्ट कैसल और आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। यह किला क्रूसेडर काल (11वीं से 13वीं शताब्दी के बीचे) का ऐतिहासिक किला माना जाता है और लंबे समय से दक्षिणी लेबनान की सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है।

IDF ने ऑपरेशन को लेकर क्या दावा किया?

IDF के मुताबिक यह मिलिट्री ऑपरेशन कई दिन पहले शुरू हुआ था। सेना का कहना है कि उसके जमीनी सैनिकों ने फॉरवर्ड डिफेंस लाइन का विस्तार करने के लिए बड़ी कार्रवाई की। IDF का दावा है कि ब्यूफोर्ट रिज का इस्तेमाल हिजबुल्ला के लड़ाके सैन्य गतिविधियों के संचालन और इजरायल के खिलाफ हमलों के लिए कर रहे थे। सेना के मुताबिक इसी क्षेत्र से दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजरायल में तैनात सैनिकों पर सैकड़ों रॉकेट दागे गए थे।

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हिजबुल्ला का मजबूत ठिकाना था यह इलाका

इजरायली सेना का कहना है कि ईरान के समर्थन से हिजबुल्ला ने ब्यूफोर्ट क्षेत्र में बड़ा सैन्य बुनियादी ढांचा तैयार कर रखा था। IDF के मुताबिक यहां कमांड सेंटर, वेपन स्टोर सुविधाएं और हमलों की योजना बनाने वाले ठिकाने मौजूद थे। सेना का दावा है कि हिजबुल्ला इस क्षेत्र से इजरायल पर लगातार हमले संचालित करता था।

ब्यूफोर्ट पर इजरायली झंडा फहराया गया

ब्यूफोर्ट कैसल पर कब्जे के बाद इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने किले पर इजरायली झंडा फहराया।इस दौरान रक्षा मंत्री काट्ज़ ने कहा-

"ब्यूफोर्ट पर कब्जा और जमीनी अभियान का विस्तार हमारे दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश है। जो भी इजरायल के नागरिकों को धमकी देगा, वह अपनी रणनीतिक संपत्तियां एक-एक करके खो देग

यह बयान बताता है कि इजरायल केवल सैन्य जीत नहीं बल्कि राजनीतिक और साइकोलॉजिकल मैसेज भी देना चाहता है।

क्या है ब्यूफोर्ट कैसल का इतिहास?

यूनेस्को के मुताबिक ब्यूफोर्ट कैसल लगभग 900 साल पुराना किला है। इसे क्रूसेडरों ने लिटानी नदी के ऊपर एक ऊंची चट्टान पर बनाया था। 12वीं शताब्दी में इसका विस्तार किया गया और इसे ब्यूफोर्ट नाम दिया गया, जिसका पुरानी फ्रेंच भाषा में अर्थ होता है सुंदर किला। स्थानीय लोग इसे "कलात अल-शकीफ" नाम से जानते हैं।

1982 के युद्ध में भी बन चुका रणभूमि

ब्यूफोर्ट कैसल पहले भी कई संघर्षों का गवाह रहा है। 1982 के लेबनान युद्ध के दौरान इजरायल ने इसे फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) से छीन लिया था। इसके बाद 2000 तक इजरायल ने इस पर कब्जा बनाए रखा और इसे एक बड़े सैन्य अड्डे में बदल दिया। इजरायल की वापसी के बाद यह इलाका हिजबुल्ला के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल हो गया।

क्यों है यह किला इतना महत्वपूर्ण?

यह किला उत्तरी इजरायल के गैलील क्षेत्र और दक्षिणी लेबनान के नबातीयेह इलाके पर नजर रखने की क्षमता देता है। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से यहां से सैन्य गतिविधियों की निगरानी आसान हो जाती है। वहीं आज के दौर के हिसाब से देखें तो डिफेंस एक्सपर्ट मानते हैं कि ब्यूफोर्ट पर कब्जा इजरायल को लिटानी नदी के पार और गहरे मिलिट्री ऑपरेशन चलाने का आधार दे सकता है। साथ ही यह लेबनान के साथ होने वाली संभावित बातचीत में भी इजरायल की स्थिति मजबूत कर सकता है।

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यूके-यूरोप ने की कड़ी आलोचना

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में इस तरह की बड़ी मिलिट्री ऑपरेशन को उचित नहीं ठहराया जा सकता। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने UNSC की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की और इजरायली मिलिट्री ऑपरेशन को "अस्वीकार्य" बताया। इसके अलावा ब्रिटेन ने भी इसे गलत बताया है।

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