भारतीय सेना के जवान कैसे फंसते हैं ISI की हसीनाओं के जाल में? जानिए पाकिस्‍तान की 'डर्टी आर्मी' का सच

जयपुर, 28 जुलाई। पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की खूबसूरत हसीनाओं के जाल में भारतीय सेना के जवानों के फंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला राजस्‍थान की राजधानी जयपुर में दो दिन पहले ही सामने आया है। यहां से स्टेट इंटेलिजेंस की टीम ने शांतिमय राणा को पकड़ा है। मूलरूप से बागुंडा पश्चिम बंगाल के रहने वाले राणा पर भारतीय सेना में अपनी रेजिमेंट के गोपनीय दस्तावेज एवं युद्धाभ्यास के वीडियो पाकिस्‍तान भेजने के आरोप हैं।

जवानों का ईमान आखिर क्‍यों बिक रहा है?

जवानों का ईमान आखिर क्‍यों बिक रहा है?

शांतिमय राणा पहला जवान नहीं है, जिसने भारतीय सेना की वर्दी पर दाग लगाया है। इससे पहले भी जोधपुर में प्रदीप कुमार जैसे कई जवान पैसों के लालच और हुस्‍न के जाल में फंसकर देश से गद्दारी कर बैठे हैं। देश की रक्षा की जिम्‍मेदारी वाले इन जवानों का ईमान आखिर क्‍यों बिक रहा है? क्‍यों ये हमारी सामरिक महत्‍व की सूचनाएं दुश्‍मन देश पाकिस्‍तान के हाथों तक पहुंचा रहे हैं? इसका जवाब है कि पाकिस्‍तान की 'डर्टी आर्मी'

 पाकिस्‍तान की 'डर्टी आर्मी' में हसीनाओं की 'पलटन'

पाकिस्‍तान की 'डर्टी आर्मी' में हसीनाओं की 'पलटन'

हनीट्रैप में पकड़े गए इन जवानों ने सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं, जिनकी कड़ी से कड़ी जोड़ने पर पता लगता है कि पाकिस्‍तान की नियमि‍त आर्मी के अलावा 'डर्टी आर्मी' भी बनी हुई है, जिसमें बाकायदा हसीनाओं की 'पलटन' है, जिसका काम सिर्फ शातिर तरीके से भारतीय सेना के जवानों को फंसाने का है। हनीट्रैप में पकड़े गए जवानों से पूछताछ में पता कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारतीय सेना की जासूसी के लिए 300 महिला एजेंट्स को भर्ती किया हुआ है।

सबसे अधिक फोकस जम्‍मू कश्‍मीर पर

सबसे अधिक फोकस जम्‍मू कश्‍मीर पर

बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तान की इस 'डर्टी आर्मी' का सबसे अधिक फोकस जम्‍मू कश्‍मीर पर है। इसके अलावा पंजाब और राजस्‍थान में भी अक्‍सर शिकार की तलाश में रहती है। पंजाब व जम्मू में जासूसी के लिए लाहौर तथा रावलपिंडी में, कश्मीर में जासूसी के लिए मीरपुर में, गुजरात सीमा पर जासूसी के लिए कराची में व राजस्थान में जासूसी के लिए सिंध इलाके में स्थित हैदराबाद में कॉल सेंटर बनाया गया है। आईएसआई की इन महिला एजेंटों को अपने अपने जोनवार कॉल सेंटर से काम करना होता है।

हनीट्रैप का टास्क सौंपा जाता है

हनीट्रैप का टास्क सौंपा जाता है

मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि पाकिस्‍तान की डर्टी आर्मी में साल 2019 से गरीब लड़कियों, स्थानीय कॉल गर्ल और कॉलेज की लड़कियों की महिला एजेंट के लिए भर्ती किया जाना शुरू किया है। इन महिला एजेंट्स को ट्रेनिंग के बाद कैप्टन रैंक के अधिकारी की निगरानी में हनीट्रैप का टास्क सौंपा जाता है। समय-समय पर इनकेकाम की समीक्षा भी की जाती है।

 हसीनाओं को मिलते हैं हिंदू नाम

हसीनाओं को मिलते हैं हिंदू नाम

ट्रेनिंग के दौरान इन महिला एजेंटों को हिंदू नाम मसलन, मुस्कान, रिया, प्रिया, सोनम जैसे दिए जाते हैं। हसीनाओं की इस पलटन किसी होटल में ठहराया जाता है। वहां होटल रूम में ये छोटा मंदिर बनाकर रहती हैं। साड़ी पहनती हैं। बिंदू लगाती हैं। पूजा पाठ करती भी नजर आती हैं ताकि इनके पाकिस्तानी होने पर शक नहीं हो।

महिला जासूसों को 180 दिन की ऑनलाइन ट्रेनिंग

महिला जासूसों को 180 दिन की ऑनलाइन ट्रेनिंग

पाकिस्तान की महिला जासूसों को 180 दिन की ऑनलाइन और डार्कवेब की ट्रेनिंग के बाद प्रत्येक महिला एजेंट को 50 भारतीय प्रोफाइल दी जाती है। महिला एजेंट्स को इन प्रोफाइल वाले शख्स को हनीट्रैप के जाल में फंसाकर गोपनीय सूचनाएं हासिल करनी होती हैं। ये शुरुआती में दोस्ती करती हैं। फिर सामान्य कॉल से न्यूड वीडियो कॉल करने लगती हैं। उसकी बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर सूचनाएं मंगवाती हैं।

 आरोपी जवान राणा पुलिस रिमांड पर

आरोपी जवान राणा पुलिस रिमांड पर

इधर, जवान शांतिमय राणा को मंगलवार को मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट जयपुर महानगर प्रथम कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। डीजीपी इंटेलिजेंस उमेश मिश्रा के अनुसार आरोपी जवान से अब तक की पूछताछ में पता चला कि वो बीते दो साल से पाक महिला हैंडलरों से कई व्हाट्सएप नंबरों एवं टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क में था।

 आरोपी के बैंक खाते में भेजे पैसे

आरोपी के बैंक खाते में भेजे पैसे

आरोपी के बैंक अकाउंट रिकॉर्ड में धनराशि प्राप्त होने की पुष्टि हुई है। पाक महिला हैण्डलरों के इशारे पर आरोपी के खाते में धनराशि भेजने वाले तथा भारतीय मोबाइल नंबरों से पाक महिला हैण्डलरों को व्हाट्सएप एवं टेलीग्राम डाउनलोड करवाने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के संबंध में गहन अनुसंधान कर उन संदिग्ध व्यक्तियों का पता लगाया जा रहा हैं।

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