Rajasthan में तीसरा मोर्चे को लेकर संशय, पार्टियों के पास नहीं है कोई मजबूत चेहरा
Rajasthan में 15 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी राजनीतिक दल इस चुनाव में बड़ी जीत के लिए उत्सुक हैं। भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य कई पार्टियां भी इस कोशिश में है कि उनकी इतनी उपस्थिति विधानसभा में हो जाए कि वे सरकार का हिस्सा बन जाएं। लेकिन एकाध दलों को छोड़कर अन्य दलों के पास प्रदेश में ऐसा कोई चेहरा नहीं है। जिनके नाम पर चुनाव लड़ा जा सके। भाजपा और कांग्रेस के अलावा मौजूदा समय में आरएलपी ही एक ऐसी पार्टी है। जिनके पास जनता के बीच जाने के लिए चुनावी चेहरा है। आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल विधायक रह चुके हैं और अभी नागौर से सांसद हैं।

आम आदमी पार्टी के पास अरविंद केजरीवाल के सिवा कोई नहीं
राजस्थान में आम आदमी पार्टी के पास अरविंद केजरीवाल के सिवा कोई बड़ा चेहरा नहीं है। आप ने प्रदेश में 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा तो कर दी है। लेकिन प्रदेश में उनके पास कोई लोकप्रिय चेहरा नहीं है। पार्टी के नेताओं के मुताबिक राजस्थान में स्थानीय चेहरे की तलाश पार्टी नेताओं को खल रही है। पंजाब में आम आदमी पार्टी के पास स्थानीय चेहरा तो था। साथ ही अरविंद केजरीवाल का नाम भी था।

बसपा के पास वोट बैंक तो है लेकिन नेता नहीं
बसपा के पास कोई भी ऐसा चेहरा नहीं जो पार्टी को अपने दम पर चुनाव मैदान में उतर सके और बड़े स्तर पर विधायकों को जिता सके। राजस्थान में बसपा का अपना एक वोट बैंक है। उसी आधार पर पार्टी की कुछ विधायक यहां जीतकर आ रहे हैं। हालांकि जीतने के बाद यह विधायक अपना पाला बदल लेते हैं। पार्टी इस बार कोशिश कर रही है कि पिछले बार के मुकाबले राजस्थान में ज्यादा सीटें जीती जाए।

आरएलपी का चेहरा है हनुमान बेनीवाल
राजस्थान में आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल का पश्चिमी राजस्थान में काफी प्रभाव है। उनकी पार्टी ने अन्य क्षेत्रों में भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। हनुमान बेनीवाल अभी नागौर से सांसद है। बेनीवाल नागौर की खींवसर सीट से विधायक रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। वही भारतीय ट्राइबल पार्टी के पास आदिवासियों का एक सीमित वोट बैंक है। लेकिन बड़ा चेहरा नहीं ऐसे में बीटीपी के एक सीमित क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शन को लेकर संशय की स्थिति है।













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