राजस्थान में BJP ने अपनों की दगाबाजी से हारी 11 सीटें, आलाकमान ने 2 दिन में खोज लिए सारे कारण
लोकसभा चुनाव 2024 में राजस्थान की 25 में से 11 सीटें भाजपा हार गई। सिर्फ 14 सीटों पर जीत मिली। हार के कारण जानने के लिए भाजपा की वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में बैठक की, जिसमें अपनों की दगाबाजी और पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेताओं की आपसी गुटबाजी की चर्चा रही।

जयपुर में रविवार को हुई बैठक में सीएम भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष व चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी, राजस्थान चुनाव प्रभारी विनय सहस्त्र बुद्धे, राष्ट्रीय संगठक वी सतीश आदि मौजूद रहे। पार्टी पदाधिकारियों ने बैठक में भरतपुर, श्रीगंगानगर, करौली-धौलपुर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर व चूरू लोकसभा सीटों की हार पर मंथन किया।
फीडबैक के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने माना कि 11 सीटों पर हार का बड़ा अपने ही लोग रहे। इनका फीडबैक पहले ही मिल गया था, लेकिन समय रहते कुछ नहीं हुआ। इन नेताओं ने पार्टी को हरवा दिया जबकि ये पार्टी प्रत्याशी के साथ रहने का नाटक करते रहे।
भरतपुर लोकसभा सीट की बैठक में सीएम भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। बैठक में क्षेत्रीय पदाधिकारी आमने-सामने हो गए। प्रत्याशी ने तो यहां तक कहा कि सामूहिक प्रयास नहीं हो पाए। लोकसभा प्रभारी व संभाग सह प्रभारी के बीच सामंजस्य नहीं रहा। टिकट मिलने के बाद 22 मंडल अध्यक्ष के बदला गया। आखिर इस बदलाव की जरूरत क्या थी?
इसी तरह से भरतपुर लोकसभा सीट पर टिकट मिलने के 24 दिन बाद लोकसभा प्रभारी को लगाया गया। इससे संगठनात्मक काम भी नहीं हो पाया। बैठक में फीडबैक के बाद सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि अब सभी को मिलकर काम करना है। आगे निकाय व पंचायत चुनाव भी हैं।
बैठक के बाद राजस्थान प्रदेश चुनाव प्रभारी विनय सहस्त्र बुद्धे ने मीडिया से बात की। हालांकि इस दौरान वे हार के कारणों के सवाल के जवाब को टाल गए। उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने कई चुनौतियां हैं। उप चुनाव व आगामी अन्य चुनावों पर चर्चा की है।
उल्लेखनीय है कि साल 2014 और 2019 में भाजपा ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी। साल 2024 के चुनाव में भाजपा सिर्फ 14 ही सीट जीत पाई। 11 सीटों में से 8 पर कांग्रेस, दो पर इंडिया गठबंधन के तहत सीपीआईएम व आरएलपी व एक सीट बीएपी ने जीती है।












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