राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ला रही तबादला नीति, जानिए इसके प्रावधान
जयपुर। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पास कार्मिक आए दिन तबादलों को लेकर गुहार लगाते नजर आते हैं. वहीं, तबादला नहीं होने पर कई बार मंत्रियों को नाराजगी भी झेलनी पड़ती है. इसको लेकर सरकार के विधायक तक अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं.

इस पर रोक लगाने के लिए सरकार तबादला नीति लाने जा रही है. जिस पर काम अंतिम चरण में है. जल्द ही इसके प्रदेश में लागू होने के आसार हैं. सालभर तबादलों के लिए अधिकारी, मंत्रियों के आगे पीछे नहीं घूमना पड़े, इसके लिए सरकार ट्रांसफर पॉलिसी (Transfer policy) लाने जा रही है.
पॉलिसी को मूर्त रूप देने के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग (Administrative Reforms Department) ने सभी विभागों के सुझाव मांगे हैं. उनके सुझाव के बाद फाइनल ड्राफ्ट सीएस की मीटिंग के बाद सीएम को प्रस्तुत किया जाएगा. जहां से हरी झंडी मिलते ही इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा.
ट्रांसफर पॉलिसी की महत्वपूर्ण बातें
- हर साल 1 अप्रैल से 30 जून तक हो सकेंगे तबादले.
- विभागों के अधिकारी 15 मार्च तक विभाग में रिक्तियों की जानकारी देंगे.
- 15 से 31 मार्च तक कार्मिक तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे.
- इसके बाद तबादलों को लेकर काउंसलिंग से फैसला लिया जाएगा.
- तबादलों में विधायकों की डिजायर सिस्टम खत्म हो जाएगा.
- सरकार 3 वर्ष पहले किसी भी कर्मचारी का तबादला नहीं कर सकेगी.
- खुद कर्मचारी 2 वर्ष पहले तबादले के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा.
- कोई भी कर्मचारी पांच वर्ष से ज्यादा एक स्थान पर नही रह सकेगा.
- तबादलों में दिव्यांग, एकल महिला, परित्यक्ता, विधवा, पूर्व सैनिक को प्राथमिकता दी जाएगी.
- उत्कृष्ट खिलाडी, पति-पत्नी, असाध्य रोगी और शहीद के आश्रित को प्राथमिकता दी जाएगी.
- कर्मचारी को मौजूदा पद पर कम से कम दो वर्ष काम करना होगा.
- हालांकि दिव्यांग, कैंसर, गुर्दा रोग, हृदय रोग, विधवा, परित्यकता आदि को इस नियम में छूट रहेगी.
- जहां तक संभव हो पति-पत्नी को एक ही स्थान पर रखा जाएगा.
- तबादले से कोई शिकायत है तो पहले उसे नई जगह पदभार ग्रहण करना होगा.
- परिवेदना मिलने के 45 दिन में इसका निपटारा करना होगा.
- किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट में एक वर्ष शेष रहा हो तो उसका तबादला नहीं होगा.
- यह नीति सभी सरकारी विभागों, बोर्ड, स्वायत्तशासी संस्थाओं, उपक्रमों में कार्यरत अराजपत्रित कर्मचारियों, जिनमें मंत्रालयिक, तकनीकी कर्मचारी, लेखाकर्मी व अन्य कर्मचाारी शामिल है, उन पर लागू होगी.
- शिक्षा विभाग में यह अशैक्षणिक कर्मचारियो और प्रधानाचार्य से नीचे के शैक्षणिक कर्मचारियों, उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग में सहायक प्रोफेसर से नीचे के कर्मचारियों पर लागू होगी.
इन पर लागू नहीं होगी ट्रांसफर पॉलिसी
- शासन सचिवालय,
- राज्यपाल सचिवालय,
- विधानसभा सचिवालय
- पुलिस, गृह रक्षा व होमगार्ड के वर्दीधारी कर्मचारी
उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, हिमाचल की तर्ज पर प्रदेश में भी जल्द ट्रांसफर नीति जारी होगी. तबादला नीति लागू होने से करीब 8 लाख कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा.












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