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छत्तीसगढ़: जानिए बस्तर फाइटर्स के बारे में, जिससे डरे हुए हैं नक्सली !

जगदलपुर, 11 अप्रैल। सुरक्षाबल बल अब छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के घने जंगलों में भी बेहिचक घुसने लगे हैं। जिन इलाकों में माओवादियों का वर्चस्व है वहां भी सशस्त्र बलों की दखल बढ़ी है। पुलिस फोर्स से लेकर नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय युवाओं की भर्ती किये जाने से अब माओवादी अपने ही घर में दुबकने के लिए मजबूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से बस्तर में स्थानीय युवाओं की मदद से तैयार की जा रही बस्तर फाइटर्स बटालियन के विरोध में नक्सली प्रचार कर रहे हैं।

बस्तर फाइटर्स से घबराये नक्सली

बस्तर फाइटर्स से घबराये नक्सली

बीते कुछ महीनों से नक्सली इस भर्ती के विरोध में बैनर पोस्टर लगा रहे हैं। बस्तर फाइटर्स में स्थानीय युवाओं की भर्ती से नक्सली बौखला गए हैं, वह नहीं चाहते कि स्थानीय युवा पुलिस और सुरक्षाबलों का सहयोग करें, इसलिए वह भय पैदा करके भर्ती को प्रभावित करना चाहते हैं। दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के सभी जिलों में 2800 से ज्यादा स्थानीय युवक-युवतियों को बस्तर फाइटर्स में भर्ती देने का ऐलान किया है, नक्सली इसी भर्ती से नाराज हैं। मिली जानकारी के मुताबिक नारायणपुर जिले के ओरछा इलाके में बीते रविवार को भी नक्सलियों ने सड़क को खोदकर, पेड़ों को काटकर, कई जगह बैनर पोस्टर लगाकर बस्तर फाइटर्स में स्थानीय युवाओं के भर्ती पर विराेध दर्ज कराया था।

बस्तर के सभी जिलों में तैनात होंगे बस्तर फाइटर्स

बस्तर के सभी जिलों में तैनात होंगे बस्तर फाइटर्स

माओवादियों ने 9 अप्रैल से 15 अप्रैल तक बस्तर के कई इलाकों में बस्तर फाइटर्स भर्ती पर नाराजगी जाहिर करते हुए बैनर पोस्टर लगाए हैं। बस्तर आईजी के मुताबिक बस्तर संभाग के सभी जिलों में स्थानीय युवाओं की भर्ती होने से नक्सलियों का खेमा कमजोर होगा, इसलिए वह बौखलाहट में भर्ती पर विरोध जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के विरोध के बाद भी स्थानीय युवाओं के बीच भर्ती को लेकर उत्साह है।

यह जानना भी जरुरी है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बस्तर पुलिस ने अंदरूनी इलाकों के युवाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और बस्तर पुलिस को नई मजबूती देने के बस्तर फाइटर्स बल का गठन किया गया है। गौरतलब है कि बस्तर फाइटर्स के 2800 पदों पर भर्ती की जा रही है।इस फोर्स में बस्तर संभाग के 7 जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव के युवाओं की भर्ती होगी। माना जा रहा है कि स्थानीय युवाओं से सुसज्जित बस्तर फाइटर्स नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब देगी।

डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स का होगा गठन

डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स का होगा गठन

छत्तीसगढ़ में डीएसएफ यानी डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स के नाम से जल्द ही एक एंटी नक्सल फोर्स अस्तित्व में आ जाएगी । गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बजट भाषण के दौरान इसके संबंध में घोषणा की थी। सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन है कि इस फोर्स में पुलिस या सीआरपीएफ के जवान नहीं, बल्कि पूर्व नक्सली होंगे।

गौरतलब है कि मौजूदा समय में लगभग तीन हजार युवाओं से सजा सुरक्षाबल "डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड" यानि डीआरजी नक्सल फ्रंट पर तैनात है। इससे पहले बस्तर में चलाये गए नक्सल विरोधी अभियान "सलवा जुड़ूम" के दरमियान भी सरकार ने स्पेशल पुलिस ऑफिसर यानि एसपीओ की भर्ती की थी। सरकार ने उन युवाओं को एसपीओ बनाया था, जो नक्सल हिंसा के कारण विस्थापित किये गए थे। लेकिन 2011 में जब सलवा जुड़ूम पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया था, तब इन्ही एसपीओ को सरकार ने सहायक आरक्षक बनाकर डीआरजी के नाम से अलग फोर्स खड़ी कर दी थी। इस फोर्स में नक्सल पीड़ित युवाओं और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को शामिल किया गया था।

कारगर रहा है स्थानीय युवाओं का नक्सलियों के खिलाफ इस्तेमाल

कारगर रहा है स्थानीय युवाओं का नक्सलियों के खिलाफ इस्तेमाल

छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को स्थानीय बोली और जंगलो के चप्पे-चप्पे की जानकारी होती है। वह घने जंगलों और बीहड़ो में बड़ी आसानी से घुसकर नक्सलियों के कैम्प ध्वस्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं स्थानीय भाषा का ज्ञान होने से वो ग्रामीणों से आसानी से संवाद कर पाते हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ में सरकार हमेशा ऐसे युवाओं को नक्सलियों के खिलाफ इस्तेमाल करने के पक्ष में रही है।

पूर्व नक्सलियों को नक्सलियों के खिलाफ इस्तेमाल करने से ना केवल नक्सलियों के कैम्प ध्वस्त करने में बड़ी सफलताएं मिलती हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं के मन में भी फोर्स के प्रति विश्वास बढ़ता है। गृह विभाग से जुड़े अफसरों का मानना है कि सरेंडर करने वाले नक्सली युवाओं को आत्मसमर्पण निति के तहत फायदा पहुंचने के कारण नक्सलियों के खेमे में काम कर रहे युवाओ में भी मुख्यधारा में लौटने का विचार आ रहा है, इस कारण से नक्सलियों की तरफ से सरेंडर करने के मामलों में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

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