Jabalpur News: एमपी में झोलाछाप डाक्टर्स का जाल, जबलपुर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस जारी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने झोलाछाप डॉक्टर के मामले में सख्ती दिखाई है। आईएमए की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के विभिन्न विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

Trap of quack doctors in MP: मध्य प्रदेश में विशेषतौर पर ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर आईएमए ने चिंता जताई है। इस सिलसिले में हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें बताया गया कि बिना वैधानिक डिग्री के ऐसे कथित डॉक्टर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अदालत ने याचिका में प्रस्तुत तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, नेशनल मेडिकल कमीशन दिल्ली समेत शासन के अन्य विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

इंडियन मेडिकल एसोशिएसन जबलपुर के अध्यक्ष डॉ. अमरेंद्र पांडे की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए सीनियर अधिवक्ता अनिल खरे और शिवेंद्र पांडे ने पक्ष रखा। बताया गया कि प्रदेश में विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों के इलाज का दावा करते हुए अनाधिकृत रूप से धंधा फलफूल रहा है। आलम यह है कि इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के पास न तो कोई वैधानिक डिग्री है और न ही एलोपैथिक इलाज करने की किसी तरह अनुमति। उसके बावजूद बेरोकटोक गंभीर मरीजों का तक इलाज किया जा रहा हैं। कई मर्तबा मरीजों की हालत बहुत क्रिटिकल हो जाती है और उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता हैं। जागरूकता की कमी की वजह से कुछ लोग सस्ते इलाज की वजह से ऐसे डॉक्टर के पास पहुंच जाते है।

याचिका में मांग की गई है ऐसे लोगों को चिन्हित कर दोषियों के खिलाफ कारवाई की जाए। सरकार से अलग बॉडी बनाने की मांग की गई है, जो शिकायतों पर संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करवा। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका में प्रस्तुत तथ्यों और दलीलों को गंभीर माना। इस सिलसिले में कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, नेशनल मेडिकल कमीशन नई दिल्ली, मप्र मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार के अलावा जबलपुर, भोपाल और छिंदवाड़ा के सीएमएचओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।












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