Jabalpur News: तंदूर पर बैन लगाकर अपना आदेश पलटने में जुटा जबलपुर का खाद्य सुरक्षा प्रशासन
एमपी के कई शहरों में तंदूर उपयोग पर बैन क्या लगा, कि हड़कंप मच गया। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद आदेश देने वाले अधिकारी अब अपना बयान पलट रहे है। कह रहे है कि सिर्फ सलाह दी थी।

Tandoor Ban Order:एमपी के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण का हवाला देकर लकड़ी या कोयले के तंदूर पर पाबंदी के फरमान जारी हुए। होटल, रेस्तरां, ढाबा संचालकों में टेंशन भी बढ़ गया। जिसका देशभर में हल्ला है। अब कई जगहों पर ऐसा फरमान जारी करने वाला खाद्य विभाग सफाई दे रहा है कि उसने किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया, बल्कि ऐसे तंदूर का उपयोग न करने की सलाह दी है। एक्सपर्ट के गले भी ये बात नहीं उतर रही कि किसी सलाह से क्या प्रदूषण रोका जा सकता है?

वायु प्रदूषण जैसी चीज जिससे कई तरह की बीमारियों का खतरा हो, उसे रोकने क्या कोई सलाह कारगर साबित हो सकती है? लाख टके का यह सवाल मध्य प्रदेश के जबलपुर में गूंज रहा है। यहां बीते कुछ दिनों पहले कमिश्नर बी. चन्द्रशेखर की बैठक में एयर पॉल्यूशन को लेकर चिंता जताई गई थी। जिसकी एक वजह कोयले या लकड़ी के उपयोग वाले तंदूर बताए गए और होटल, रेस्तरां में तंदूर की जगह LPG उपयोग कराने के निर्देश दिए थे। आनन-फानन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने भी संचालकों को नोटिस जारी कर दिए। जिसमें कमिश्नर की बातों का ही जिक्र था।

त्रैमासिक एक्शन प्लान की समीक्षा बैठक का हवाला देते हुए नोटिस में यह भी शामिल किया गया कि तंदूर का कम से कम उपयोग कर एलपीजी का गैस का उपयोग ज्यादा किया जाए। जबलपुर के बाद भोपाल, ग्वालियर, इंदौर समेत प्रदेश के कई शहरों में भी वहां के स्थानीय प्रशासन ने तंदूर उपयोग मामले में निर्देश जारी किए। जब इस मामले ने तूल पकड़ा और रेस्ट्रोरेन्ट, ढाबा संचालकों ने अपने व्यापार प्रभावित होने की बात कही तो अब नोटिस जारी करने वाले अधिकारी खुद अपने बयान से पलट गए। ताजा बयान में खाद्य अधिकारी का कहना है कि तंदूर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, सिर्फ उपयोग न करने की सलाह दी गई है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन के आदेश मजाक बनते जा रहे है।













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